विवादों के बीच लक्ष्मी राजवाड़े ने हटाया खास स्टाफ, शिकायतों के बाद मंत्री को लेना पड़ा फैसला
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आखिरकार अपनी विशेष सहायक रूही टेम्भुरकर की छुट्टी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर उन्हें मूल विभाग में वापस भेज दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब मंत्री कार्यालय लगातार विवादों में घिरा हुआ था। बताया जाता है साड़ी घोटाले को लेकर भी मंत्री इनसे नाराज थीं। कार्यकर्ताओं की शिकायत ने मंत्री की नाराजगी को और बढ़ा दिया।
ढाई साल तक मंत्री के साथ रहीं
रूही टेम्भुरकर पिछले करीब ढाई वर्षों से मंत्री स्टाफ में विशेष सहायक के रूप में थीं। वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उपायुक्त पद पर पदस्थ हैं। प्रतिनियुक्ति पर उन्हें मंत्री कार्यालय में पदस्थ किया गया था। अब शासन ने उनकी सेवाएं समाप्त करते हुए मूल विभाग में वापसी के आदेश जारी कर दिए हैं।
कार्यकर्ताओं में था भारी असंतोष
सूत्रों के मुताबिक मंत्री से जुड़े कई कार्यकर्ता रूही टेम्भुरकर के व्यवहार से नाराज थे। संगठन स्तर पर कई बार शिकायतें भी हुईं। आरोप था कि मंत्री कार्यालय में कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही थी। कई नेता और कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इसके बावजूद लंबे समय तक शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता रहा।
दरबार चलाने के आरोप
राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि मंत्री कार्यालय में पहुंच आसान नहीं थी। कई कार्यकर्ताओं का आरोप था कि विशेष सहायक के जरिए ही मंत्री तक पहुंच बनती थी। इससे संगठन और कार्यकर्ताओं में नाराजगी लगातार बढ़ती गई। भाजपा के भीतर भी इसको लेकर असहजता थी।
साड़ी घोटाले के बाद बढ़ा दबाव
प्रदेश में चर्चित साड़ी वितरण विवाद के दौरान भी मंत्री कार्यालय सवालों में आया था। राजनीतिक हलकों में माना गया कि मंत्री की छवि खराब होने के पीछे स्टाफ प्रबंधन बड़ी वजह बना। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। इसके बाद से मंत्री कार्यालय में बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी।
सूरजपुर कनेक्शन की चर्चा
बताया जाता है कि रूही टेम्भुरकर की नियुक्ति में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं की भूमिका थी। खासतौर पर सूरजपुर भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं के समर्थन के बाद उन्हें मंत्री स्टाफ में जगह मिली थी। यही कारण था कि लंबे समय तक विवादों के बावजूद उनकी पकड़ बनी रही।
आदेश जारी, अब मूल विभाग वापसी
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि रूही टेम्भुरकर को मंत्री की निजी स्थापना से कार्यमुक्त किया जाता है। उन्हें तत्काल प्रभाव से मूल विभाग में वापस भेजा गया है। आदेश 22 मई 2026 को जारी हुआ।
देरी से लिया गया फैसला
विशेष सहायक के हटाए जाने के बाद मंत्री कार्यकर्ता इसे देरी से लिया गया सही फैसला बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री अब अपनी टीम में बड़े बदलाव कर सकती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ ओएसडी हटाने से विभाग में हो रहे लगातार भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल जाएगी? क्या मंत्री स्टाफ की कार्यप्रणाली पर नई गाइडलाइन बनाएगी? फिलहाल सत्ता के गलियारों में इसकी चर्चा है।
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