छत्तीसगढ़ PDS राशन घोटाला : चावल के बदले पैसे थमाकर गरीबों से खुली लूट
NEWS IN SHORT
- राशन के बदले ग्राहकों पर नकद पैसे लेने का दबाव।
- 20 रूपए में चावल लेकर 35 रुपए में अवैध बिक्री जारी।
- ऑनलाइन मशीन पर बाट रखकर वजन की फर्जी एंट्री।
- तीन माह का एकमुश्त राशन डकार रहे राशन दुकानदार।
- प्रशासन की मॉनिटरिंग फेल, बेबस गरीब खरीद रहे महंगा अनाज।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और इसके आसपास के इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। गरीबों को मुफ्त मिलने वाले सरकारी चावल का काला खेल धड़ल्ले से जारी है। सेल्समैन और दुकानदार संगठित होकर हितग्राहियों को राशन देने के बजाय उन पर नकद पैसे लेने का दबाव बना रहे हैं।
तीन दुकानों का हाल
1. हीरापुर (नीरा छुरा की दुकान): यहाँ 3 महीने का चावल मांगने पर दुकानदार ने साफ कह दिया कि स्टॉक नहीं है। एक महीने का चावल लो और बाकी दो महीने के पैसे ले लो। तर्क यह दिया गया कि अभी सबको ऐसे ही दे रहे हैं।
2. लालपुर: यहाँ खुलेआम हितग्राहियों को चावल के बदले नकद बांटा जा रहा था। जब एक महिला ने अपने हक का अनाज मांगा, तो डीलर ने "स्टॉक नहीं आने" का बहाना बनाकर उसे पैसे देकर रवाना कर दिया।
3. बोरियाकला: यहाँ भी लालपुर के ही सिंडिकेट का कब्जा मिला। ग्राहक बेबस हैं; उनका कहना है कि विरोध करने पर दुकानदार कहीं और जाने को कह देते हैं, जबकि हर दुकान पर यही हाल है।
धांधली की हाईटेक तकनीक
डिजिटल इंडिया के इस दौर में दुकानदारों ने मशीन को चूना लगाने का भी रास्ता निकाल लिया है। राशन वितरण की ऑनलाइन एंट्री के समय मशीन पर चावल के बोरे की जगह लोहे के बाट रख दिए जाते हैं। इससे सिस्टम में चावल के वजन की फर्जी एंट्री हो जाती है और रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है कि हितग्राही को राशन मिल गया। वास्तविकता में उस चावल को बचाकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।
10 रूपए प्रति किलो की काली कमाई
दुकानदार गरीबों को 20 रूपए प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करते हैं। चूंकि यह चावल गरीबों को मुफ्त मिलता है, इसलिए वे मजबूरी में जो मिल रहा है उसे लेकर चले जाते हैं। बाद में इसी सरकारी चावल को सेल्समैन बिचौलियों के माध्यम से 30 रूपए से 35 रूपए प्रति किलो की दर से खुले बाजार में खपा देते हैं। प्रति किलो 10रूपए से 15 रूपए का सीधा मुनाफा सीधा सेल्समैनों की जेब में जा रहा है।
जागरूक बनें ग्राहक
जब इस गंभीर गड़बड़ी को लेकर खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्र ने उन्होंने कहा कि चावल के बदले पैसे देना पूरी तरह अवैध है और ग्राहकों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि पिछले 2 साल में 6 दुकानों पर FIR दर्ज की गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है.
FAQ
1- PDS का फुल फॉर्म क्या है और यह क्यों बना?
इसका मतलब Public Distribution System (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) है। इसे इसलिए बनाया गया ताकि कम आय वाले परिवारों को सरकार द्वारा कम कीमत या मुफ्त में अनाज मिल सके।
2- क्या दुकानदार 3 महीने का राशन देने से मना कर सकता है?
नहीं। यदि सरकार ने 'एकमुश्त' (एक साथ) राशन देने का आदेश जारी किया है, तो दुकानदार को पूरा राशन देना ही होगा। "स्टॉक नहीं है" कहना अक्सर बहाना होता है।
3- राशन तोलने के लिए कौन सी मशीन अनिवार्य है?
अब सभी दुकानों पर e-PoS (Electronic Point of Sale) मशीन अनिवार्य है, जो आधार से लिंक होती है। बिना फिंगरप्रिंट और मशीन एंट्री के राशन देना अवैध है।
4- क्या चावल के बदले पैसे लेना कानूनी है?
नहीं, नियमतः दुकानदारों को तय मात्रा में अनाज देना अनिवार्य है। पैसे देना पूरी तरह अवैध है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ PDS राशन घोटाला में सरकारी रिकॉर्ड में गरीबों के पेट भर रहे हैं, लेकिन हकीकत में उनका राशन कालाबाजारी की भेंट चढ़ रहा है। प्रशासन की ढीली मॉनिटरिंग का फायदा उठाकर सेल्समैन गरीबों के निवाले को तिजोरियों में भर रहे हैं।
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