छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े: कई जिलों में ₹109 के पार, जानिए आपके जिले का दाम
देशभर में तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। सोमवार 25 मई को जारी नए रेट के मुताबिक पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब छत्तीसगढ़ में भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल की कीमत ₹109 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि राजधानी रायपुर में भी पेट्रोल ₹107.96 प्रति लीटर बिक रहा है।
इस महीने यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है। बढ़ती कीमतों से आम लोगों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की चिंता भी बढ़ गई है।
रायपुर में पेट्रोल ₹108 के करीब
राजधानी रायपुर में पेट्रोल की नई कीमत ₹107.96 प्रति लीटर दर्ज की गई है। हालांकि यह प्रदेश के कई दूरस्थ जिलों की तुलना में कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां भी वाहन चालकों की जेब पर असर साफ दिखाई दे रहा है।
बस्तर और सरगुजा संभाग में सबसे महंगा पेट्रोल
ताजा रेट के अनुसार छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जिलों में पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा बिक रहा है। खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
लगातार बढ़ती कीमतों ने इन इलाकों में वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर डाला है।
कोरबा में सबसे कम रेट
प्रदेश में फिलहाल सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा-
जांजगीर - ₹108.21
दुर्ग - ₹108.29
धमतरी - ₹108.45
महासमुंद - ₹108.64
बिलासपुर - ₹108.65 प्रति लीटर
हालांकि “सबसे कम” रेट वाले शहरों में भी कीमतें अब 107 रुपए से ऊपर पहुंच चुकी हैं।
दूरस्थ इलाकों में क्यों ज्यादा महंगा है पेट्रोल?
विशेषज्ञों के मुताबिक बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ जिलों में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट अधिक होने के कारण ईंधन की कीमतें ज्यादा रहती हैं। तेल डिपो से लंबी दूरी तक टैंकरों के जरिए सप्लाई पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च जुड़ता है।
इसके उलट रायपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे बड़े शहरों व औद्योगिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन बेहतर होने से कीमतें अपेक्षाकृत कम रहती हैं।
आम आदमी से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक असर
पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार में सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
वहीं निजी वाहन चालकों का मासिक बजट भी बिगड़ता नजर आ रहा है। कई लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों से दैनिक खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
ब्लैक मार्केटिंग रोकने प्रशासन अलर्ट
ईंधन संकट और बढ़ती कीमतों के बीच प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
अगर कहीं अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की जानकारी मिले तो लोग इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं-
9977222564
9977222574
9977222584
9977222594
आखिर कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होने से पहले इनमें कई खर्च और टैक्स जुड़ते हैं-
क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसकी मुख्य वजह है। ईरान-अमेरिका तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और नुकसान की भरपाई के लिए कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है।
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