कोरबा में RI और पटवारी को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, 2 घंटे तक किया हंगामा
News In Short
- कोरबा के नोनबिर्रा गांव में जमीन सीमांकन पर जमकर विवाद।
- RI और पटवारी की कार के सामने बाइक खड़ी कर रास्ता रोका।
- अधिकारियों को करीब 2 घंटे तक बंधक बनाया गया।
- परिवार ने रिश्वत और पक्षपात का आरोप लगाया।
- पुलिस ने चार ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
News In Details
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जमीन सीमांकन को लेकर विवाद बड़ा रूप ले लिया है। आरोप है कि गलत नाप और पक्षपातपूर्ण सीमांकन का विरोध करते हुए एक परिवार ने राजस्व निरीक्षक (RI) जयपाल सिंह और पटवारी भरत चौहान की कार के सामने बाइक खड़ी कर रास्ता रोक दिया। दोनों अधिकारियों को करीब दो घंटे तक रोककर रखा गया, इस दौरान ग्रामीणों और पटवारी के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 8 मई 2026 को नोनबिर्रा गांव के बनियापारा क्षेत्र में हुआ। पटवारी और RI नायब तहसीलदार करतला के आदेश पर आवेदक संतराम की जमीन (खसरा नंबर 643/1, रकबा 0.085 हेक्टेयर) का सीमांकन करने पहुंचे थे। हालांकि, संतराम और उनके परिवार के सदस्य लीलाधर पटेल, हुकूम चंद और हरिराम ने सीमांकन पर आपत्ति जताई। आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों की कार के सामने बाइक खड़ी कर रास्ता रोका, और लीलाधर ने रस्सी लाकर आत्महत्या की धमकी दी।
पटवारी भरत चौहान के अनुसार, परिवार ने अधिकारियों पर गलत तरीके से नाप-जोख करने और पैसे लेकर सीमांकन करने का आरोप लगाया। उन्होंने धमकी दी कि जब तक नायब तहसीलदार, कलेक्टर या थाना प्रभारी मौके पर नहीं आते, उन्हें जाने नहीं दिया जाएगा।
पुलिस कार्रवाई
करतला थाना पुलिस ने पटवारी की रिपोर्ट पर संतराम, लीलाधर पटेल, हुकूम चंद और हरिराम के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 126(2), 221, 296, 3(5) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच जारी है।
ग्रामीणों का पक्ष
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन पर दूसरे पक्ष के लोग अवैध कब्जा कर निर्माण कर रहे थे। उनका आरोप है कि RI और पटवारी विपक्षी पक्ष से रिश्वत लेकर सीमांकन कर रहे थे। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि सालों से जमीन का सीमांकन विवादास्पद है और 8 मई को किया गया सीमांकन गलत और पक्षपातपूर्ण था।
सोशल मीडिया पर वायरल
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें धक्का-मुक्की और अधिकारियों को बंधक बनाए जाने का दृश्य स्पष्ट है। यह मामला केवल जमीन सीमांकन का विवाद नहीं है, बल्कि राजस्व प्रक्रिया में पारदर्शिता और ग्रामीणों की जमीन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला भी बन गया है।
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