230 शिक्षकों से 52 करोड़ की ठगी, लोन के नाम पर ऐसे रचा गया पूरा खेल
झारखंड के गिरोह ने शिक्षकों को आसान तरीके से लोन दिलाने का लालच देकर करोड़ों रूपए की ठगी की है। जानकारी के अनुसार, गिरोह ने करीब 230 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया और उनसे लगभग 52 करोड़ रूपए की ठगी की है।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
गिरोह के लोग स्थानीय एजेंटों के माध्यम से शिक्षकों से संपर्क करते थे। उन्हें बताया जाता था कि बैंक से बड़ा लोन आसानी से मिल जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को कहा जाता था कि लोन की रकम में से लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा एजेंट या गिरोह को देना होगा।
झांसा यह दिया जाता था कि बाकी लोन की किस्तें गिरोह खुद भर देगा। शुरुआत में पीड़ितों को भरोसा दिलाने के लिए कुछ समय तक किस्तें भी भरी गईं। इससे शिक्षकों को लगा कि योजना सही है।
शिक्षकों के नाम पर लिए गए करोड़ों के लोन
गिरोह ने शिक्षकों के दस्तावेजों और बैंक खातों का इस्तेमाल करके बड़ी रकम के लोन लिए। कई शिक्षकों के नाम पर लाखों रूपए का कर्ज लिया गया।
एक शिक्षक के नाम पर 35 लाख रूपए तक का लोन लिया गया। इस तरह अलग-अलग शिक्षकों के नाम पर लिए गए कर्ज की कुल रकम करीब 52 करोड़ रूपए बताई गई है।
किस्तें भरना बंद किया तो खुला राज
शुरुआत में गिरोह की ओर से लोन की किस्तें भरी जाती रहीं। इससे पीड़ित शिक्षक निश्चिंत रहे। लेकिन कुछ समय बाद किस्तें आना बंद हो गईं।
जब बैंक से शिक्षकों को नोटिस और भुगतान के लिए दबाव आने लगा, तब उन्हें पता चला कि उनके नाम पर भारी-भरकम कर्ज चल रहा है।
इसके बाद कई शिक्षकों ने मामले की शिकायत की और पूरे नेटवर्क का खुलासा होने लगा।
तीन प्रमुख तरीके से ठगी
गिरोह के काम करने के कई तरीके हैं-
1. शिक्षक के नाम पर बड़ा लोन:
शिक्षक को लोन दिलाने का भरोसा दिया जाता था और लोन की रकम का एक हिस्सा गिरोह अपने पास रख लेता था।
2. दूसरे व्यक्ति के खाते में लेन-देन:
प्रधानाध्यापक या शिक्षक के खाते से दूसरे लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। बाद में शिक्षक को ही आरोपी बना दिया जाता था।
3. वेतन और ईएमआई का झांसा:
शिक्षकों को भरोसा दिया जाता था कि उनकी सैलरी से लोन की ईएमआई आसानी से कटती रहेगी और उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
एक मामले में 41 लाख रूपए का लोन
एक शिक्षक के नाम पर करीब 41 लाख रूपए का लोन लिया गया। गिरोह ने रकम का हिस्सा अपने पास रखा और शिक्षक को यह भरोसा दिलाया कि बाकी भुगतान और किस्तों की जिम्मेदारी उनकी होगी।
बाद में किस्तें नहीं भरी गईं और शिक्षक पर बैंक का कर्ज चढ़ गया।
58.98 लाख रूपए के लोन का भी मामला
एक अन्य मामले में शिक्षक के नाम पर करीब 58.98 लाख रूपए का लोन लिए जाने की बात सामने आई है। इसमें भी शिक्षक को कथित तौर पर यह भरोसा दिया गया कि लोन की रकम और किस्तों की व्यवस्था गिरोह करेगा।
जांच में एजेंटों और बैंककर्मियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले की जांच के दौरान स्थानीय एजेंटों के साथ-साथ बैंक से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। डीएसपी ने कुछ बैंककर्मियों की भूमिका से इनकार किया, जबकि जांच में अलग-अलग लोगों से पूछताछ की गई।
यानी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शिक्षकों के नाम पर इतने बड़े लोन कैसे स्वीकृत हुए और दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
पुलिस ने क्या किया?
मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने और अन्य आरोपियों की तलाश की बात भी सामने आई है। जांच में गिरोह के नेटवर्क, बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
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