जड़ी-बूटी के बहाने नक्सलियों को सप्लाई, एमपी के पति-पत्नी को सजा
जड़ी-बूटी के सामान की आड़ में नक्सलियों तक विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश का मामला अब अदालत के फैसले तक पहुंच गया है। राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) की जांच में विशेष न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराया है।
कोर्ट ने 3 आरोपियों को विस्फोटक सामग्री रखने और प्रतिबंधित माओवादी गतिविधियों से जुड़े अपराधों में सजा सुनाई है। तीन आरोपियों में 2 पति-पत्नी हैं, जो मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। एसआईए अब मध्य प्रदेश के नेटवर्क को भी खंगाल रही है।
गठरियों में छिपा था विस्फोटक
मामला 19 मार्च 2024 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि तारागांव में कुछ लोग जड़ी-बूटी बेचने के बहाने सामान लेकर पहुंचे हैं। शक था कि गठरियों में नक्सलियों तक पहुंचाने के लिए विस्फोटक सामग्री छिपाई गई है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो मामला गंभीर निकला। उमरिया, मध्य प्रदेश के रवि मरकाम और छतरपुर, मध्य प्रदेश की चमेली बाई के कब्जे से चार डेटोनेटर, सात बोरी पोटेशियम नाइट्रेट और सात मीटर लाल कार्डेक्स वायर बरामद किया गया। दो मोबाइल भी जब्त किए गए।
बाजार से जंगल तक सप्लाई
जांच आगे बढ़ी तो कथित सप्लाई नेटवर्क की कड़ी सामने आने लगी। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर एसआईए ने नारायणपुर के कोसरू वड्डे की तलाश शुरू की। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक पूछताछ में उसने विस्फोटक सामग्री को माओवादी सप्लायर टीम तक पहुंचाने की बात स्वीकार की। यह सामग्री नारायणपुर बाजार से तारागांव तक पहुंचाई गई थी।
फोन रिकॉर्ड से मिला सुराग
सिर्फ पूछताछ पर भरोसा नहीं किया गया। जांच में तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए। कॉल डिटेल रिकॉर्ड को खंगाला गया। इससे आरोपियों के बीच संपर्क और घटनाक्रम की कड़ियों की पुष्टि करने की कोशिश की गई।
इसके बाद कोसरू वड्डे को मामले में आरोपी बनाया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
SIA ने कोर्ट में रखी पूरी कहानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर पुलिस से आगे की जांच SIA को सौंपी गई थी। एजेंसी ने विवेचना पूरी कर विशेष न्यायालय नारायणपुर में अभियोग पत्र पेश किया।
अदालत में गवाहों के बयानों और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित हुए। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दोषी माना।
सात साल की सबसे बड़ी सजा
अदालत ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 में सात-सात साल का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए जुर्माना लगाया। इसके अलावा प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े कानून की अलग-अलग धाराओं में दो से पांच साल तक के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। यानी विस्फोटक की सप्लाई का आरोप अब सिर्फ पुलिस की फाइल में नहीं, अदालत के फैसले में भी दर्ज हो गया है।
नक्सल सप्लाई चेन पर चोट
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सीधे हथियार चलाने वालों के बजाय सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने की जांच हुई। विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को जंगल तक पहुंचाने की कोशिश सामने आई।
जांच एजेंसी ने संपर्क, सामग्री और सप्लाई की कड़ियों को जोड़कर केस तैयार किया। अदालत की सजा से ऐसे नेटवर्क को बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब सप्लायरों पर शिकंजा
नक्सल हिंसा के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ जंगल में मौजूद सशस्त्र दस्तों पर कार्रवाई काफी नहीं है। विस्फोटक, पैसा और दूसरी सामग्री पहुंचाने वाले नेटवर्क भी बड़ी कड़ी हैं। तारागांव का यह मामला इसी सप्लाई लाइन की एक परत खोलता है। अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती ऐसे नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचने की है।
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