CG शराब घोटाला : ED ने कुर्क की 1000 करोड़ की संपत्ति, गोवा का लग्जरी होटल भी जब्त

Umeshwari Baghel | Jun 01, 2026, 21:39 IST
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED ने 1,000 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कुर्क की। गोवा का वेस्टिन होटल भी शामिल है। सिंडिकेट ने करीब 2,883 करोड़ की अवैध कमाई की। कुल 85 लोग आरोपी है, जांच अभी चल रही है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ED ने 1,000 करोड़ की संपत्ति कुर्क की
  • गोवा का वेस्टिन होटल भी शामिल, ED की बड़ी कार्रवाई
  • 2,883 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा, सिंडिकेट पर शिकंजा
  • नए आरोपियों के नाम जुड़े, कुल 85 आरोपी हुए शामिल
  • पूर्व मुख्यमंत्री और अधिकारी जांच के घेरे में

NEWS IN DETAIL

Raipur : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर जोनल कार्यालय ने 28 मई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत लगभग 1,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर दी हैं। इस कार्रवाई में गोवा के अंजुना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध वेस्टिन होटल भी शामिल है। ED ने यह कार्रवाई रायपुर EOW/ACB की FIR और जांच के आधार पर की है।

सिंडिकेट की अवैध कमाई का खुलासा

ED की जांच में यह सामने आया कि 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी प्रणाली में भारी हेरफेर हुआ। इस दौरान एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था, जिसमें अनवर ढेबर, सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे।

जांच के अनुसार, शराब डिस्टिलरी मालिकों और निजी संस्थाओं ने इस सिंडिकेट के दबाव में काम किया और लगभग 2,883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई की। कंपनियों को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देना पड़ता था। यह खुलासा ED की रिपोर्ट में एक प्रमुख तथ्य के रूप में सामने आया है।

गोवा के वेस्टिन होटल की कुर्की

कुर्क की गई संपत्तियों में सबसे बड़ा नाम है गोवा का लग्जरी होटल वेस्टिन गोवा। यह होटल पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है, जिसमें निदेशक राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं।

ED का दावा है कि होटल की खरीद में लगभग 110 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जो शराब घोटाले से प्राप्त अवैध धन से चुकाए गए थे। कुर्की की गई संपत्तियों में बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं।

नए आरोपियों के नाम और कार्रवाई

इस घोटाले में ED की तीसरी बड़ी कार्रवाई में तीन कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड जब्त किए गए। एजेंसी ने विशेष अदालत में छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की और चार नए आरोपियों को जोड़ा। नए आरोपियों में विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर शामिल हैं।

इसके बाद कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई। जांच में यह भी पता चला कि कंपनियों को अपने मुनाफे का हिस्सा सिंडिकेट को देना पड़ता था, जिससे सिंडिकेट की कमाई और मजबूत हुई।

जांच के घेरे में प्रमुख अधिकारी

इस कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच ED और राज्य की EOW/ACB कर रही है। कई रसूखदार और वरिष्ठ अधिकारी मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया, सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर

(रायपुर के मेयर के भाई), सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी आयुक्त और कई शराब कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल का नाम भी जांच में सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा घोटाला 2,000 करोड़ से 3,200 करोड़ के बीच अनुमानित है।

PMLA के तहत कार्रवाई और कुर्की आदेश

ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश (PAO) जारी किए। कुर्क की गई संपत्तियों में अचल और चल संपत्ति दोनों शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त संदेश देती है। कुर्की का मकसद घोटाले से प्राप्त अवैध संपत्ति को रोकना और जांच को प्रभावी बनाना है।

सिंडिकेट और कंपनियों के संबंध

जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट ने शराब कंपनियों को अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा देने के लिए मजबूर किया। कंपनियों को अपने लाभ का 50 से 60 प्रतिशत तक हिस्सा सिंडिकेट को देना पड़ता था। ED ने खुलासा किया कि यह दबाव पूरे सिस्टम में लंबे समय तक चला, जिससे सिंडिकेट ने बड़ी कमाई की और भ्रष्टाचार का जाल और मजबूत हुआ।

प्रभावित उद्योग और सरकारी पदाधिकारी

इस मामले में आबकारी विभाग, शराब डिस्टिलरी मालिक और निजी संस्थाएं सीधे प्रभावित हुई हैं। ED की जांच में यह भी सामने आया कि पूर्व आबकारी आयुक्त और अन्य अधिकारियों ने भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर ने सिस्टम का लाभ उठाकर अवैध कमाई की योजना बनाई और अपने संपर्कों के माध्यम से घोटाले को संचालित किया।

भविष्य की कार्रवाई

ED ने कहा है कि जांच अभी जारी है और भविष्य में और भी कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी का उद्देश्य घोटाले से प्राप्त संपत्ति को पूरी तरह से रोकना और जिम्मेदार अधिकारियों और निजी संस्थाओं को कानून के दायरे में लाना है। कुर्की और चार्जशीट प्रक्रिया इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

टाइमलाइन

2019 – छत्तीसगढ़ की आबकारी प्रणाली में गड़बड़ी शुरू। सिंडिकेट सक्रिय हुआ।

2019–2023 – शराब डिस्टिलरी मालिक और निजी संस्थाओं ने सिंडिकेट को अपने मुनाफे का 50–60% हिस्सा दिया। सिंडिकेट ने 2,883 करोड़ की अवैध कमाई की।

28 मई 2026 – ED ने PMLA के तहत 1,000 करोड़ से अधिक संपत्तियां कुर्क की। इसमें गोवा का वेस्टिन होटल, बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

मई 2026 – ED ने तीन अस्थायी कुर्की आदेश (PAO) जारी किए और विशेष अदालत में छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की।

मई 2026 – चार नए आरोपियों के नाम जोड़े गए, विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर। कुल आरोपी संख्या बढ़कर 85 हो गई।

मई 2026 – अब ED और EOW/ACB जांच जारी हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य जांच के घेरे में हैं।



FAQ

  1. ED ने कौन-कौन सी संपत्ति कुर्क की?
    कुल 1,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई, जिसमें गोवा का वेस्टिन होटल, बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
  2. घोटाले में कुल अवैध कमाई कितनी हुई?
    जांच में पाया गया कि सिंडिकेट ने 2019-2023 के बीच लगभग 2,883 करोड़ की अवैध कमाई की।
  3. इस घोटाले के मुख्य आरोपी कौन हैं?
    मुख्य आरोपी हैं अनवर ढेबर (सिंडिकेट मास्टरमाइंड), सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा, कई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया।

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