पूर्व CM बघेल के ट्वीट से जागा प्रशासन, 135 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
समझें क्या है पूरा मामला
Durg। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर उठे विवाद के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किसानों की शिकायतों को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गए। इसके तहत जिलेभर में 135 कृषि केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जिसमें कई जगह गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
प्रशासन का दावा और जमीनी सख्ती एक साथ
कृषि विभाग ने दावा किया है कि खरीफ सीजन 2026 के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज का भंडारण किया गया है। iMFS पोर्टल के अनुसार पाटन क्षेत्र में हजारों मीट्रिक टन यूरिया, डीएपी, एसएसपी, पोटाश और एनपीके उपलब्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार स्टॉक अधिक रखा गया है ताकि किसानों को किसी तरह की कमी न हो।
लेकिन दूसरी ओर निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासन की तैयारी पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कई केंद्रों पर स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी और बिना अनुमति बिक्री के मामले पाए गए।
डीएपी की कमी स्वीकार, विकल्पों पर जोर
कृषि विभाग ने डीएपी की आंशिक कमी को स्वीकार किया है। अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने से यह स्थिति बनी है। इसके विकल्प के तौर पर एसएसपी, एनपीके, टीएसपी और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग किसानों को लगातार जागरूक कर रहा है कि वे फसल की जरूरत के अनुसार वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग करें।
135 केंद्रों की जांच में गड़बड़ी उजागर
जिला प्रशासन के उड़नदस्ता दल ने पाटन क्षेत्र सहित पूरे जिले में निजी और सहकारी कृषि केंद्रों पर छापेमारी की। जांच के दौरान कई केंद्रों पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 का उल्लंघन पाया गया। कुछ जगह बिना अनुमति अतिरिक्त स्रोतों से खाद की बिक्री हो रही थी, तो कहीं स्टॉक रजिस्टर ही ठीक से अपडेट नहीं था।
सात विक्रेताओं को नोटिस, कई स्टॉक जब्त
जांच के बाद कृषि विभाग ने सात विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा सेलूद, रानीतराई और धमधा क्षेत्र में कई कृषि केंद्रों से अमानक बायो स्टिम्यूलेंट और उर्वरक जब्त किए गए हैं। ऋषभराज फर्टिलाइजर और अन्य केंद्रों पर अधिक कीमत वसूली और नियम उल्लंघन के भी मामले सामने आए हैं।
लैब रिपोर्ट में भी खुली पोल
जांच के दौरान लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट में पांच केंद्रों के उर्वरक अमानक पाए गए। इसके बाद इन केंद्रों पर बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी गई है और संबंधित विक्रेताओं से जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
कृषि विभाग ने साफ कहा है कि खाद और बीज की जमाखोरी, कालाबाजारी या मिलावट में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत लाइसेंस निलंबन से लेकर रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आवश्यक होने पर कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
किसानों के हित में निगरानी तेज
प्रशासन का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिला स्तर पर टीमों को सक्रिय कर दिया गया है और आगे भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
इस पूरी कार्रवाई के बाद पाटन क्षेत्र में खाद वितरण व्यवस्था पर निगरानी और सख्त हो गई है। किसान संगठनों का कहना है कि अगर यह सख्ती लगातार बनी रही तो वास्तविक किसानों को इसका सीधा फायदा मिलेगा और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
IMP FACTS
पाटन क्षेत्र में खाद-बीज की कमी की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई
दुर्ग प्रशासन ने कुल 135 कृषि केंद्रों का निरीक्षण किया
जांच में कई जगह अमानक उर्वरक और नियम उल्लंघन मिले
7 विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए
कुछ केंद्रों से खाद और बायो-स्टिम्यूलेंट जब्त किए गए
लैब जांच में 5 सैंपल अमानक पाए गए
डीएपी की आंशिक कमी स्वीकार, वैकल्पिक खाद पर जोर
प्रशासन का दावा: खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
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