छत्तीसगढ़ सरकार का दावा, राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में ईंधन का पर्याप्त भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।
- राज्य में करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है।
- पैनिक बाइंग के कारण मांग में अचानक भारी वृद्धि हुई।
- रविवार को भी डिपो खोलकर ईंधन की आपूर्ति की गई।
- सभी पेट्रोल पंपों पर प्राथमिकता से सप्लाई भेजी जा रही है।
NEWS IN DEATIL
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की किल्लत को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की अफवाहें उड़ रही हैं। इन अफवाहों के कारण कई पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ देखने को मिली और लोगों में 'पैनिक बाइंग' (डर के मारे जरूरत से ज्यादा खरीदारी) की स्थिति बन गई। इस पूरे मामले पर अब राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आम जनता को बड़ी राहत दी है। सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
करोड़ों लीटर का स्टॉक मौजूद
खाद्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस समय ईंधन का भारी स्टॉक सुरक्षित है। राज्य में वर्तमान में:
पेट्रोल: 3 करोड़ 28 लाख 68 हजार लीटर
डीजल: 7 करोड़ 75 लाख 71 हजार लीटर
सरकार ने नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक खबरों या अफवाहों में न आएं। अनावश्यक रूप से पेट्रोल-डीजल का भंडारण करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। सरकार हर नागरिक को सुगमता से ईंधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अचानक क्यों बढ़ी मांग?
अधिकारियों के मुताबिक, बीते 13 और 14 मई को अचानक सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक खबरें फैलीं, जिसके बाद ईंधन की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
पेट्रोल की सामान्य बिक्री के मुकाबले इसकी खरीद में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। डीजल की मांग में भी 22 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके अलावा, वर्तमान में खेती-किसानी का सीजन शुरू होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों के लिए डीजल की मांग में प्राकृतिक रूप से भी लगातार इजाफा हो रहा है।
सरकार एक्शन मोड में: रविवार को भी खुले रहे डिपो
बढ़ी हुई मांग को नियंत्रित करने और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए खाद्य विभाग के संचालक ने सभी प्रमुख ऑयल कंपनियों के साथ एक आपात समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जिन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक कम हो रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर तुरंत सप्लाई भेजी जाए।
प्रदेश भर में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए तीन मुख्य डिपो लगातार काम कर रहे हैं:
1. लखौली डिपो (रायपुर)
2. मंदिरहसौद डिपो (रायपुर)
3. गोपालपुर डिपो (कोरबा)
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने रविवार के अवकाश के दिन भी इन डिपो को चालू रखा। छुट्टी के दिन भी लगभग 370 टैंकरों के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पेट्रोल और डीजल भेजा गया। वर्तमान में, ऑयल कंपनियों के सभी डिपो से प्रतिदिन दो शिफ्टों में काम लिया जा रहा है ताकि मांग के अनुरूप ईंधन की सप्लाई में कोई देरी न हो।
प्रदेश में 2,516 पेट्रोल पंपों का नेटवर्क
छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कुल 2,516 पेट्रोल पंप संचालित हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि कंपनियों के पास कच्चे माल और रिफाइंड ईंधन की कोई कमी नहीं है। टैंकरों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र में ड्राई (Dry) होने की स्थिति पैदा न हो।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की मुस्तैदी और तेल कंपनियों के चौबीसों घंटे काम करने से छत्तीसगढ़ में ईंधन संकट का कोई खतरा नहीं है। जनता को सलाह दी जाती है कि वे सामान्य दिनों की तरह ही पेट्रोल-डीजल खरीदें और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
यह खबरें भी पढ़ें...
क्रेडिट कार्ड-एटीएम और यूपीआई से लेकर ईंधन तक, 1 मई से लागू हुए कई बड़े बदलाव
LPG गैस संकट के बीच बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह की सलाह, रोटी-पराठे कम खाएं और ईंधन बचाएं
छत्तीसगढ़ पुलिस ने गाड़ियों में डाला 350 करोड़ का डीजल, किराए के वाहनों में 170 करोड़ का ईंधन
अच्छे दिन: टोल कलेक्शन का सेटेलाइट सिस्टम वक्त बचाएगा और ईंधन भी