31 मार्च की डेडलाइन से पहले माओवादी स्टेट कमेटी मेंबर सोमन्ना का सरेंडर; संगठन को लगा बड़ा झटका

Harrison Masih | Mar 30, 2026, 13:38 IST
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माओवादी संगठन को बड़ा झटका देते हुए स्टेट कमेटी सदस्य चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने आत्मसमर्पण कर दिया। AOB क्षेत्र के प्रमुख कमांडर रहे सोमन्ना का सरेंडर 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से ठीक पहले बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

NEWS IN SHORT

  • माओवादी कमांडर चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने आत्मसमर्पण किया।
  • सोमन्ना AOB क्षेत्र का प्रमुख माओवादी कमांडर रहा है।
  • वह केंद्रीय क्षेत्रीय समिति की तीसरी कंपनी का कमांडर भी रह चुका है।
  • शीर्ष लीडर की मौत के बाद क्षेत्र की कमान सोमन्ना के पास थी।
  • 31 मार्च 2026 की नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन से ठीक पहले सरेंडर।

NEWS IN DETAIL

विजयवाड़ा में माओवादी सोमन्ना का आत्मसमर्पण

बस्तर संभाग और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। माओवादी संगठन के स्टेट कमेटी सदस्य चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आत्मसमर्पण कर दिया है। यह सरेंडर माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।



AOB क्षेत्र का प्रमुख कमांडर रहा सोमन्ना

जानकारी के अनुसार सोमन्ना लंबे समय से AOB क्षेत्र में सक्रिय था और संगठन के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहा था। वह AOB स्टेट कमेटी का प्रमुख सदस्य होने के साथ-साथ केंद्रीय क्षेत्रीय समिति (CRC) की तीसरी कंपनी का कमांडर भी रह चुका है। उसके जिम्मे कई बड़ी माओवादी गतिविधियों की रणनीति तैयार करना और संचालन शामिल रहा है।



शीर्ष लीडरों की मौत के बाद संभाली थी कमान

सूत्रों के मुताबिक शीर्ष माओवादी नेता गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस क्षेत्र में संगठन की कमान सोमन्ना के पास ही थी। ऐसे में उसका आत्मसमर्पण संगठन के लिए रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।



डेडलाइन से पहले आत्मसमर्पण का बड़ा संकेत

केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस डेडलाइन से ठीक पहले सोमन्ना का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि लगातार दबाव और ऑपरेशन के चलते शीर्ष माओवादी कैडर भी मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।



पुनर्वास नीति का दिख रहा असर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, रोजगार के अवसर और सामाजिक पुनर्स्थापना जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इसी नीति के चलते हाल के समय में कई माओवादियों ने सरेंडर किया है।



IMP FACTS

नाम: चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना


पद: माओवादी स्टेट कमेटी सदस्य


जिम्मेदारी: CRC तीसरी कंपनी का कमांडर


सक्रिय क्षेत्र: AOB (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर)


आत्मसमर्पण स्थान: विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश)


समय: 31 मार्च 2026 डेडलाइन से ठीक पहले



आगे क्या

सुरक्षा एजेंसियां सोमन्ना से संगठन के नेटवर्क और ठिकानों की जानकारी जुटा सकती हैं। अन्य माओवादी कैडरों पर भी सरेंडर का मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा। AOB और बस्तर क्षेत्र में ऑपरेशन तेज होने की संभावना है। सरकार की पुनर्वास नीति को और प्रभावी बनाया जा सकता है।



निष्कर्ष

स्टेट कमेटी सदस्य स्तर के माओवादी नेता सोमन्ना का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता है। 31 मार्च 2026 की तय डेडलाइन से पहले यह घटनाक्रम संकेत देता है कि लगातार दबाव और सख्त अभियान के कारण माओवादी संगठन की शीर्ष संरचना कमजोर हो रही है और मुख्यधारा में वापसी की प्रक्रिया तेज हो रही है। आंध्र प्रदेश में सरेंडर



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