दुनिया की पहली अजीब फसल बीमा योजना, शामिल नहीं होने के लिए देना होता है आवेदन

Harrison Masih | Jul 30, 2026, 15:55 IST
पीएम फसल बीमा योजना विवाद
हर सरकारी योजना में लाभ लेने के लिए आवेदन करना होता है, आधार कार्ड देना होता है, पहचान बतानी होती है, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक ऐसी शर्त सामने आई है जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

हर सरकारी योजना में लाभ लेने के लिए आवेदन करना होता है, आधार कार्ड देना होता है, पहचान बताना होता है, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दुनिया की ऐसी पहली योजना है, जिसमें अजीब शर्तें जोड़ी गई है।



इस योजना में किसान को शामिल नहीं होना है तो उन्हें भारत सरकार के तय आवेदन पत्र को भरकर जमा करना होता है। यदि किसान आवेदन जमा नहीं करता है तो उसका फसल बीमा जबरदस्ती करके बैंक खाते से प्रीमियम की किश्त काट ली जाती है।



30 जुलाई को जारी हुआ विज्ञापन

आज 30 जुलाई को छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख समाचार पत्रों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लेकर विज्ञापन प्रकाशित किये गए हैं।



यह विज्ञापन सरकारी बीमा कंपनी (एआईसी) एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी आफ इंडिया लिमिटेड एवं अन्य कंपनियों ने प्रकाशित कराये हैं। इसमें कई चौंकाने वाले बिंदु हैं।



योजना में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों को अधिसूचित किया गया है। इसमें धान, मक्का, उड़द, अरहर, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, कोदो, कुटकी, रागी, टमाटरबैंगन, मिर्च, अदरक, केला, पपीता, अमरूद की बीमा कराया जाना है।



किसान को देना होगा आवेदन

इसमें सबसे विवादित शर्त यह है कि ऋणी किसान यानी राष्ट्रीयकृत बैंक या सहकारी बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों को बीमा नहीं कराना है, तो उन्हें बैंक जाकर भारत सरकार व्दारा जारी प्रपत्र (Opting-out form) को भरना होगा, और बताना होगा कि उन्हें बीमा नहीं कराना है अतः उनका प्रीमियम न काटा जाए।



इतना ही नहीं यह प्रपत्र उन्हें अपने बैंक को बीमा कराने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से एक सप्ताह पहले जमा करनी है। एक ओर बीमा कंपनी 30 जुलाई को विज्ञापन प्रकाशित करवा रही है और दूसरी ओर सात दिन पहले बैंक में प्रपत्र जमा करने कह रही है। यह भला कैसे संभव है।



दावे पर सवाल

दरअसल किसान संघों ने फसल बीमा कराने की अनिवार्यता का विरोध किया था, जिसके बाद भारत सरकार ने दावा किया है कि उनके व्दारा फसल बीमा की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।



परन्तु अजीब शर्त रख दी गई है कि जिन्हें बीमा नहीं कराना है वे ऋणी किसान आवेदन पत्र दें। जबकि सामान्य नियम यह होता है कि जिन्हें बीमा कराना है वे आवेदन दें।



फसल और बैंक रिकॉर्ड को लेकर परेशानी

फसल बीमा योजना की दूसरी बड़ी विसंगति यह है कि इसमें किसान को अपने खेत में बोयी गई फसल का रिकार्ड भी अपडेट कराना है, जैसे उसने अपने खेत में टमाटर लगाया है लेकिन बैंक के रिकार्ड में धान लिखा है तो भी प्रीमियम काटा जाएगा, लेकिन फसल खराब होगी तो किसान को किसी तरह का दावा भुगतान नहीं दिया जाएगा।



यानी बैंक के रिकार्ड में जो फसल दर्ज है वही फसल किसान को खेत में बोना होगा। किसानों के लिए यह भी दुविधा का प्रश्न है क्योंकि यदि जुलाई-अगस्त में किसान के धान की फसल खराब हो गई तो किसान उस खेत में दूसरी फसल बो देता है, क्योंकि खेत खाली रहने पर उसे नुकसान होता है। परन्तु बीमा कंपनी इस स्थिति में कोई क्लेम नहीं देती।



FAQ

  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार की एक कृषि बीमा योजना है, जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं, मौसम की विपरीत परिस्थितियों और फसल नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का प्रयास किया जाता है। इस योजना में किसान अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा कराकर नुकसान की स्थिति में बीमा क्लेम प्राप्त कर सकते हैं।
  2. PM फसल बीमा योजना पर क्या विवाद है?
    PM फसल बीमा योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में मुख्य विवाद ऋणी किसानों के लिए बीमा से बाहर रहने की प्रक्रिया को लेकर है। किसानों का कहना है कि जब योजना स्वैच्छिक है तो बीमा नहीं कराने के लिए भी Opting-out Form जमा करने की शर्त क्यों रखी गई है।


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