खुले गड्ढों से 10 बच्चों की मौत, अब निगमों को हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में खुले गड्ढों और अधूरे निर्माण ने पिछले पांच सालों में 10 से ज्यादा मासूम बच्चों की जान ले ली। हर बार घटना होती है, पत्र जारी होते हैं, लेकिन हालात नहीं बदलते। अब राज्य बाल संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद शासन ने सभी निगम आयुक्तों को पत्र लिखा है। इसमें हर माह यह बताना अनिवार्य किया गया है कि उनके इलाके में कितनी जगह गड्ढे खुले हैं और कितने भरे गए।
पांच साल में 10 से ज्यादा बच्चों की जान
प्रदेश में खुले गड्ढे कई इलाकों में मासूम बच्चों के लिए डेथ ट्रैप बन चुके हैं। इनमें ज्यादातर बड़े भवनों व बिल्डिंगों के निर्माण के लिए खोदकर छोड़े गए होते हैं।
किसी भी निर्माण वाली जगह पर खोदे गए गड्ढों की बेरिकेडिंग, ग्रीन नेट लगाने और लोगों की आवाजाही रोकने का नियम वर्षों से लागू है, लेकिन नगर निगमों और अन्य निकायों ने इसे कागजों तक ही सीमित कर दिया।
नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक बच्चों की जान खुले गड्ढों में गिरने से जा चुकी है।
पिछले 4 साल की बड़ी घटनाएं और मौतें
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में पिछले चार साल में हुई बड़ी घटनाएं इस प्रकार हैं। 2022 में जांजगीर जिले के पिहरीद में खुले बोरवेल में राहुल साहू 104 घंटे तक फंसे रहे, सुरक्षित निकाले गए।
2025 में रायपुर के गुलमोहर पार्क में खुले सोकपिट में सात वर्षीय दिव्यांश की मौत हुई, दो बच्चे बच गए।
2025 में ही रायपुर के कबीर नगर में निजी बिल्डिंग के गड्ढे में 8 साल के सत्यम और 10 साल के आलोक की मौत हो गई।
2025 में मोहला-मानपुर जिले के छींझपहाड़ी में नए खुदे तालाब में तीन बच्चे डूब गए। 2025 में जगदलपुर के परपा में पत्थर खदान में गिरने से दो बच्चों की मौत हुई।
2026 में गरियाबंद के स्थानीय ग्राम में डंपिंग गड्ढे में गिरने से भाई-बहन की डूबने से मौत हो गई।
शहीद स्मारक के पास नाला खुला है
राजधानी में पड़ताल की गई तो कई जगह खुले गड्ढे मिले। शहीद स्मारक के पास नगर निगम करीब 20 दिनों से बाईपास नाले का निर्माण करा रहा है, लेकिन सड़क किनारे बने गहरे गड्ढों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं।
बढ़ईपारा-ताततपारा मार्ग पर निजी निर्माण के लिए खोदे गए बड़े गड्ढे भी बिना प्रभावी बेरिकेडिंग के खुले पड़े मिले। बारिश में इनमें पानी भरने से खतरा और बढ़ गया है।
क्या है कानून और क्या होना चाहिए
नगरीय निकायों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट के मुताबिक किसी भी तरह का निर्माण कार्य बिना सुरक्षा उपायों के नहीं किया जा सकता।
निजी या सरकारी किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर गड्ढे बने हों तो उन्हें चारों तरफ से बांसबल्ली से बेरिकेटिंग करनी है। अधूरे निर्माणों के भीतर बच्चों के पहुंचने के रास्ते बंद करने होंगे। साथ ही ग्रीन नेट लगाना भी अनिवार्य है।
इसी तरह यदि सड़क किनारे पाइपलाइन या सीवरेज इत्यादि का काम चल रहा हो और गड्ढे हैं तो उसके चारों ओर बेरिकेडिंग करनी है। एक्ट में इसका प्रावधान है।
शासन का सख्त पत्र
राज्य बाल संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद शासन ने हरकत दिखाई है। अपर संचालक नगरीय प्रशासन विभाग पुलक भट्टाचार्य ने बताया कि नगर निगम और टाउन प्लानिंग एक्ट के तहत किसी भी तरह के निर्माण और उसके लिए खोदे गए गड्ढों की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होती है। नगरीय निकाय के अफसरों को इसकी नियमित निगरानी करनी चाहिए। यह अनिवार्य है। शासन भी समय-समय पर संबंधित निकायों को निर्देश जारी करता है।
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