एक करोड़ के मानहानि का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत बर्मन समेत तीन को नोटिस, 28 नवंबर तक मांगा गया जवाब

Umeshwari Baghel | Oct 14, 2026, 18:25 IST
जगदीश प्रसाद बंसल ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले से जुड़ा एक करोड़ रुपए की मानहानि का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत बर्मन समेत तीन लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों से 28 नवंबर तक जवाब मांगा गया है। यह याचिका हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई है।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में एक करोड़ रुपए की मानहानि का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में जगदीश प्रसाद बंसल ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत बर्मन समेत तीन लोगों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 28 नवंबर तक अपना जवाब देने को कहा है।



हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

जानकारी के मुताबिक जगदीश प्रसाद बंसल ने पहले हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी थी। हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं होने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपनी याचिका में एक करोड़ रुपए की मानहानि से जुड़ा मामला उठाया है।




सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था और बंसल ने किन आधारों पर उसे चुनौती दी है। इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।



तत्कालीन एसडीएम समेत तीन को नोटिस

इस मामले में तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत बर्मन का नाम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें और दो अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। अब संबंधित पक्षों को कोर्ट के सामने अपना जवाब पेश करना होगा। इसके बाद ही मामले में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।




28 नवंबर तक देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस का जवाब देने के लिए 28 नवंबर तक का समय दिया है। इस दौरान संबंधित पक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज अदालत में पेश कर सकेंगे। इन जवाबों के आधार पर कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा। इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले कानूनी आधार भी महत्वपूर्ण होंगे।




नोटिस जारी होने का क्या मतलब है?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने का मतलब किसी को दोषी ठहराना नहीं है। अदालत ने फिलहाल संबंधित पक्षों से उनका जवाब मांगा है। यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही अदालत आगे कोई फैसला करेगी।




अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अब सभी की नजर संबंधित पक्षों के जवाब पर रहेगी। जगदीश प्रसाद बंसल की याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे सुनवाई होगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एक करोड़ रुपए की मानहानि का दावा किन घटनाओं के आधार पर किया गया है। हाईकोर्ट के मूल आदेश और याचिका की पूरी जानकारी सामने आने के बाद मामला और स्पष्ट हो सकेगा।

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