धान के बाद अब खाद का टोकन, किसानों की बढ़ गई उलझन

Arun Tiwari | Jun 02, 2026, 21:31 IST
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छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 के दौरान यूरिया की कालाबाजारी और कृत्रिम संकट रोकने के लिए सरकार गरियाबंद और बीजापुर से नई टोकन आधारित खाद वितरण प्रणाली शुरू करने की तैयारी कर रही है।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में सरकार टोकन टोकन खेल रही है और किसान खाद के लिए परेशान हो रहा है। खरीफ सीजन 2026 में रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया की बढ़ती मांग और संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए राज्य सरकार खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कृषि विभाग टोकन आधारित वितरण प्रणाली लागू करने पर विचार कर रहा है, जिसके तहत किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता और जोत के आधार पर निर्धारित मात्रा में ही यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत से अधिक खरीद, कालाबाजारी और कृत्रिम संकट की स्थिति को रोकना है।



आदिवासी जिलों से शुरुआत :

प्रारंभिक तौर पर इस प्रणाली की शुरुआत गरियाबंद और बीजापुर जैसे जिलों से की जा सकती है। यदि प्रयोग सफल रहा तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि टोकन प्रणाली से खाद वितरण अधिक पारदर्शी होगा और वास्तविक किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंच सकेगा।



खरीफ के लिए पर्याप्त खाद का दावा :

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किया है। इसमें 7.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 80 हजार मीट्रिक टन एमओपी, 2.5 लाख मीट्रिक टन एनपीके तथा 2 लाख मीट्रिक टन एसएसपी शामिल हैं।



गोदामों में इतना उर्वरक :

कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश के गोदामों और समितियों में करीब 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इनमें से 3.33 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद किसानों को वितरित भी किया जा चुका है। पिछले वर्ष 30 मई तक लगभग 3 लाख मीट्रिक टन खाद का उठाव हुआ था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर करीब 3.34 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है।



कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर सख्ती :

खाद की बढ़ती मांग के बीच कृषि विभाग ने कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। कोरबा जिले में छह उर्वरक दुकानों में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं पाली क्षेत्र में बड़ी मात्रा में खाद के भंडारण की शिकायत मिलने पर कार्रवाई करते हुए एक दुकान का विक्रय प्रतिबंधित किया गया।



इसी तरह जांजगीर चांपा जिले में निरीक्षण के दौरान 2638 बोरी रासायनिक उर्वरक जब्त किए गए और एक प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया। विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में जांच और निगरानी अभियान को और तेज किया जाएगा ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



जैविक विकल्पों को भी बढ़ावा :

सरकार केवल रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कृषि में जैविक और प्राकृतिक विकल्पों को भी प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। विभाग का मानना है कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।



इसी को ध्यान में रखते हुए इस खरीफ सीजन में लगभग 40 हजार एकड़ क्षेत्र में हरी खाद उगाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही किसानों को बड़ी संख्या में बायो-फर्टिलाइजर और जैविक उर्वरकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य करीब तीन लाख बोतल बायो-फर्टिलाइजर वितरित करने का है। पिछले वर्ष हरी खाद का उपयोग लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र तक सीमित था, जिसे इस बार चार गुना तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।



क्या कहता है कृषि विभाग :

कृषि विभाग का कहना है कि टोकन प्रणाली, निगरानी अभियान और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने जैसे कदमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना है। विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा तथा वास्तविक जरूरतमंद किसानों को बिना किसी परेशानी के उर्वरक मिल सकेंगे। इससे खरीफ सीजन के दौरान खाद संकट की आशंकाओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



FAQ

  1. सरकार खाद वितरण के लिए नई टोकन प्रणाली क्यों लागू कर रही है?
    उत्तर: इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खाद की जरूरत से अधिक खरीद, कालाबाजारी, अवैध भंडारण और बाजार में कृत्रिम संकट की स्थिति को रोकना है। इसके तहत किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता और जमीन की जोत के आधार पर निर्धारित मात्रा में ही यूरिया व अन्य खाद पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी。
  2. वर्तमान में राज्य के पास कितना खाद का स्टॉक उपलब्ध है?
    उत्तर: कृषि विभाग के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के गोदामों और समितियों में करीब 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक में उपलब्ध है, जिसमें से 3.33 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है।
  3. किसानों को किस आधार पर खाद मिलेगी?
    उत्तर: किसानों की वास्तविक आवश्यकता और उनकी जमीन की जोत (रकबे) के आधार पर।
  4. जैविक खेती के लिए क्या लक्ष्य है?
    उत्तर: इस बार 40 हजार एकड़ में हरी खाद उगाने (पिछले साल से 4 गुना) और 3 लाख बोतल बायो-फर्टिलाइजर वितरण का लक्ष्य है।

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