755 से सीधे 1190 हेक्टेयर! केशकाल-इकलामा खदान का दायरा बढ़ने पर भड़के अमित जोगी

Harrison Masih | Jun 30, 2026, 19:52 IST
केशकाल खदान विस्तार 2026
केशकाल इकलामा लौह अयस्क खदान क्षेत्र को 755 हेक्टेयर से बढ़ाकर 1190 हेक्टेयर करने की तैयारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। अमित जोगी ने सरकार पर उद्योगपतियों के हित में जंगल सौंपने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जंगल जनता के हैं या उद्योगपतियों के।

कबीरधाम सीमा से लगे केशकाल इकलामा लौह अयस्क खदान को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। खदान के लिए प्रस्तावित क्षेत्र को बढ़ाकर 755 हेक्टेयर से 1190 हेक्टेयर किए जाने की खबर सामने आने के बाद जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हित में जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को सौंपने की तैयारी कर रही है।



क्या है पूरा मामला?

मामला केशकाल-इकलामा लौह अयस्क परियोजना से जुड़ा है। केशकाल इकलामा लौह अयस्क खदान के लिए पहले 755.039 हेक्टेयर क्षेत्र आरक्षित करने का प्रस्ताव था। अब इसे बढ़ाकर 1190 हेक्टेयर करने की तैयारी की जा रही है। यानी करीब 435 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को परियोजना में शामिल किया जा सकता है।



रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के लिए तैयार किया गया है। पहले इस क्षेत्र में निजी कंपनी के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने के बाद सरकारी कंपनी के पक्ष में नया प्रस्ताव तैयार किया गया।



इको सेंसिटिव जोन बना वजह

बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आश्रित मेटल की परियोजना को लेकर जारी पर्यावरणीय स्वीकृति निरस्त कर दी थी। इसकी एक बड़ी वजह परियोजना क्षेत्र का इको-सेंसिटिव जोन से जुड़ा होना बताया गया। इसके बाद अब सरकारी कंपनी के लिए संशोधित प्रस्ताव तैयार किया गया है।



अमित जोगी ने उठाए सरकार पर सवाल

अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि जंगल, जल और जमीन किसी उद्योगपति की जागीर नहीं, बल्कि जनता की साझा संपत्ति है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार यह बताए कि जंगल किसके लिए बचाए जा रहे हैं और किसके लिए काटे जा रहे हैं।



पर्यावरण को लेकर बढ़ी चिंता

प्रस्तावित क्षेत्र बढ़ाए जाने की खबर के बाद पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। हालांकि, परियोजना से जुड़े अधिकारियों की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



सरकार पर विपक्ष का हमला

अमित जोगी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से उठाएगी और जंगलों को बचाने के लिए आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि यदि परियोजना के कारण पर्यावरण और आदिवासी हित प्रभावित होते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा।



फिलहाल सरकार की ओर से अमित जोगी के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, खदान क्षेत्र के विस्तार और परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।



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