छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों की गांधीगिरी ; शासन को भेजेंगे गुलाब और 'प्रेम-पत्र', आरटीई को लेकर बढ़ा टकराव

Aishwarya Dwivedi | Apr 22, 2026, 14:02 IST
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छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों ने आरटीई नियमों और फीस वृद्धि को लेकर सरकार के खिलाफ गांधीगिरी का रास्ता अपनाया है। 6 हजार 800 निजी स्कूल संचालक अब गुलाब का फूल और प्रेम पत्र भेजकर अपनी मांगें मनवाने की कोशिश करेंगे।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि और प्रवेश नियमों में बदलाव को लेकर निजी स्कूलों और शासन के बीच गतिरोध गहराता जा रहा है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए प्रदेश के 6,800 निजी स्कूलों ने अब 'गांधीगिरी' का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। 1 मार्च से जारी असहयोग आंदोलन के अगले चरण में अब स्कूल संचालक शासन के प्रतिनिधियों को गुलाब का फूल भेंट करेंगे और प्रेम-पत्र लिखकर अपनी व्यथा सुनाएंगे।



क्या है मुख्य विवाद

निजी स्कूल संचालकों की सबसे प्रमुख मांग RTE की फीस वृद्धि है। संचालकों का कहना है कि साल 2012 में अधिनियम लागू होने के बाद से प्रति छात्र मिलने वाली राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वे साल 2016 से लगातार इसकी मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।



इसके साथ ही, एसोसिएशन ने मांग की है कि शिक्षा विभाग शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च का डेटा सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके।



आंदोलन का नया शेड्यूल

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की बैठक में आंदोलन की रणनीति को विस्तार दिया गया है:



23 अप्रैल: प्रदेश के समस्त स्कूल संचालक अपने लेटर पैड पर शिक्षा मंत्री और शासन के प्रतिनिधियों को पत्र लिखेंगे।



24 अप्रैल: जिला संगठनों के पदाधिकारी और स्कूल संचालक जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें गुलाब का फूल भेंट करेंगे और अपनी मांगों से अवगत कराएंगे।



अब 'प्री-प्रायमरी' प्रवेश पर भी छिड़ी जंग

एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष राजीव गुप्ता के अनुसार, अब आंदोलन में एक नई मांग जोड़ी गई है। शासन ने इस सत्र से नियमों में बदलाव करते हुए प्री-प्रायमरी (नर्सरी, PP-1, PP-2) में आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिया है। अब केवल पहली कक्षा में ही दाखिले का प्रावधान है। स्कूल संचालकों की मांग है कि प्री-प्रायमरी कक्षाओं में भी गरीब बच्चों को पहले की तरह प्रवेश दिया जाए।



क्रमबद्ध तरीके से बढ़ रहा है विरोध

बता दें कि निजी स्कूल पिछले दो महीनों से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं:



1 मार्च: असहयोग आंदोलन का आगाज।



4 अप्रैल: आरटीई के तहत आवंटित नए बच्चों को प्रवेश न देने का निर्णय।



17 अप्रैल: काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन।



18 अप्रैल: प्रदेशभर के निजी स्कूलों की तालाबंदी।



निष्कर्ष

निजी स्कूलों के इस कड़े रुख और अब 'गांधीगिरी' के जरिए किए जा रहे प्रदर्शन ने शासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यदि जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो इसका सीधा असर शैक्षणिक सत्र और आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले हजारों गरीब बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है।



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