माचपल्ली एनकाउंटर की जांच के आदेश से बढ़ी हलचल, कलेक्टर ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

VINAY VERMA | May 19, 2026, 14:46 IST
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कांकेर के माचपल्ली जंगल में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की अब मजिस्ट्रियल जांच होगी। मुठभेड़ में एक महिला माओवादी की मौत के बाद कलेक्टर ने पखांजूर एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त कर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।

उत्तर बस्तर कांकेर जिले में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के ग्राम माचपल्ली के जंगल-पहाड़ी में हुई मुठभेड़ में एक महिला माओवादी की मौत के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने पूरे मामले की जांच के लिए पखांजूर एसडीएम मनीष देव साहू को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।



13 अप्रैल की मुठभेड़ अब जांच के घेरे में:

जानकारी के मुताबिक 13 अप्रैल 2026 को कोयलीबेड़ा विकासखंड के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माचपल्ली के जंगलों में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान एक अज्ञात महिला माओवादी के मारे जाने की सूचना सामने आई थी।



अब इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता, परिस्थितियों और वास्तविक तथ्यों की पड़ताल के लिए दण्डाधिकारी जांच बैठाई गई है। खास बात यह है कि जांच का आदेश पुलिस अधीक्षक की मांग के आधार पर जारी किया गया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में सभी पहलुओं को रिकॉर्ड पर लाना चाहता है।



पूरी कार्रवाई की होगी पड़ताल:

जांच अधिकारी को जो जिम्मेदारी दी गई है, वह केवल मौत की वजह तक सीमित नहीं है। पूरे ऑपरेशन की पृष्ठभूमि से लेकर मुठभेड़ की वैधता तक कई अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या वास्तव में माओवादी पहले से घात लगाकर बैठे थे? क्या यह पूर्व नियोजित हमला था? पुलिस बल किस आदेश और रणनीति के तहत सर्चिंग अभियान पर निकला था? मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं? इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी।



ग्रामीणों की गवाही तक होगी जांच:

दण्डाधिकारी जांच के दायरे में मृत महिला माओवादी की पहचान, उसका आपराधिक रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी शामिल की गई है। जांच अधिकारी को यह भी देखना होगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और चिकित्सकीय अभिमत क्या कहता है। इतना ही नहीं, आसपास के ग्रामीणों के बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पुलिस की एफआईआर, विवेचना रिपोर्ट और मौके से जब्त सामग्री का भी परीक्षण किया जाएगा। यानी प्रशासन इस मामले में केवल पुलिस के दावों पर निर्भर रहने के बजाय बहुस्तरीय तथ्य जुटाने की कोशिश कर रहा है।



मुठभेड़ पर सवाल?

बस्तर में नक्सल ऑपरेशन के बाद दण्डाधिकारी जांच कोई नई प्रक्रिया नहीं है, लेकिन इस बार जिस विस्तार से 11 बिंदुओं में रिपोर्ट मांगी गई है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल कानूनी औपचारिकता है या फिर मुठभेड़ को लेकर कहीं न कहीं प्रशासन भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है?



यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच अधिकारी को प्रेस विज्ञप्तियों, समन्स, स्वतंत्र सूचनाओं और अन्य अप्रत्यक्ष तथ्यों को भी शामिल करने को कहा गया है। इससे साफ है कि प्रशासन इस मामले में कोई तकनीकी कमी नहीं छोड़ना चाहता।



अब 15 दिन बाद क्या सामने आएगा?

अब नजर इस बात पर टिकी है कि 15 दिन बाद आने वाली दण्डाधिकारी जांच रिपोर्ट में क्या खुलासे होते हैं। क्या मुठभेड़ पूरी तरह वास्तविक और नियमसम्मत साबित होगी या फिर जांच में ऐसे तथ्य सामने आएंगे जो पुलिस कार्रवाई पर नए सवाल खड़े कर दें? फिलहाल इतना तय है कि माचपल्ली नक्सली एनकाउंटरअब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक जांच और सार्वजनिक बहस का विषय बन चुका है।



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