चुनावी साल में होती है पीएससी की बंपर परीक्षाएं, ढाई साल में सिर्फ 1950 पदों पर ही भर्ती

Arun Tiwari | May 19, 2026, 15:01 IST
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छत्तीसगढ़ में चुनावी साल में पीएससी बंपर भर्ती निकालती है। कांग्रेस सरकार में अधिक पदों पर भर्ती हुई, बीजेपी में धीमी गति। अभ्यर्थियों की मांग है पारदर्शिता और समय पर परिणाम।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में पीएससी के जरिए होने वाली भर्ती का खास चुनावी कनेक्शन है। यहां पर चुनावी साल में पीएससी बंपर भर्ती निकालती है। पीएससी की रिपोर्ट बताती है कि 2018 के चुनावी साल में सबसे ज्यादा करीब 2 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई। वहीं 2023 में भी एक हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया हुई। यानी बेरोजगारों को लुभाने के लिए पीएससी के जरिए राजनीतिक पार्टियां यह दांव खेलती हैं। प्रदेश में 15 लाख बेरोजगार हैं जिनमें से आधे पढ़े लिखे हैं। पीएससी के जरिए भर्ती के मामले में बीजेपी चाल बहुत धीमी है। पिछले ढाई साल में 1950 पदों पर भर्ती कर पाई है। जबकि भूपेश सरकार में 47 सौ से ज्यादा पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरु हुई थी। हालांकि भूपेश सरकार में ही पीएससी घोटाला हुआ था जिसके कारण कई परीक्षाएं विवादों में घिरी।



पीएससी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल :

छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों को लेकर एक बार फिर राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) चर्चा में है। नई सरकार के कार्यकाल में जहां पिछले ढाई साल के दौरान करीब 1950 पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं। वहीं पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के पांच साल में कुल 4717 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि इन भर्तियों में कई विवाद भी सामने आए और कई परीक्षाओं के नतीजे लंबित रहने के कारण अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। पीएससी की वार्षिक रिपोर्ट और विभिन्न भर्ती विज्ञापनों के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 से लेकर 2022-23 तक राज्य में बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाएं आयोजित की गईं। इनमें राज्य सेवा परीक्षा के अलावा सहायक प्राध्यापक, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग, उद्योग, प्रशासनिक और तकनीकी पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल रहीं।



कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भर्ती :

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2018-19 में 1991 पदों के लिए 13 परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। इसके बाद वर्ष 2019-20 में 584 पदों के लिए छह परीक्षाएं हुईं। वर्ष 2020-21 में 503 पदों के लिए भी करीब छह परीक्षाओं का आयोजन किया गया। वहीं वर्ष 2021-22 में 665 पदों के लिए आठ परीक्षाएं आयोजित हुईं। सबसे ज्यादा भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022-23 में देखने को मिली जब 974 पदों के लिए 25 परीक्षाओं का आयोजन किया गया। हालांकि इन भर्तियों के साथ विवाद भी जुड़े रहे। कई परीक्षाओं में परिणाम जारी होने में देरी हुई, तो कुछ मामलों में कोर्ट तक मामला पहुंचा। अभ्यर्थियों का आरोप रहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तय समय की कमी रही। वहीं आयोग की ओर से यह दलील दी जाती रही कि भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है और इसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन जैसे चरण शामिल होने के कारण समय लगता है।



बीजेपी सरकार में भर्ती :

प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद भी विभिन्न विभागों में भर्तियों की प्रक्रिया जारी है। पिछले ढाई साल के दौरान करीब 1950 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किए गए हैं। इनमें राज्य सेवा परीक्षा 2023 और 2024 के तहत अलग-अलग पद शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक राज्य सेवा परीक्षा 2023 के अंतर्गत 242 पदों और राज्य सेवा परीक्षा 2024 के तहत 246 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं राज्य सेवा परीक्षा 2025 की तैयारी भी शुरू हो चुकी है और इसके लिए विज्ञापन जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में भी बड़ी संख्या में भर्तियां निकाली गईं। विशेषज्ञ चिकित्सक, साइकोलॉजिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट, डेमोंस्ट्रेटर, सहायक प्राध्यापक और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई पदों पर परीक्षाएं आयोजित की गईं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण संस्थाएं, न्यायिक सेवा और प्रशासनिक विभागों में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।



व्यापमं में होंगी 38 परीक्षाएं :

व्यापमं की ओर से भी इस साल 38 अलग-अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित किए जाने की तैयारी है। इनमें बड़ी संख्या में तकनीकी, स्वास्थ्य और तृतीय श्रेणी के पद शामिल हैं। परीक्षा कैलेंडर भी जारी किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि 2026 में विभिन्न चरणों में परीक्षाओं का आयोजन होगा।



इनमें मंडी निरीक्षक भर्ती परीक्षा सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल मानी जा रही है, जिसमें लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह साल अवसरों से भरा माना जा रहा है। हालांकि अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो, परिणाम समय पर जारी किए जाएं और नियुक्ति में अनावश्यक देरी न हो, ताकि लंबे समय से नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को जल्द राहत मिल सके।



क्या कहते है जानकार :

पीएससी से जुड़े लोगों का कहना है कि आयोग नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और भर्ती प्रक्रिया लगातार चलने वाली व्यवस्था है। उनके अनुसार किसी परीक्षा को लेकर न्यायालय में मामला पहुंचने या प्रशासनिक कारणों से भी परिणामों में विलंब होता है। उनका यह भी कहना है कि राज्य सेवा परीक्षा हर साल आयोजित की जा रही है, लेकिन अन्य विभागीय भर्तियों के परिणाम आने और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में एक से दो साल तक लग जाते हैं।



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