छत्तीसगढ़ में नो लीव का फरमान, तीन महीने के लिए नया नियम, पालन नहीं किया तो मुश्किल होगी
छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों को छुट्टी लेना मुश्किल होगा। सरकार ने इसके लिए नया और सख्त नियम बना दिया है। तर्क है कि आगामी तीन महीनों के लिए सुशासन तिहार और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण काम होने वाले हैं। ऐसे में छुट्टियों को कसावट रहेगी। फिलहाल यह नियम तीन महीने के लिए लागू होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया है।
आदेश की तीन बड़ी बातें
1. कैजुअल लीव - अब अचानक तबीयत खराब होने या इमरजेंसी पड़ने पर भी आपको चुपचाप घर नहीं बैठना है। फोन या डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा और ऑफिस आते ही उसकी लिखित पुष्टि करनी होगी।
2. प्रभार का पेंच- अगर लंबी छुट्टी मंजूर हो भी गई, तो जब तक आप अपने काम की फाइलें और जिम्मेदारी किसी दूसरे को सौंप नहीं देते तब तक आप ऑफिस नहीं छोड़ सकते।
3. कड़ाई से पालन- आदेश की आखिरी लाइन में स्पष्ट लिखा है कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। यानी अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है।
बिना मंजूरी गायब हुए तो करियर खत्म
महानदी भवन से जारी आदेश के मुताबिक, अब बिना लिखित मंजूरी के ऑफिस से नदारद रहना सेल्फ गोल साबित होगा। सरकार ने साफ कह दिया है कि बिना पूर्व स्वीकृति के छुट्टी पर जाना स्वैच्छिक अनुपस्थिति मानी जाएगी। इतना ही नं, इसे सेवा नियमों के तहत ब्रेक इन सर्विस के तौर पर देखा जाएगा। आसान भाषा में समझ लीजिए कि सीनियरिटी और पेंशन पर तलवार लटक सकती है।
क्यों आई ये नौबत
सरकार का तर्क है कि आगामी तीन महीनों में सुशासन तिहार और जनगणना जैसे बड़े और महत्वपूर्ण काम होने हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय नहीं चाहते कि इन मिशन-मोड प्रोजेक्ट्स में कोई भी छुट्टी रोड़ा अटकाए। इसीलिए अगले 90 दिनों के लिए प्रदेश के तमाम विभागों, कलेक्टोरेट और राजस्व मंडलों के लिए यह इमरजेंसी जैसे हालात वाला आदेश लागू कर दिया गया है।
पहले 1 महीने के लिए था आदेश
बता दें कि जनगणना को देखते हुए पहले 1 महीने के लिए शासकीय छुट्टियों पर पहरा लगाया गया था। अति आवश्यक और वाजिब कारण से ही छुट्टियां दी जानी थी। वह भी कलेक्टर या विभाग प्रमुख के आदेश के बाद। लेकिन अब नए आदेश के तहत यह समय सीमा 3 महीने की कर दी गई है।
विपश्यना के 12 दिन
बता दे कि हाल ही सरकार ने अधिकारियेां के काम को दबाव को देखते हुए साल में 12 दिन के लिए अतिरिक्त अवकाश की घोषणा की थी। जिसके कुछ ही दिनों बाद यह आदेश जारी कर दिया गया है। अब कर्मचारी पूछ रहे हैं कि ऐसे आदेश से कर्मचारियेां में दबाव नहीं आएगा?
निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है
सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव अंशिका ऋषि पांडेय के डिजिटल हस्ताक्षर से निकले इस आदेश ने यह तो साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ शासन अब योजनाओं के लिए सख्त है।
यह खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के नाम पर गबन, जांच तेज
पूर्व MLA का सुशासन तिहार में हंगामा... BJP नेताओं को चूड़ियां पहनने बोलीं
Chhattisgarh में सुशासन तिहार के मौके पर अफसर पर भड़के सीएम साय | दी सख्त चेतावनी
'सुशासन तिहार' में शराब दुकान से दुल्हन तक, जनता की पुकार ने चौंकाया