छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव : चार नगर निगम, किसकी बनेगी सरकार, दांव पर दिग्गजों की साख
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख नगर निगमों में दिसंबर में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रायपुर जिले के बिरगांव और दुर्ग जिले के भिलाई, रिसाली तथा भिलाई-चरौदा नगर निगम में चुनाव होने हैं। वर्तमान में चारों नगर निगमों में कांग्रेस के महापौर हैं। प्रदेश में अब भाजपा की सरकार होने के कारण इन चुनावों को सत्तारूढ़ दल के लिए प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर संबंधित जिलों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकट के दावेदार खुलकर सामने आएंगे। स्थानीय नेताओं ने अभी से संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है।
2021 में कांग्रेस ने चारों निगमों में बनाई थी सरकार
साल 2021 में हुए नगरीय निकाय चुनाव के समय छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। उस दौरान चारों नगर निगमों में कांग्रेस अपना महापौर बनाने में सफल रही थी। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है और राजनीतिक समीकरण भी बदल चुके हैं। ऐसे में भाजपा इन नगर निगमों में कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ने की तैयारी में है।
इस बार महापौर पद के लिए मतदाता सीधे मतदान करेंगे। पार्षद और महापौर के लिए अलग-अलग वोट डाले जाएंगे। इससे मुकाबला पिछली बार की तुलना में ज्यादा रोचक होने की संभावना है।
भिलाई में कांग्रेस के 37 पार्षद, भाजपा के 24
70 वार्ड वाले भिलाई नगर निगम में कांग्रेस के नीरज पाल महापौर हैं। यहां कांग्रेस के 37 और भाजपा के 24 पार्षद हैं। यह नगर निगम भिलाई नगर और वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में फैला है। भिलाई नगर से कांग्रेस के देवेंद्र यादव और वैशाली नगर से भाजपा के रिकेश सेन विधायक हैं। महापौर का पद इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित बताया गया है।
बिरगांव में कांग्रेस के पास 21 पार्षद
40 वार्ड वाले बिरगांव नगर निगम में नंदलाल देवांगन महापौर हैं। कांग्रेस के पास यहां 21 पार्षद हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 19 पार्षद जीते थे, जबकि बाद में दो निर्दलीय पार्षद पार्टी में शामिल हुए थे। इस बार महापौर पद अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने के बाद महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
रिसाली में ताम्रध्वज साहू की साख भी दांव पर
2019 में भिलाई से अलग होकर बने रिसाली नगर निगम में कांग्रेस की शशि सिन्हा महापौर हैं। यहां 40 में से 21 वार्डों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। रिसाली पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। वर्तमान में दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट से भाजपा के ललित चंद्राकर विधायक हैं। महापौर पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है।
चरौदा में भूपेश बघेल के कारण हाईप्रोफाइल मुकाबला
भिलाई-चरौदा नगर निगम का चुनाव भी बेहद अहम माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निवास इसी क्षेत्र में होने के कारण यहां के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। पिछले चुनाव में कांग्रेस 40 में से 19 वार्ड जीत सकी थी। बाद में दो निर्दलीय पार्षदों को साथ लेकर कांग्रेस ने बहुमत जुटाया और निर्मल कोसरे को महापौर बनाया।
चारों निगमों में कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और बदले राजनीतिक माहौल के सहारे नगर निगमों पर कब्जा करने की रणनीति बना रही है। ऐसे में दिसंबर के ये चुनाव दोनों दलों के लिए सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई बनने वाले हैं।
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