महादेव बेटिंग ऐप घोटाला: 10 दिन रिमांड की में विकास गर्ग, करोड़ों की संपत्ति ज़ब्त

Aishwarya Dwivedi | Jul 17, 2026, 20:01 IST
महादेव ऐप केस: विकास गर्ग को रिमांड पर भेजा गया
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एबिक्सकैश के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की रिमांड पर भेजा है।

समझें क्या है पूरा मामला

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोपी विकास गर्ग को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। रायपुर की विशेष अदालत ने आरोपी को 10 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है। जांच एजेंसी इस मामले में अब तक चार हजार करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है। सट्टेबाजी के इस काले कारोबार से हर महीने 450 करोड़ रुपए कमाए जाते थे।



विकास गर्ग की गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल ऑफिस ने यह बड़ी सफलता हासिल की है। जांच एजेंसी ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज मामले में कार्रवाई की है। ईडी ने इस मामले के प्रमुख आरोपियों में से एक विकास गर्ग को पकड़ा है। विकास गर्ग एबिक्सकैश (EbixCash) कंपनी के चेयरमैन हैं। उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA - Prevention of Money Laundering Act), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है।



विकास गर्ग की गिरफ्तारी 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में की गई थी। इसके बाद उन्हें नई दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया गया। ईडी ने कोर्ट से आरोपी की ट्रांजिट रिमांड मांगी थी। अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी को ट्रांजिट रिमांड दे दी थी।



रायपुर कोर्ट में हुए पेश

ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद ईडी विकास गर्ग को लेकर रायपुर पहुंची। उन्हें 15 जुलाई 2026 को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। ईडी के वकीलों ने कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने आरोपी से पूछताछ के लिए कस्टडी की मांग की।



रायपुर की विशेष अदालत ने ईडी की दलीलों को स्वीकार कर लिया। अदालत ने विकास गर्ग को 24 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। आरोपी अब कुल 10 दिनों तक ईडी की कस्टडी में रहेगा। इस दौरान जांच एजेंसी उनसे सट्टेबाजी रैकेट के वित्तीय लेन-देन पर पूछताछ करेगी। पूछताछ में कई बड़े चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।



कैसे हुआ मामले का खुलासा

इस पूरे घोटाले की शुरुआत छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्रवाई से हुई थी। छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने इस मामले में पहली एफआईआर (FIR - First Information Report) दर्ज की थी। इसके बाद आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी केस दर्ज किए। इन सभी एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की थी।



इन मामलों में सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों पर गंभीर आरोप हैं। प्रमोटरों और उनके सहयोगियों पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे हैं। इसके साथ ही धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं भी लगाई गई हैं। ईडी ने इन मामलों को जोड़कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।



महादेव ऐप घोटाला


हर महीने करोड़ों की कमाई

ईडी की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह पूरा सट्टेबाजी सिंडिकेट विदेशों से चलाया जा रहा था। यह नेटवर्क फ्रैंचाइज़ी आधारित पैनल सिस्टम पर काम करता था। इस अवैध धंधे से हर महीने भारी-भरकम कमाई की जाती थी।



जांच एजेंसी के अनुसार इस नेटवर्क से हर महीने 450 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए जाते थे। यह पूरी कमाई अवैध तरीके से हासिल की जाती थी। इस काली कमाई को अपराध की आय माना गया है। इस पैसे को छिपाने के लिए एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया था।



शेल कंपनियों का जाल

सट्टेबाजी से हुई अवैध कमाई को वैध बनाने के लिए कई तरीके अपनाए गए। इसके लिए शेल कंपनियों का एक बड़ा जाल तैयार किया गया था। इन फर्जी कंपनियों के जरिए कैश के बदले अकोमोडेशन एंट्री दी जाती थी। इसके बाद पैसे को विदेशों में भेजा जाता था।



यह पैसा दुबई, मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। वहां मौजूद विदेशी कंपनियों के जरिए इस पैसे को भारत वापस लाया गया। इसके लिए क्यूआईपी (QIP - Qualified Institutional Placement) रूट का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा एफपीआई (FPI - Foreign Portfolio Investment) और एफडीआई (FDI - Foreign Direct Investment) का भी सहारा लिया गया। एफसीसीबी (FCCB - Foreign Currency Convertible Bond) के जरिए भी निवेश किया गया।



विदेशी कंपनियों में निवेश

काले धन को सफेद करने के लिए विकास गर्ग की कंपनियों का इस्तेमाल हुआ। विकास गर्ग के नियंत्रण वाली लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों में पैसा लगाया गया। इस पैसे को कई स्तरों पर घुमाया गया था। इसका मकसद अवैध पैसे को पूरी तरह वैध दिखाना था।



इस पैसे का इस्तेमाल विदेशी संपत्तियां खरीदने में भी किया गया। यूनाइटेड स्टेट्स बैंकरप्सी कोर्ट के जरिए अमेरिका की कंपनी एबिक्स इंक (EBIX Inc.) में हिस्सेदारी खरीदी गई। विकास गर्ग की कंपनी ने इसमें 97.58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके अलावा भारत और विदेशों में भारी मात्रा में शेयर और सिक्योरिटीज़ खरीदे गए।



संपत्तियों की कुर्की

ईडी इस मामले में लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इससे पहले 5 जून 2026 को एक प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था। इसके तहत विकास गर्ग और उनके परिवार की संपत्तियां ज़ब्त की गई थीं। उनके नियंत्रण वाली कंपनियों की संपत्तियों को भी कुर्क किया गया था।



उस समय ज़ब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत 940.77 करोड़ रुपये थी। इनमें कई आलीशान रिहायशी संपत्तियां और कीमती ज़मीनें शामिल थीं। इसके अलावा भारी मात्रा में इक्विटी शेयर भी ज़ब्त किए गए थे। आरोपी जांच के दौरान भी पैसों को इधर-उधर करने की कोशिश कर रहा था।



अब तक की कुल कार्रवाई

महादेव बेटिंग ऐप घोटालाबुक के खिलाफ यह देश का सबसे बड़ा अभियान बन चुका है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब तक सात प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर चुकी है। रायपुर की विशेष अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की जा चुकी है। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर अपराध का संज्ञान लिया है। इस पूरे मामले में अब तक कुल 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज या अटैच की जा चुकी है। इसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। ईडी अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।



FAQ

  1. विकास गर्ग को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
    उत्तर: विकास गर्ग को महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर अवैध सट्टेबाजी की कमाई को अपनी कंपनियों के जरिए वैध बनाने का आरोप है।
  2. विकास गर्ग को कितने दिनों की रिमांड पर भेजा गया है?
    उत्तर: रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने विकास गर्ग को 24 जुलाई 2026 तक कुल 10 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेजा है। इससे पहले उन्हें दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया था।
  3. महादेव सट्टा ऐप मामले में अब तक कितनी संपत्ति ज़ब्त हुई है?
    उत्तर: ईडी इस मामले में अब तक देश और विदेश में लगभग 4,000 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच, ज़ब्त या फ्रीज कर चुकी है। इसमें 940 करोड़ से अधिक की संपत्ति हाल ही में कुर्क की गई थी।

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