मैनपावर सप्लाई घोटाला : हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत अर्जी ठुकराई

Aishwarya Dwivedi | May 15, 2026, 11:53 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मैनपावर घोटाले में अनवर ढेबर की जमानत नामंजूर की। कोर्ट ने इसे अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने वाली सुनियोजित साजिश करार देते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज की।
  • आर्थिक अपराध को समाज के विरुद्ध बड़ी साजिश बताया।
  • CSMCL में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप।
  • राजनीतिक प्रभाव से सरकारी कामकाज में दखल की पुष्टि।
  • 28 लाख 80 हजार की रिश्वत और अवैध वसूली के सबूत।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मैनपावर सप्लाई घोटाले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ढेबर की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि आर्थिक अपराध कोई सामान्य अपराध नहीं होते, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था और समाज के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश होते हैं।



क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में मैनपावर सप्लाई और कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के अनुसार, यह घोटाला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग का एक बड़ा नेटवर्क था।



जांच में यह पाया गया कि निजी एजेंसियों द्वारा सप्लाई किए गए मैनपावर के बिलों को तब तक पास नहीं किया जाता था, जब तक कि संबंधित एजेंसी तयशुदा कमीशन नहीं देती थी। चौंकाने वाली बात यह है कि अनवर ढेबर के हस्तक्षेप के बाद इस कमीशन की राशि को बढ़ाकर बिल को एक-तिहाई (33% से अधिक) तक कर दिया गया था।



सरकारी खजाने की लूट बर्दाश्त नहीं

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला जनता के पैसे और सरकारी खजाने की लूट से जुड़ा हो, तो न्यायपालिका को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।



अदालत के फैसले की मुख्य बातें

प्रभावशाली होना राहत का आधार नहीं : कोर्ट ने कहा कि महज इसलिए राहत नहीं दी जा सकती कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है या उसके पास से सीधे नकद बरामदगी नहीं हुई है।



सुनियोजित साजिश : कोर्ट ने ढेबर को इस पूरे खेल का मुख्य साजिशकर्ता और सबसे बड़ा लाभार्थी (Beneficiary) करार दिया।



जनता का विश्वास : आर्थिक घोटालों से न केवल वित्तीय ढांचा चरमराता है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर से आम आदमी का भरोसा भी उठता है।



जांच और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब 29 नवंबर 2023 को ED ने एक ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान 'ईगल हंटर सॉल्यूशंस' नामक एजेंसी के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इस कार्रवाई में मिले डिजिटल साक्ष्यों और बयानों के आधार पर ACB ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। लंबी जांच के बाद, 23 फरवरी 2026 को अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया था।



बचाव पक्ष के तर्क

अनवर ढेबर की ओर से पेश वकीलों ने इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" का मामला बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यह "कस्टडी की एवरग्रीनिंग" है, यानी एक ही मामले में बार-बार अलग-अलग FIR दर्ज की जा रही हैं ताकि आरोपी को जेल में ही रखा जा सके। हालांकि, राज्य सरकार ने इन तर्कों का कड़ा विरोध करते हुए पर्याप्त सबूतों का हवाला दिया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। कोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार जैसे मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। फिलहाल, अनवर ढेबर को जेल में ही रहना होगा।



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