भूपेश बोले प्यादों को मिली सजा, सीएम ने कहा दिमागी नक्सलियों का आतंक को आसरा
रायपुर. झीरम कांड के 10 दोषी नक्सलियों को फांसी की सज़ा सुना दी गई। झीरम कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति का वो अहम मुद्दा है जो 13 सालों से सुलगता रहा है। इस कांड में कांग्रेस ने अपनी एक पूरी पीढ़ी को खोया था। सजा के फैसले पर भूपेश बघेल ने कहा कि सिर्फ प्यादों को सज़ा मिली है। जांच और न्याय आज भी अधूरे हैं। वही सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि दिमागी नक्सलियों ने आतंक को संरक्षण दिया।
क्या बोले भूपेश:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में नक्सलियों के पैदल पियादों को दी गई सज़ा न अनुपातिक है और न इसे न्याय कहा जा सकता है। जिन्होंने षडयंत्र रचा और जिन्होंने इस जनसंहार को अंजाम दिया वे तो अभी भी बाहर खुले घूम रहे हैं।
नक्सलियों के बड़े नेताओं का नाम, पता नहीं किसके इशारे पर, एनआईए ने पहले ही हटा दिए थे। उन पर तो आरोप भी नहीं लगाया गया। न एनआईए ने षडयंत्र की जांच की, न जांच आयोग ने इसकी जांच की। भाजपा के नेता लगातार अडंगा अटकाते रहे और जांच नहीं होने दी।अदालत के फ़ैसले से हमारी सोच बदलने का प्रश्न ही नहीं है. हम अब भी मानते हैं कि न्याय अधूरा है क्योंकि जांच अधूरी है।
सीएम साय का बयान:
सीएम विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल पर पलटवार किया। उन्होंने कहा झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है। मामले में दोषी पाए गए दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है।
एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।
कांग्रेस पर निशाना:
सीएम ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।
भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। झीरम के उस क्रूर हमले में अपने प्राण गंवाने वाली सभी दिवंगत आत्माओं को नमन। विनम्र श्रद्धांजलि।
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