नर्सिंग भर्ती : पुरुषों को मौका न देने पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- 100% महिला आरक्षण असंवैधानिक, हाईकोर्ट हुआ सख्त।
- तीन साल बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।
- हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य और पीएससी सचिव को नोटिस भेजा।
- पुरुषों को भर्ती से बाहर रखना अब भारी पड़ेगा।
- नियमित भर्ती रोकी, संविदा विज्ञापन जारी होने से विवाद।
पुरुष अभ्यर्थियों ने जीती लड़ाई
छत्तीसगढ़ के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती का मामला अब फिर गरमा गया है। हाईकोर्ट के पुराने फैसले को न मानना राज्य सरकार के अफसरों को भारी पड़ रहा है। तीन साल से पुरुष अभ्यर्थी अपने हक के लिए भटक रहे हैं।
कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी संशोधित विज्ञापन जारी नहीं हुआ। अधिकारियों की इस अनदेखी से नाराज होकर अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका लगाई। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जिम्मेदार अफसरों को जवाब देने के लिए समन भेजा है।
2021 में निकला था विवादित विज्ञापन
पूरा विवाद 8 दिसंबर 2021 को शुरू हुआ था। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने डिमॉन्स्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती निकाली थी। इस भर्ती में नियम बनाकर केवल महिलाओं को ही आवेदन का मौका दिया गया। पुरुषों को पूरी तरह से प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।
पुरुष अभ्यर्थियों ने दी थी चुनौती
इस भेदभाव वाले नियम के खिलाफ पुरुष अभ्यर्थियों ने तुरंत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अभय कुमार किस्पोट्टा और उनके साथियों ने याचिका दायर की।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब पढ़ाई में समानता है, तो नौकरी में पुरुषों को बाहर क्यों रखा जा रहा है। बीएससी और एमएससी नर्सिंग में पुरुष भी पढ़ते हैं।
सरकार का तर्क कोर्ट ने किया खारिज
राज्य सरकार ने महिलाओं के पक्ष में अनुच्छेद 15(3) का हवाला दिया था। सरकार का कहना था कि अस्पतालों में देखभाल का काम ज्यादातर महिलाएं करती हैं। हालांकि कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 100% आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
आदेश के बाद भी दबा रहा मामला
फैसले के ठीक 6 दिन बाद पीएससी ने शासन को पत्र भेजा था। इसमें नए सिरे से नियम बनाकर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। अभ्यर्थियों ने भी अफसरों को कई बार ज्ञापन सौंपा। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग फाइल दबाकर बैठा रहा और कोई सुधार नहीं हुआ।
तीन साल तक नियमित भर्ती रोकी रखी गई। इसके बाद 22 जून 2026 को संविदा पदों के लिए नया विज्ञापन जारी कर दिया गया। इस कदम से अभ्यर्थियों का गुस्सा भड़क गया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी।
5 हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को नोटिस भेजा गया है। इसके साथ ही पीएससी सचिव डी. राहुल वेंकट से भी जवाब मांगा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 सप्ताह बाद होगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज भर्ती पर क्या आदेश दिया था?
Ans: हाईकोर्ट ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। कोर्ट ने पुरुष अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल करने का स्पष्ट आदेश दिया था। - छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस क्यों जारी हुआ?
Ans: हाईकोर्ट का फैसला आने के 3 साल बाद भी विभाग ने पुरुषों के लिए संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी नहीं किया। आदेश का पालन न करने के कारण कोर्ट ने अवमानना नोटिस भेजा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एम्स नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026: सीबीटी परीक्षा और पात्रता की पूरी जानकारी
INC-सूटेबिलिटी विवाद में फंसे छत्तीसगढ़ के हजारों नर्सिंग छात्र
AIIMS में सरकारी नौकरी का मौका: नर्सिंग ऑफिसर के 2,218 पदों पर भर्ती, करें आवेदन
कोर्ट की सख्ती का असर, एमपी में नर्सिंग कॉलैजों की मान्यता के 370 आवेदन आए