अमूल दूध का डिब्बा बना हथियार... इससे बम बना रहे नक्सली
नक्सली अतिसंवेदनशील क्षेत्र के जंगल में सचिंग के दौरान डीआरजी व सीएएफ जवानों की संयुक्त टीम को नक्सलियों द्वारा डंप किया कुकर, पाइप और टिफिन बम बरामद हुआ है। कई नक्सली सामग्री भी जवानों ने जब्त की है। सामग्रियों के अनुसार इस क्षेत्र में अभी भी नक्सलियों की आवाजाही है। पुलिस की मानें तो बस्तर में फोर्स का दबाव बढ़ने के कारण माओवादी धमतरी के जंगलों में शरण लेते हैं। इन दिनों बस्तर क्षेत्र में फोर्स का दबाव बढ़ चुका है, ऐसे में नक्सलियों के वहां से भागकर नगरी के नक्सली अतिसंवेदनशील क्षेत्र के गांवों के जंगलों में शरण लेने की आशंका है।
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अमूल दूध के डिब्बे से बना रहे बम
धमतरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 26 अप्रैल को एएसपी शैलेंद्र पांडेय के मार्गदर्शन में नगरी डीआरजी और सीएएफ खल्लारी के जवानों की संयुक्त टीम सचिंग आपरेशन पर थाना खल्लारी के चमेन्दा, साल्हेभाट क्षेत्र में रवाना हुई थी। इस दौरान जवानों को सुबह आठ बजे चमंदा व साल्हेभाट के बीच जंगल में नक्सलियों द्वारा डंप की गई सामग्री मिला है।
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इसमें तीन नग कुकर बम, तीन नग अमूल दूध के डिब्बे (बम), दो नग पाइप बम व एक टिफिन बम, एक वाकी टाकी मिला है। साथ ही घटना स्थल पर नक्सलियों की दवाइयां व दैनिक उपयोगी बर्तन, राशन व अन्य सामग्रियों को पुलिस जवानों ने जब्त किया है। जवानों ने बताया कि नक्सलियों ने अलग-अलग थैले को एक तिरपाल, पालीथिन व नीले कलर की प्लास्टिक ड्रम में डाल कर दो अलग-अलग जगह डंप किया था।
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FAQ
- नगरी क्षेत्र के जंगल में सुरक्षाबलों को किन वस्तुओं के रूप में नक्सलियों द्वारा डंप किए गए बम मिले?
सुरक्षाबलों को तीन कुकर बम, तीन अमूल दूध के डिब्बों से बने बम, दो पाइप बम, एक टिफिन बम, और एक वॉकी-टॉकी बरामद हुआ है। इसके साथ ही नक्सलियों की दवाइयां, राशन, बर्तन व अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री भी जब्त की गई। - बस्तर क्षेत्र से नक्सली क्यों धमतरी के जंगलों में शरण ले रहे हैं?
बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों का दबाव बढ़ने के कारण नक्सली वहां से भागकर धमतरी के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से नगरी के जंगलों, में शरण लेने लगे हैं। यह क्षेत्र भी नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। - नक्सलियों ने बरामद सामग्रियों को जंगल में कैसे छिपाया था?
नक्सलियों ने हथियार और सामग्री को अलग-अलग थैलों में भरकर, तिरपाल, पॉलीथिन, और नीले रंग की प्लास्टिक ड्रम में पैक कर जंगल में दो अलग-अलग स्थानों पर डंप किया था, ताकि उनका पता न चल सके।
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