धान खरीदी में बड़ा घोटाला : कट्टों समेत 2 करोड़ का माल पार

Umeshwari Baghel | Jun 02, 2026, 13:20 IST
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रायपुर के धान खरीदी केंद्रों में 6590 क्विंटल धान गायब पाया गया। 12 समितियों में फर्जीवाड़ा, समिति प्रबंधक और राइस मिलर्स शामिल। दोषियों पर एफआईआर दर्ज, प्रशासन जांच और वसूली प्रक्रिया में लगा। किसानों को नुकसान।

NEWS IN SHORT

  • रायपुर की 12 समितियों में 6590 क्विंटल धान गायब
  • 2 करोड़ रुपए मूल्य का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया
  • समिति प्रबंधक और राइस मिलर्स ने मिलकर घोटाला किया
  • सरकारी बारदाने गायब, धान खुले बाजार में बेचा गया
  • कलेक्टर ने दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए

NEWS IN DETAIL

Raipur। रायपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में यह सामने आया कि जितनी धान खरीदी दिखाई गई थी, उतनी मिलरों को नहीं दी गई। जांच में यह पाया गया

कि जिले की 12 समितियों में कुल 6590 क्विंटल धान और लगभग 2 करोड़ रुपए मूल्य गायब है। प्रशासन इसे सीधे तौर पर चोरी मान रहा है। कलेक्टर ने दोषी समितियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, जबकि बाकी आठ समितियों पर आगे की कार्रवाई की तैयारी जारी है।

गड़बड़ी के मुख्य केंद्र

सबसे ज्यादा गड़बड़ी तिल्दा इलाके की कुछ समितियों में मिली है। जांच में पता चला है कि वहां के प्रभारियों ने न केवल धान की फर्जी एंट्री दिखाई, बल्कि सरकारी बारदाने भी गायब कर दिए।

उदाहरण के लिए, धान उपार्जन केंद्र सरपोंग में 510.52 क्विंटल धान के साथ 4640 बारदाने गायब मिले, जबकि धान उपार्जन केंद्र देवरी में 560.41 क्विंटल धान और 660 बारदाने गायब पाए गए। अधिकारियों का मानना है कि गायब धान को इन बारदानों में भरकर खुले बाजार में बेचा गया होगा।

समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों की भूमिका

जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि समिति प्रबंधक और कर्मचारी कागजों पर बोगस एंट्री दिखाकर वास्तविक स्टॉक में कमी को चूहा या दीमक के नुकसान के नाम पर छुपा देते हैं। ये लोग वास्तविक स्थिति को छुपाकर अपने आप को जिम्मेदारी से मुक्त कर लेते हैं। वहीं, विचौलिए और कोचिए छोटे किसानों से सस्ता धान खरीदकर सरकारी रेट पर बेचते हैं। इस प्रक्रिया में प्रति क्विंटल लगभग 1500 रुपए तक का मुनाफा कमाया जाता है।

राइस मिलर्स की हेराफेरी

राइस मिलर्स (चावल मिलर) भी इस घोटाले में शामिल हैं। ये मिलर्स कागजों पर चावल की डिलीवरी दिखाकर सरकार से मिलने वाला मिलिंग चार्ज (प्रोत्साहन राशि) प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही बचे हुए धान और चावल को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमाते हैं। इस तरह कई पक्ष मिलकर फर्जीवाड़ा करते हैं और किसानों के हक पर डाका डालते हैं।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

खाद्य विभाग के नोडल अफसर और अपर कलेक्टर कीर्तिमान राठौर ने दोषी समितियों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की जाएगी और गायब धान की कीमत तथा अन्य वित्तीय नुकसान की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी को रोकने के लिए निगरानी और कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

किसानों और बाजार पर असर

इस घोटाले का सीधा असर किसानों पर पड़ा है। उनका धान सही तरीके से मिलरों तक नहीं पहुंचा और उन्हें उनका हक नहीं मिला। इसके साथ ही, खुले बाजार में धान की कीमतें असामान्य रूप से बढ़ गई हैं। किसानों में नाराजगी और असंतोष बढ़ा है, क्योंकि सरकार की ओर से मिलने वाला समर्थन और भुगतान विलंबित हुआ।

भविष्य में सुधार और सुरक्षा

प्रशासन इस घोटाले को गंभीरता से ले रहा है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, आने वाले खरीफ सीजन में धान खरीदी केंद्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और डिजिटल स्टॉक रिकॉर्डिंग प्रणाली को लागू किया जाएगा। इससे किसानों का हक सुरक्षित रहेगा और ऐसी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।

निष्कर्ष

रायपुर का यह मामला दिखाता है कि धान खरीदी केंद्रों पर कड़ी नजर रखना कितना जरूरी है। प्रशासन की इस जांच से उम्मीद जागी है कि दोषियों को सजा मिलेगी और किसानों को उनका हक मिल पाएगा। कार्रवाई होगी और किसानों को उनका हक मिलेगा। यह घटना किसानों, सरकार और आम जनता के लिए चेतावनी भी है कि सरकारी योजनाओं और संसाधनों की रक्षा के लिए सतर्क रहना कितना महत्वपूर्ण है।

FAQ

  1. रायपुर में धान कितनी मात्रा में गायब हुई है?
    जिले की 12 समितियों में कुल 6590 क्विंटल धान गायब पाया गया है, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
  2. इस घोटाले में कौन-कौन शामिल हैं?
    इसमें समिति प्रबंधक, कर्मचारी, विचौलिए/कोचिए और राइस मिलर्स शामिल हैं। ये लोग कागजों पर बोगस एंट्री दिखाकर और धान/बारदाने बाजार में बेचकर मुनाफा कमाते हैं।
  3. प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?
    दोषी समितियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की गई है। शेष समितियों के खिलाफ आगे की जांच और कार्रवाई की तैयारी चल रही है। अधिकारियों ने पारदर्शिता के साथ नुकसान की वसूली और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

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