VVIP ड्यूटी में पुलिस बस से 2 युवकों की मौत, अब SP-DGP ऑफिस कुर्की के आदेश
समझें क्या है पूरा मामला
- VVIP ड्यूटी में गई पुलिस बस से दो युवकों की मौत
- मुआवजा नहीं मिला तो कोर्ट ने दिया सख्त आदेश
- 43 लाख की राशि अटकी, अब SP-DGP दफ्तर पर कार्रवाई
- बीमा खत्म बस से हादसा, परिवारों को नहीं मिली राहत
- दो मौतों के मामले में कोर्ट ने कुर्की के दिए निर्देश
छत्तीसगढ़ के कोरबा में दो युवकों की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं होने पर कोरबा एसपी और छत्तीसगढ़ डीजीपी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश दिए हैं। मामला साल 2023 में VVIP बंदोबस्त के दौरान हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा है।
पुलिस मिनी बस ने बाइक को मारी थी टक्कर
यह हादसा 27 सितंबर 2023 को रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में हुआ था। पिपरिया-पारपोड़ी मुख्य मार्ग पर शाम करीब 6:30 बजे पुलिस विभाग की मिनी बस और बाइक की टक्कर हुई थी। हादसे में बाइक चला रहे बैजनाथ कंवर की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं उनके साथी रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
बताया गया कि पुलिस की मिनी बस VVIP ड्यूटी के लिए तैनात थी। दुर्घटना के समय बस का बीमा भी खत्म हो चुका था। आरोप है कि बस चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक को टक्कर मारी थी।
मृतकों के परिवारों ने मांगा था मुआवजा
हादसे के बाद दोनों मृतकों के परिवारों ने आर्थिक सहायता के लिए कोरबा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में आवेदन लगाया था। बैजनाथ कंवर के मामले में उनकी पत्नी, माता-पिता और दो नाबालिग बच्चों ने दावा किया था। वहीं रवि यादव के परिवार की ओर से उनकी पत्नी और दो बच्चों ने मुआवजे की मांग की थी।
दोनों युवक जांजगीर-चांपा जिले के एक ही गांव हेडसपुर के रहने वाले थे। मामले की सुनवाई के बाद अधिकरण ने 14 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने तय की 43.14 लाख रुपये की राशि
अधिकरण ने बैजनाथ कंवर के परिवार को 26 लाख 9 हजार 200 रुपए देने का आदेश दिया। वहीं रवि यादव के परिवार के लिए 17 लाख 5 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति तय की गई। दोनों मामलों में कुल राशि 43 लाख 14 हजार 200 रुपए बनी। इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कोर्ट ने दुर्घटना के लिए पुलिस बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। वाहन डीजीपी छत्तीसगढ़ के नाम दर्ज था और उसका बीमा भी वैध नहीं था। इसी कारण एसपी और डीजीपी कार्यालय को भी मामले में पक्षकार बनाया गया।
पांच महीने बाद भी नहीं हुआ भुगतान
अधिकरण ने मुआवजा राशि जमा करने के लिए एक महीने का समय दिया था। लेकिन आदेश के बाद पांच महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी परिवारों को रकम नहीं मिल सकी। इसके बाद कोर्ट में राशि वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की गई। अब इसी प्रक्रिया के तहत कोरबा एसपी कार्यालय और छत्तीसगढ़ डीजीपी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया गया है।
आय के आधार पर की गई थी मुआवजे की गणना
मृतकों की आय से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिलने पर श्रम आयुक्त कार्यालय के तय मानकों को आधार बनाया गया। दोनों की मासिक आय 11 हजार रुपए मानकर मुआवजे की गणना की गई। उम्र, भविष्य की आय और परिवार पर आर्थिक असर को ध्यान में रखते हुए राशि तय हुई। कोर्ट ने नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। बच्चों को यह रकम बालिग होने के बाद मिलेगी।
FAQ
- कोर्ट ने SP और DGP कार्यालय की कुर्की का आदेश क्यों दिया?
मुआवजा राशि का भुगतान तय समय में नहीं होने के कारण कोर्ट ने यह आदेश दिया है। - हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
VVIP बंदोबस्त के दौरान हुई दुर्घटना में दो युवकों बैजनाथ कंवर और रवि यादव की मौत हुई थी। - मृतकों के परिवार को कितनी मुआवजा राशि मिलनी है?
कोर्ट ने दोनों परिवारों के लिए कुल 43 लाख 14 हजार 200 रुपए की क्षतिपूर्ति तय की है।
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