MP की पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने की अमित कटारिया की शिकायत, लोकसभा अध्यक्ष को पत्र

Arun Tiwari | Aug 09, 2026, 09:33 IST
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छत्तीसगढ़ में 108 एम्बुलेंस टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और IAS अमित कटारिया की भूमिका को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की।

RAIPUR : रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद मध्यप्रदेश की पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि आईएएस अमित कटारिया पर लगे आरोपों के मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने 5 अगस्त को यह पत्र लिखा। बनर्जी ने छत्तीसगढ़ में चल रही 108 एम्बुलेंस की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बनर्जी ने इसमें गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग कज है। बृजमोहन ने भी इसी मामले में आरोप लगाए हैं।



108 पर घमासान:

छत्तीसगढ़ में 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा के संचालन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। टेंडर प्रक्रिया को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से शिकायत दर्ज कराते हुए जांच की मांग की है। इससे पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए थे। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर की प्रक्रिया पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।



पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने अपने पत्र में संबंधित प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में मुख्य तौर पर टेंडर की शर्तों, पात्रता और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। शिकायत का केंद्र IAS अधिकारी कटारिया से जुड़ी प्रक्रिया और निर्णय बताए जा रहे हैं।



नए टेंडर पर सवाल:

छत्तीसगढ़ में 108 संजीवनी एंबुलेंस सेवा के संचालन के लिए लंबे अंतराल के बाद नया टेंडर जारी किया गया था। करीब 350 से अधिक एंबुलेंस के संचालन से जुड़ी इस प्रक्रिया को लेकर शुरुआत से ही विवाद सामने आते रहे हैं। अलग-अलग चरणों में टेंडर की शर्तों और पात्रता को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया को कई बार निरस्त भी किया गया और बाद में शर्तों में बदलाव के साथ नई निविदा जारी की गई।



टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी:

सबसे बड़ा सवाल टेंडर की पात्रता शर्तों को लेकर उठाया गया। आरोप लगाया गया कि कुछ शर्तों में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कई कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा में शामिल होना मुश्किल हो गया। अनुभव, कारोबार और वाहनों की संख्या से जुड़े मापदंडों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठे। कुछ शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इन शर्तों का फायदा किसी खास कंपनी को मिल सकता है।



मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी है। सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी, गर्भवती महिलाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में इस सेवा की अहम भूमिका होती है। ऐसे में करोड़ों रुपये की सेवा से जुड़े टेंडर में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर उठने वाले सवालों को गंभीर माना जा रहा है।



पहले भी हुई शिकायत:

टेंडर प्रक्रिया को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल 2025 में जारी निविदा में कई संस्थाओं ने हिस्सा लिया था। इसके बाद तकनीकी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन वित्तीय प्रस्ताव खोले जाने से पहले टेंडर निरस्त कर दिया गया। बाद में संशोधित शर्तों के साथ दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई।



दूसरी बार भी आपत्तियां सामने आने के बाद प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा। इसके बाद तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें एक ही कंपनी के सामने आने को लेकर भी सवाल उठे। शिकायतकर्ताओं का तर्क रहा कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण सरकारी काम के लिए पर्याप्त प्रतिस्पर्धा होना जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, प्रक्रिया से जुड़े पक्षों की ओर से नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।



मेडिकल कार्पोरेशन की भूमिका पर संदेह:

इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी CGMSC की भूमिका भी चर्चा में रही है। टेंडर की शर्तों को लेकर पहले भी सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए गए हैं। अगस्त 2025 में भी 108 संजीवनी टेंडर की शर्तों को लेकर आपत्ति सामने आई थी और आरोप लगाया गया था कि कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली शर्तें रखी गई हैं।



मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा से जुड़े टेंडर की कुछ शर्तों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने भी एक मामले में ऐसी शर्त पर सवाल उठाया था, जिसके आधार पर पहले ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनी को नए टेंडर में भाग लेने से रोका गया था, जबकि ब्लैकलिस्टिंग की अवधि समाप्त हो चुकी थी।



अब पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी की शिकायत के बाद इस विवाद ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। बृजमोहन अग्रवाल के बाद एक और वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती द्वारा जांच की मांग किए जाने से सरकार और संबंधित विभाग पर भी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ सकता है।



FAQ

  1. 108 संजीवनी एक्सप्रेस सेवा से जुड़ा हालिया विवाद क्या है?
    Ans: छत्तीसगढ़ में 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा संचालन के लिए लगभग 350 से अधिक एम्बुलेंस का नया टेंडर जारी किया गया था। इसमें टेंडर की शर्तों, पात्रता, कारोबार सीमा (Turnover) और बार-बार बदलाव किए जाने को लेकर अनियमिताओं और पक्षपात के आरोप लगे हैं।
  2. 108 संजीवनी एक्सप्रेस सेवा टेंडर प्रक्रिया में कौन-सी प्रमुख संस्था और विवाद शामिल हैं?
    Ans: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) द्वारा टेंडर प्रक्रिया संचालित की जा रही है। अप्रैल 2025 से लेकर अब तक टेंडर कई बार निरस्त कर संशोधित शर्तों के साथ दोबारा जारी किए जा चुके हैं, जिसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल हो चुकी है।
  3. 108 संजीवनी एक्सप्रेस सेवा टेंडर का मुख्य उद्देश्य और महत्व क्या है?
    Ans: यह टेंडर प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं (सड़क दुर्घटना, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने) के कुशल संचालन के लिए जारी किया जाता है।

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