होटल से दबोचे गए ऑनलाइन सटोरिए, 45 लाख की संपत्ति जब्त
NEWS IN SHORT
- ऑनलाइन सट्टा रैकेट का पर्दाफाश, बिलासपुर पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा
- होटल के कमरे से चल रहा था सट्टा कारोबार, पुलिस की रेड में खुलासा
- करोड़ों के लेन-देन वाला सट्टा नेटवर्क ध्वस्त, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
- फर्जी सिम और बैंक खातों से चल रहा था खेल, पुलिस ने कसा शिकंजा
- इनामी सटोरिया राजा बजाज गिरफ्तार, अवैध संपत्ति की जांच शुरू
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़: बिलासपुर में पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस की इस कार्रवाई में फरार चल रहे मुख्य आरोपी खाईवाल राजेश उर्फ राजा बजाज और उसके साथी प्रदीप खत्री को रायपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी “रिक्की पैनल” के जरिए ऑनलाइन सट्टा संचालन कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में अवैध ऑनलाइन जुए के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पुलिस टीम लंम्बे समय से कर रही थी तलाश
पुलिस की एंटी साइबर एंड क्राइम यूनिट (ACCU) और सिविल लाइन थाना टीम लंबे समय से राजा बजाज की तलाश कर रही थी, जिस पर 5 हजार रुपये का इनाम घोषित था। लगातार ठिकाना बदलकर फरारी काट रहे आरोपियों के रायपुर में छिपे होने की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने योजना बना कर होटल में दबिश दी। जांच में पता चला कि होटल का कमरा एक महिला के नाम से बुक कराया गया था, जिससे संदेह और गहरा हुआ।
होटल रूम में मिला लक्ज़री सामान
कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को भारी मात्रा में नकदी, लैपटॉप, महंगे मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और सट्टे का हिसाब-किताब रखने वाले रजिस्टर मिले। आरोपियों के पास से कुल 6.90 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जबकि जब्त सामान की कुल कीमत करीब 45 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा तीन लग्जरी कारें—होंडा सिटी, मारुति ब्रेजा और मारुति स्विफ्ट डिजायर—भी जब्त की गई हैं।
नेटवर्क पैन इंडिया स्तर पर फैला
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पैन इंडिया स्तर पर फैला हुआ था। आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से ग्राहकों को जोड़ते थे और व्हाट्सएप के जरिए उन्हें सट्टा खेलने के लिए लिंक उपलब्ध कराते थे। इस पैनल पर एविएटर, विंगो, कैसिनो और हॉर्स राइडिंग जैसे ऑनलाइन गेम्स उपलब्ध थे, जिन पर लोग पैसे लगाकर हार-जीत का दांव खेलते थे।
सट्टा कारोबार में मुनाफे का बंटवारा
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि सट्टा कारोबार में मुनाफे का बंटवारा तय था। कुल कमाई का 65 प्रतिशत हिस्सा हेड ऑफिस को जाता था, जबकि 35 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय ऑपरेटरों को दिया जाता था। एजेंट लोगों को जोड़ने और उन्हें सट्टा खेलने के लिए प्रेरित करने का काम करते थे।
आम लोगों को दिया गया कमीशन का लालच
गिरोह के संचालन के लिए फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल किए जाते थे और उन्हीं खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जाता था। पुलिस को 10 से अधिक बैंक खातों में भारी ट्रांजेक्शन के दस्तावेज मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा दिसंबर 2025 में एक अन्य आरोपी मनोज पोपटानी की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। उससे पूछताछ में राजेश बजाज और प्रदीप खत्री के नाम सामने आए थे, जिसके बाद से पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी।
आरोपी संपत्ति होगी कुर्क
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि पहली बार किसी सटोरिए के खिलाफ व्यापक वित्तीय जांच शुरू की गई है। प्रारंभिक जांच में आरोपी के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये कीमत का मकान होने की जानकारी मिली है। अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है और जल्द ही उन्हें कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के अवैध सट्टा कारोबार आम लोगों की मेहनत की कमाई को लूटते हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। पुलिस अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आर्थिक रूप से भी ऐसे अपराधियों को कमजोर करने के लिए उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई करेगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी “रिक्की पैनल” के जरिए देशभर में सट्टा नेटवर्क चला रहे थे। कार्रवाई में नकदी, लग्जरी कारें और लाखों का सामान जब्त किया गया। पुलिस अब आरोपियों की संपत्ति की जांच कर आर्थिक कार्रवाई की तैयारी में है।
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