शोएब ढेबर की तलाश में कई ठिकानों पर छापा, फिर भी हाथ खाली, रेड की जानकारी देने वाला कांस्टेबल लाइन अटैच
समझें क्या है पूरा मामला
- आनंद कुकरेजा को 14 सितंबर को वॉट्सऐप पर धमकी मिली।
- धमकी भरा संदेश विदेशी नंबर से भेजा गया था।
- संदेश में 25 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप है।
- रकम नहीं देने पर कुकरेजा और परिवार को धमकी की बात सामने आई।
- जांच में अनवर ढेबर के बेटे शोएब ढेबर की भूमिका सामने आई।
पहले गिरफ्तार करके छोड़ा गया था
भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने शोएब को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे छोड़ना पड़ा। तेलीबांधा पुलिस ने उसे कोर्ट में भी पेश किया था। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट से उसकी दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति ली।
दबिश से पहले ही निकल गया आरोपी
रायपुर पुलिस ने बुधवार को शोएब ढेबर के ठिकानों पर कार्रवाई की। पाम बेलाजिओ का ठिकाना और बैरन बाजार का पारिवारिक आवास इनमें शामिल थे। कुल करीब आधा दर्जन जगहों पर दबिश दी गई।
लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले शोएब वहां से निकल चुका था। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि वह दूसरे राज्य जा सकता है। पुलिस को आशंका है कि उसे कार्रवाई की भनक पहले ही लग गई थी। इसके बाद उसने अपने संभावित ठिकाने बदल दिए। पुलिस अब उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
कॉन्स्टेबल लाइन अटैच
जानकारी के मुताबिक कॉन्स्टेबल शिवम द्विवेदी को लाइन अटैच किया गया है। लाइन अटैच यानी काम से हटाकर पुलिस लाइन भेजना। वह एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट में तैनात है।
जानकारी के मुताबिक डीसीपी (DCP - Deputy Commissioner of Police) क्राइम ने यह कार्रवाई की। उस पर गोपनीय जानकारी लीक होने में लापरवाही बरतने का आरोप है। हालांकि कॉन्स्टेबल लाइन अटैच की इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सूचना किस स्तर से लीक हुई?
जांच इस पर है कि गोपनीय जानकारी किस स्तर से बाहर गई। यह भी देखा जा रहा है कि वह आरोपी तक कैसे पहुंची। आखिर जानकारी बाहर कैसे गई?
कोर्ट से दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति
अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने तलाश तेज कर दी है। संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। दूसरे राज्यों में भी संभावित ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।
पहले पूर्व महापौर एजाज ढेबर से 50 करोड़ रुपए मांगे गए थे। वही परिवार 50 करोड़ रुपए जोड़ने में करीब 1,666 साल लगाएगा।
बिश्नोई गैंग और अमन साव गैंग के नाम
यह मांग बिश्नोई गैंग और अमन साव गैंग के नाम से की गई थी। एजाज ढेबर ने कोतवाली थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR - First Information Report) दर्ज कराई थी। पुलिस दोनों मामलों के बीच संबंध की भी जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस ने पूछताछ से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
अब तक की पूरी टाइमलाइन
14 सितंबर को आनंद कुकरेजा को वॉट्सऐप पर धमकी मिली। जांच में शोएब ढेबर की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में छोड़ना पड़ा। फिर कोर्ट से दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति ली गई।
बुधवार को करीब आधा दर्जन जगहों पर दबिश दी गई। आरोपी वहां नहीं मिला। अब पुलिस की प्राथमिकता उसे पकड़ना और लीक की कड़ी ढूंढना है।
रायपुर रंगदारी मामला अब दो मोर्चों पर जांच में है। कांग्रेस नेता को धमकी देने के आरोपी की तलाश एक मोर्चा है। दूसरा मोर्चा सूचना लीक की जांच है।
यह खबर क्यों जरूरी है:
यह मामला कानून व्यवस्था और पुलिस की गोपनीयता, दोनों से जुड़ा है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। धमकी और रंगदारी इस अधिकार पर चोट करती है। दूसरी तरफ, दोष साबित होने तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है। इसलिए पुलिस की हर कार्रवाई कानून के दायरे में दिखना जरूरी है। दबिश की सूचना लीक होने का आरोप सही निकला, तो यह जांच की साख पर भी असर डालेगा।