छत्तीसगढ़ में बड़ा सिंचाई घोटाला, स्वीकृत राशि से ज्यादा बांटे 67 करोड़

Aishwarya Dwivedi | Jul 19, 2026, 12:07 IST
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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में पैरी सिंचाई परियोजना में 53 करोड़ के स्वीकृत काम में 67.76 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। वित्तीय नियमों के उल्लंघन पर सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक बड़ा सिंचाई घोटाला सामने आया है। यहाँ की पैरी सिंचाई परियोजना में नियमों को ताक पर रख दिया गया। साल 2008 में इस परियोजना के लिए 53 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। लेकिन अधिकारियों ने बिना अनुमति के 67.76 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। विधानसभा में मामला उठने के बाद अब इसकी उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है।



पैरी परियोजना पर सवाल

छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। यह हड़कंप गरियाबंद जिले की एक पुरानी सिंचाई परियोजना के कारण है। इस परियोजना का नाम पैरी सिंचाई परियोजना है। यह परियोजना करीब 22 साल पुरानी है। इस परियोजना के तहत नहर लाइनिंग का काम होना था। इस काम में बहुत बड़ी वित्तीय अनियमितता पाई गई है।



स्वीकृत राशि से अधिक का भुगतान

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। तब इस काम के लिए 53 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। इसे तकनीकी भाषा में प्रशासकीय स्वीकृति कहा जाता है। नियम के मुताबिक खर्च इसी सीमा के भीतर होना चाहिए था। लेकिन अधिकारियों ने इस नियम की जमकर धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने स्वीकृत राशि से कहीं अधिक पैसा बांट दिया।



विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 67.76 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। यह राशि स्वीकृत बजट से बहुत ज्यादा है। जल संसाधन विभाग ने खुद माना है कि यह बड़ी लापरवाही है। यह भुगतान वित्तीय नियमों के खिलाफ जाकर किया गया है।



छत्तीसगढ़ में बड़ा सिंचाई घोटाला


नियमों का हुआ उल्लंघन

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी काम में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी हो सकती है। वित्तीय नियमों में इसकी सीमा तय की गई है। यह सीमा स्वीकृत राशि का अधिकतम 20 प्रतिशत होती है। लेकिन पैरी प्रोजेक्ट में इस सीमा को भी पार कर दिया गया। बिना किसी पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति के ही करोड़ों रुपए ज्यादा दे दिए गए। विभाग ने माना है कि इसमें गंभीर प्रक्रियागत गलती हुई है।



इस पूरे मामले में मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम की भूमिका संदिग्ध है। इसे संक्षेप में एमआईएस (MIS) कहा जाता है। एमआईएस के जरिए ही सारे भुगतानों पर नजर रखी जाती है। अब इस सिस्टम की भूमिका की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों को अंदेशा है कि जानबूझकर सिस्टम की अनदेखी की गई।



विधानसभा में गूंजा मामला

यह पूरा घोटाला अचानक सामने नहीं आया है। विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला जोर-शोर से उठा था। विधायकों ने ध्यानाकर्षण सूचनाओं के माध्यम से इस पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने सरकार को इस मुद्दे पर जमकर घेरा। इसके बाद जल संसाधन विभाग तुरंत हरकत में आ गया। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़े कदम उठाए हैं। मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बना दी गई है। यह आदेश प्रमुख अभियंता स्तर से जारी किया गया है। इस पांच सदस्यीय जांच समिति की कमान एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है।



पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच

इस जांच समिति के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता संजय पाठक बनाए गए हैं। उनके साथ समिति में चार अन्य अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। ये चारों अधिकारी जल संसाधन विभाग और जल मौसम विज्ञान संगठन से हैं। यह समिति पूरे रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करेगी।



समिति मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। पहला बिंदु यह है कि अतिरिक्त भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया। दूसरा बिंदु यह है कि इस भारी-भरकम राशि के भुगतान के लिए किसने मंजूरी दी थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।



FAQ

  1. पैरी सिंचाई परियोजना का मामला क्या है?
    उत्तर: यह छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का मामला है, जहां 22 साल पुरानी पैरी सिंचाई परियोजना के नहर लाइनिंग कार्य में 53 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि के मुकाबले 67.76 करोड़ रुपए का अत्यधिक भुगतान कर दिया गया।
  2. पैरी नदी किस प्रमुख नदी की सहायक नदी है?
    उत्तर: पैरी नदी छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा कही जाने वाली महानदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। इसका उद्गम गरियाबंद जिले की भातृगढ़ पहाड़ियों से होता है।
  3. पैरी नदी पर कौन सा प्रसिद्ध बांध (जलाशय) स्थित है?
    उत्तर: पैरी नदी पर गरियाबंद जिले में सिकासार जलाशय (बांध) स्थित है। यहाँ सिंचाई के साथ-साथ जलविद्युत का उत्पादन भी किया जाता है।

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