इंग्लिश के पेपर में हिंदी लिखने वाले 248 छात्र पास, छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी का अनोखा फैसला
NEWS IN SHORT
- हेमचंद यादव विवि: अंग्रेजी पेपर में हिंदी लिखने वाले 248 विद्यार्थी पास
- एलएलबी रिजल्ट में संशोधन, पास प्रतिशत बढ़कर 59.47%
- कॉलेज फैकल्टी ने छात्रों को हिंदी में उत्तर देने की सलाह दी
- भविष्य में विश्वविद्यालय देगा स्पष्ट निर्देश, केवल अंग्रेजी में उत्तर मान्य
- शिक्षा व्यवस्था और फैकल्टी की योग्यता पर उठे सवाल
NEWS IN DETAIL
Bhilai: भिलाई हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने एलएलबी प्रथम सेमेस्टर की लीगल इंग्लिश लैंग्वेज एंड राइटिंग परीक्षा के परिणाम में बड़ा बदलाव किया। विश्वविद्यालय ने उन 248 विद्यार्थियों को भी पास कर दिया, जिन्होंने पेपर में उत्तर हिंदी में लिखे थे। संशोधित परिणाम के बाद कुल पास प्रतिशत 59.47% पहुंच गया, जबकि पहले यह केवल 24% था।
फैकल्टी की सलाह और परिणाम का विश्लेषण
जांच के दौरान विश्वविद्यालय ने संबंधित कॉलेजों से इंटरनल एग्जाम की कॉपियां मंगवाई। इनमें अधिकांश विद्यार्थियों के उत्तर हिंदी में लिखे पाए गए। जांच से स्पष्ट हुआ कि कॉलेज फैकल्टी ने विद्यार्थियों को हिंदी में उत्तर लिखने की सलाह दी थी।
(एलएलबी छात्र ) विश्वविद्यालय ने केवल उन छात्रों को पास किया, जिनके उत्तर सही और प्रश्नों के अनुरूप थे। संशोधित परिणाम के अनुसार अब भी 60 विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हैं, जबकि 102 विद्यार्थियों को संबंधित विषय में एटीकेटी (Allowed To Keep Term) दिया गया।
विश्वविद्यालय की भविष्य की तैयारी
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने कहा कि यह राहत केवल इस बार के लिए दी गई है। आगामी सत्र से परीक्षा से पहले कॉलेजों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
प्रश्नपत्र में अब स्पष्ट उल्लेख रहेगा कि उत्तर केवल अंग्रेजी में लिखे जाने चाहिए। इसके अलावा विश्वविद्यालय सभी एलएलबी कॉलेजों की फैकल्टी का सत्यापन भी करेगा, ताकि जांच हो सके कि नियुक्तियां नियमों के अनुसार हुई हैं या नहीं। कॉलेजों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।
परीक्षा का विवरण और विवाद
एलएलबी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 27 जनवरी 2026 को आयोजित हुई थी। इसमें लगभग 417 परीक्षार्थी शामिल हुए। हालांकि उत्तर अंग्रेजी में देना अनिवार्य था, बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिंदी में उत्तर लिखे। कई छात्रों ने उत्तर का मिश्रण भी किया कुछ अंग्रेजी में और कुछ हिंदी में।
विद्यार्थियों ने इस असमंजस के लिए कॉलेज फैकल्टी को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि उन्हें पहले से साफ जानकारी नहीं दी गई थी कि उत्तर केवल अंग्रेजी में ही मान्य होंगे।
कुलपति की प्रतिक्रिया
कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि परीक्षा समिति ने इस मामले में निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल इस बार लागू की गई।
डॉ. तिवारी ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय आगामी सत्र से सभी प्रश्नपत्रों में स्पष्ट निर्देश देगा और उत्तर अंग्रेजी में ही मान्य होंगे। इसका उद्देश्य शिक्षा स्तर बनाए रखना और भविष्य में किसी भ्रम की स्थिति को रोकना है।
निष्कर्ष
यूनिवर्सिटी ने साफ़ कहा कि जिन छात्रों ने सही जवाब लिखे हैं, उनके साथ नाइंसाफ़ी नहीं होगी, चाहे उन्होंने किसी भी भाषा में लिखा हो। यूनिवर्सिटी का यह कदम शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और कॉलेजों के साथ-साथ वहां के प्रोफेसरों पर नज़र रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।
FAQ
- कितने विद्यार्थियों को हिंदी में उत्तर लिखने पर पास किया गया?
248 विद्यार्थियों को पास किया गया। - पहले कितने विद्यार्थी पास हुए थे?
पहले केवल 101 विद्यार्थी पास थे। - विश्वविद्यालय ने यह निर्णय क्यों लिया?
कॉलेज फैकल्टी ने हिंदी में उत्तर लिखने की सलाह दी थी और उत्तर सही पाए गए थे। - भविष्य में परीक्षा में क्या बदलाव होंगे?
आगामी सत्र में प्रश्नपत्र में स्पष्ट लिखा जाएगा कि उत्तर केवल अंग्रेजी में ही देने होंगे। - कितने विद्यार्थी अभी भी अनुत्तीर्ण हैं?
60 विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हैं और 102 को एटीकेटी दिया गया है।
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