जंबूरी से लेकर युक्तियुक्तकरण तक; सदन में शिक्षा मुद्दों पर तीखी बहस
NEWS IN SHORT
- जंबूरी टेंडर विवाद पर विधानसभा में बवाल
- मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष, ने किया वॉकआउट
- टेंडर से पहले शुरू हुआ काम? सदन में उठे गंभीर सवाल
- युक्तियुक्तकरण और अतिथि शिक्षक मुद्दे पर गरमाई राजनीति
- शिक्षा मंत्री ने आरोपों को खारिज कर किया जांच से इनकार
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के दौरान बुधवार को प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही सदन में जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने बालोद जिले में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए इसकी जांच विधानसभा समिति से कराने की मांग की। हालांकि, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और जांच की आवश्यकता से इनकार कर दिया। मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
जंबूरी आयोजन टेंडर प्रक्रिया पर सवाल - जवाब
सवाल - विधायक राघवेंद्र सिंह
प्रश्नकाल के दौरान राघवेंद्र कुमार सिंह ने जंबूरी आयोजन से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या कर्णिका 17.1 में संशोधन कर शिक्षा मंत्री को पदेन अध्यक्ष बनाया गया है, और यदि हां तो यह संशोधन कब किया गया।
जवाब - मंत्री गजेंद्र यादव
इसके जवाब में मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पहले शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा थे और उस समय कैबिनेट ने स्काउट-गाइड संगठन के अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया तय की थी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल तक यह प्रक्रिया जारी रही, लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे समाप्त कर दिया और मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने की नई व्यवस्था लागू की गई।
सवाल - विधायक राघवेंद्र सिंह
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक राघवेंद्र सिंह ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 10 दिसंबर 2025 को टेंडर जारी किया गया, जबकि मंत्री की नियुक्ति 13 दिसंबर 2025 को हुई। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि टेंडर किसके निर्देश पर जारी किया गया और उस समय अध्यक्ष कौन था।
जवाब - मंत्री गजेंद्र यादव
इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि जंबूरी कार्यक्रम की तैयारियां पहले से चल रही थीं और उस समय संबंधित अधिकारियों एवं कलेक्टर स्तर पर बैठकों के जरिए निर्णय लिए गए थे। उन्होंने कहा कि शासन की प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति के होने या न होने से नहीं रुकती।
सवाल - विधायक राघवेंद्र सिंह
विधायक ने आगे आरोप लगाया कि पहले जारी टेंडर को निरस्त कर 23 दिसंबर 2025 को दूसरा टेंडर निकाला गया और आयोजन के 90 बिंदुओं को घटाकर 52 कर दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 4 जनवरी को टेंडर खोला गया, जबकि उससे पहले ही काम शुरू हो गया था, जो नियमों के खिलाफ है।
जवाब - भाजपा विधायक सुशांत
इस पर भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कटाक्ष करते हुए ‘बोरे-बासी’ के मुद्दे का जिक्र किया, जिससे सदन में हंगामा बढ़ गया।
सवाल - विधायक कुंवर सिंह
विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने पूछा कि बिना बिल खोले निर्माण कार्य कैसे शुरू हो गया और क्या राशि जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के खाते में जमा की गई।
जवाब - मंत्री गजेंद्र यादव
मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ और राशि संबंधित विभागीय खाते में ही जमा की जाती है।
युक्तियुक्तकरण और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण पर घिरे मंत्री
स्कूलों के युक्तियुक्तकरण, अतिथि शिक्षकों की भर्ती कब होगी, वेतन और नियमितीकरण के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई, जहां गजेंद्र यादव को विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों—राजेश मूणत, सुनील सोनी और रोहित साहू—ने भी घेरा; मूणत ने युक्तियुक्तकरण के बाद स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया, जबकि सोनी ने खाली स्कूल भवनों और जर्जर स्कूलों के नवीनीकरण पर सवाल किया, जिस पर मंत्री ने जांच और सुधार का आश्वासन देते हुए बताया कि प्रदेश में 10,538 शालाओं का युक्तियुक्तकरण हुआ है, वहीं विपक्ष ने अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण में वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा।
विपक्षी दलों ने किया सदन से बहिर्गमन
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मंत्री के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट जानकारी देने से बच रही है और सवालों को घुमा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन सरकार जांच से बच रही है। इसके विरोध में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया।
अब आगे क्या
पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। जंबूरी आयोजन को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है और क्या भविष्य में इस पर किसी प्रकार की जांच होती है या नहीं।
निष्कर्ष
बालोद में हुए जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितताओं के आरोप उठे और विपक्ष ने जांच की मांग की। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए जांच से इनकार किया हैं। वही टेंडर प्रक्रिया, युक्तियुक्तकरण और अतिथि शिक्षकों के मुद्दों पर सदन में तीखी बहस हुई। असंतोष के चलते विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव उजागर हुआ।
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