कवर्धा धान घोटाला : किसानों को फंसाने की साजिश नाकाम, 6 पर केस
समझें क्या है पूरा मामला
कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा थाना क्षेत्र के तीन धान खरीदी केंद्रों में बड़ा घोटाला सामने आया है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की संयुक्त जांच टीम के औचक निरीक्षण में पर्दाफाश हुआ। विपणन वर्ष 2025-26 में 2441 क्विंटल से अधिक धान और 21 हजार से अधिक बारदाने गायब मिले। शासन को 81 लाख 19 हजार 502 रुपए की चपत लगी। प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी समेत 6 आरोपियों पर FIR दर्ज हुई है।
तीन केंद्रों में घोटाला
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों धान केंद्रों के केंद्र में एक ही व्यक्ति है — समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी। उन्होंने अपने कम्प्यूटर ऑपरेटरों और फड़ प्रभारियों के साथ मिलकर यह घोटाला अंजाम दिया। तीनों केंद्रों पर अलग-अलग स्तर पर उनकी भूमिका थी लेकिन हर जगह वे या तो प्रबंधक थे या खरीदी प्रभारी।
तीन केंद्रों का हिसाब
बासिनझोरी केंद्र में 585 क्विंटल 98 किलो धान और 4130 बारदाने गायब मिले। यहाँ गंगादास प्रबंधक और फड़ प्रभारी तुकाराम साहू मिलकर काम कर रहे थे। बिरनपुर कला केंद्र में 1032 क्विंटल 36 किलो धान और 5777 बारदाने गायब मिले। यहाँ गंगादास खरीदी प्रभारी और प्रबंधक दोनों थे। उनके साथ केवल एक ऑपरेटर था। सहसपुर लोहारा केंद्र में 823 क्विंटल 58 किलो धान और 12075 बारदाने गायब मिले। यहाँ भी गंगादास दोहरी भूमिका में थे और फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना उनके साथ था।
किसानों को फंसाने की कोशिश
इस घोटाले की सबसे खतरनाक बात यह है कि तौल पत्रकों में केवल किसानों के हस्ताक्षर कराए गए थे। खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौल करने वालों के खुद के दस्तखत जानबूझकर नहीं किए गए। जांचकर्ताओं के मुताबिक यह एक सोची-समझी चाल थी ताकि अगर मामला उजागर हो तो किसानों को फंसाया जा सके और असली दोषी बच निकलें।
नियमों की भी धज्जियाँ उड़ाईं
धान उपार्जन नीति 2025-26 के अनुसार केंद्र में धान की कमी होने पर खरीदी प्रभारी को सक्षम अधिकारियों को लिखित सूचना देना अनिवार्य था। आरोपियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। नीति की कंडिका 15.9, 17.1 और अनुबंध की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ।
6 आरोपियों पर FIR दर्ज
कलेक्टर और उप पंजीयक के निर्देश पर लोहारा थाने में FIR दर्ज कराई गई। आरोपियों में प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी, फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, कम्प्यूटर ऑपरेटर बिहारी राम साहू, फड़ प्रभारी तुकाराम साहू, कम्प्यूटर ऑपरेटर पीलूराम साहू और कम्प्यूटर ऑपरेटर महावीर साहू शामिल हैं। इन पर बीएनएस (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 318(4), 316(5) और 3(5) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
FAQ
- कवर्धा धान घोटाले में कितना नुकसान हुआ और कितना धान गायब मिला?
उ. तीन धान खरीदी केंद्रों में कुल 2441 क्विंटल 92 किलो धान और 21982 बारदाने गायब मिले। इससे शासन को 81 लाख 19 हजार 502 रुपए की सीधी आर्थिक क्षति हुई। यह विपणन वर्ष 2025-26 का मामला है। - धान घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है और क्या कार्रवाई हुई?
उ. समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी को इस घोटाले का मुख्य आरोपी माना जा रहा है जो तीनों केंद्रों पर प्रबंधक या खरीदी प्रभारी थे। उनके समेत 6 लोगों पर लोहारा थाने में FIR दर्ज हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। - तौल पत्रक में सिर्फ किसानों के दस्तखत क्यों थे?
उ. जांच में पाया गया कि आरोपियों ने जानबूझकर तौल पत्रकों में खुद के और फड़ प्रभारी के दस्तखत नहीं किए। केवल किसानों के हस्ताक्षर कराए गए ताकि पकड़े जाने पर किसानों को फंसाया जा सके। यह इस घोटाले की सबसे शातिर चाल मानी जा रही है।
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