छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : अकाउंटेंट के खातों से हुआ 26 करोड़ का लेन-देन
NEWS IN SHORT
- ईडी ने अदालत में छठी पूरक चार्जशीट पेश की।
- भिलाई के व्यवसायी और अकाउंटेंट नए आरोपी बने।
- अकाउंटेंट को मोहरा बनाकर डमी डायरेक्टर बनाया गया।
- अकाउंटेंट के खातों से 26 करोड़ का लेन-देन हुआ।
- नई फर्म बनाकर 40 करोड़ का कमीशन वसूला गया।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में चर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में विशेष अदालत में छठी पूरक चार्जशीट (परिवाद) पेश की गई है, जिसमें भिलाई के दो नए आरोपियों को नामजद किया गया है। इन आरोपियों में एक व्यवसायी और उसका अकाउंटेंट शामिल है। हालांकि, फिलहाल उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अकाउंटेंट का मोहरे की तरह इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी व्यवसायी ने अपने अकाउंटेंट का इस्तेमाल केवल कागजी खानापूर्ति के लिए किया था। यह अकाउंटेंट पिछले 15 वर्षों से उक्त व्यवसायी के पास काम कर रहा था। शराब कारोबार से अवैध मुनाफा कमाने के लिए व्यवसायी ने अपने अकाउंटेंट को 'ओम साईं ब्रेवरेज' नामक कंपनी का 'डमी डायरेक्टर' बना दिया, जबकि कंपनी का वास्तविक संचालन और नियंत्रण पूरी तरह से उसी व्यवसायी के हाथों में था।
शुरुआत में इस अकाउंटेंट को हर महीने 1 लाख रुपए वेतन देने की बात कही गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया। लेकिन जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह वेतन भी अंततः घूम-फिरकर वापस उसी व्यवसायी के पास पहुंच जाता था। इतना ही नहीं, अकाउंटेंट के बैंक खातों का इस्तेमाल करके 26 करोड़ रुपए की बड़ी राशि का लेनदेन व्यवसायी तक पहुंचाया गया।
एक अन्य मामले में, व्यवसायी के स्वामित्व वाली चार अन्य फर्मों से अकाउंटेंट के खाते में 1 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए, जो अंततः फिर से मुख्य व्यवसायी के पास ही पहुंचे। चार वर्षों के अंतराल में अकाउंटेंट के नाम पर करीब 97 लाख रुपए का वेतन दिखाया गया, जिसका लाभ भी अप्रत्यक्ष रूप से व्यवसायी को ही मिला।
40 करोड़ का कमीशन तंत्र
इस घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, विशेष रूप से 'एफएल-10' लाइसेंस प्राप्त कंपनियों से 20 से 25 प्रतिशत तक का भारी कमीशन वसूला गया। इस कमीशनखोरी को अंजाम देने के लिए 'ब्रेवस्की ब्रेवरेज' नामक एक नई फर्म बनाई गई, जिसमें एक अन्य व्यक्ति को डायरेक्टर नियुक्त किया गया।
इस पूरे तंत्र के माध्यम से लगभग 40 करोड़ रुपए की अवैध कमीशन राशि अर्जित की गई। इस राशि का बंदरबांट भी पूरी योजना के साथ हुआ। इसमें से 4 करोड़ रुपये आरोपी ने अपने पिता के खाते में ट्रांसफर किए, जबकि बाकी की भारी-भरकम राशि अन्य व्यक्तियों, उनकी पत्नियों और सहयोगियों के खातों में भेजी गई। जांच में यह भी पाया गया कि यह अवैध धन भिलाई के एक प्रमुख व्यवसायी के निर्देश पर मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में निवेश किया गया था।
जांच एजेंसियों ने कंपनी के दस्तावेजों में शेयर होल्डिंग का जो ढांचा पाया, वह भी फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है, जहां असली लाभार्थियों को छिपाने के लिए डमी संचालकों को आगे रखा गया था।
निष्कर्ष
3200 करोड़ रुपए के छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में ईडी की छठी पूरक चार्जशीट से साफ है कि यह एक बेहद सुनियोजित आर्थिक अपराध था। डमी डायरेक्टर्स, फर्जी वेतन और शेल कंपनियों के जरिए असली लाभार्थियों को छुपाया गया। जांच एजेंसियों द्वारा ऐसे छिपे हुए चेहरों और मनी ट्रेल को उजागर करना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी सफलता है।
FAQ
- 3200 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला मुख्य रूप से किस भारतीय राज्य से संबंधित है?
उत्तर: यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित है, जहाँ आबकारी विभाग और निजी सिंडिकेट के गठजोड़ से करोड़ों रुपये के राजस्व के नुकसान और अवैध कमाई का आरोप है। - शराब घोटाले की वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कौन सी केंद्रीय एजेंसी कर रही है?
उत्तर: इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED - Enforcement Directorate) द्वारा की जा रही है, जो देश में वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने का काम करती है। - शराब सिंडिकेट द्वारा भारी-भरकम अवैध कमीशन वसूलने के उद्देश्य से किस विशेष नई फर्म या कंपनी का गठन किया गया था?
उत्तर: अवैध उगाही और कमीशनखोरी को कानूनी रूप देने या छिपाने के लिए 'ब्रेवस्की ब्रेवरेज' (Brewsky Beverages) नामक एक नई फर्म का गठन किया गया था, जिसमें एक अन्य व्यक्ति को नाममात्र का डायरेक्टर बनाया गया था।
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