छत्तीसगढ़ संग्रहालय में बड़ी लापरवाही, दीमकों ने नष्ट किए मुख्य रिकॉर्ड
NEWS IN SHORT
- संग्रहालय के छह में से पांच महत्वपूर्ण एक्सेशन रजिस्टर नष्ट हुए।
- दो मिलियन डॉलर की अवलोकितेश्वर कांस्य प्रतिमा वापसी पर बड़ा संकट।
- पिछले चार वर्षों से पुरावशेषों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ।
- गंभीर लापरवाही पर संयुक्त संचालक जेआर भगत को नोटिस जारी।
- रिकॉर्ड नष्ट होने के पीछे सोची-समझी साजिश की बड़ी आशंका।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े गुरु घासीदास केंद्रीय संग्रहालय से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने दुर्लभ दस्तावेजों और बेशकीमती पुरावशेषों का लेखा-जोखा रखने वाले एक्सेशन रजिस्टरों को दीमकों ने चाट लिया है। इस बड़ी लापरवाही के उजागर होने के बाद से पूरे संस्कृति और पुरातत्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
तस्करी की जांच के दौरान हुआ खुलासा
इस महालापरवाही का खुलासा उस वक्त हुआ, जब अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच के दौरान संग्रहालय से तीन दशक पहले चोरी हुई भगवान 'अवलोकितेश्वर' की ऐतिहासिक कांस्य प्रतिमा को वापस लाने की कवायद शुरू हुई। जब इस प्रतिमा से जुड़े रिकॉर्ड्स खोजने के लिए संग्रहालय के अभिलेखागार को खंगाला गया, तो पता चला कि कुल छह में से पांच एक्सेशन रजिस्टर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इन्हीं रजिस्टरों में संग्रहालय में मौजूद सभी पुरातत्व अवशेषों और कलाकृतियों का मुख्य विवरण दर्ज था।
2 मिलियन डॉलर की प्रतिमा पर संकट
हाल ही में अमेरिका में एक अंतरराष्ट्रीय कला तस्करी रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद इस बहुमूल्य अवलोकितेश्वर प्रतिमा को बरामद किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत लगभग 2 मिलियन डॉलर (करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक) बताई जा रही है। अब भारत सरकार द्वारा इस प्रतिमा को वापस छत्तीसगढ़ लाने की कानूनी प्रक्रिया को इस घटना से बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि मालिकाना हक साबित करने वाले मुख्य दस्तावेज ही गायब हो चुके हैं।
जानबूझकर साजिश की आशंका
इस मामले में विभाग की बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई है। नियमों के मुताबिक संग्रहालयों में पुरावशेषों का नियमित भौतिक सत्यापन (Physical Verification) होना अनिवार्य है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पिछले चार वर्षों से यहां ऐसा कोई सत्यापन नहीं किया गया।
बड़ी आशंका: एक्सेशन रजिस्टरों के नष्ट होने से न सिर्फ अवलोकितेश्वर प्रतिमा, बल्कि अतीत में चोरी हुईं कई अन्य मूर्तियों और पुरावशेषों का रिकॉर्ड भी हमेशा के लिए खत्म हो गया है। जानकारों और गलियारों में चर्चा है कि यह दीमकों का हमला नहीं, बल्कि पिछली चोरियों और गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए रजिस्टरों को जानबूझकर नष्ट करने की एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है।
संयुक्त संचालक को नोटिस, शासन सख्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से तत्काल जवाब तलब किया है। वहीं, इस पूरे मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही मानते हुए संग्रहालय के संयुक्त संचालक जे.आर. भगत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संग्रहालय में दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए तापमान नियंत्रण (Temperature Control), नियमित फ्यूमिगेशन (कीटनाशक धूमन) और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का पालन करना जरूरी होता है, जिसका यहाँ पूरी तरह अभाव दिखा। फिलहाल इस मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
निष्कर्ष
गुरु घासीदास संग्रहालय की यह घटना सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में प्रशासनिक उदासीनता और सुरक्षा खामियों को उजागर करती है। ऐतिहासिक दस्तावेजों का नष्ट होना और चार साल तक भौतिक सत्यापन न होना गंभीर प्रणालीगत विफलता है। इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि अपराधियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
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