पंजाब कांग्रेस की कलह में उलझे भूपेश बघेल, दिल्ली बैठक में नहीं निकला फॉर्मूला

Arun Tiwari | Jul 25, 2026, 18:25 IST
पंजाब कांग्रेस की कलह 2026
पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। चन्नी ने कहा कि राजा वड़िंग के नेतृत्व में कांग्रेस 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी, और हार की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की होगी।

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक के दौरान प्रदेश प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ऐसा कोई फॉर्मूला नहीं निकाल पाए जिससे इस गुटबाजी को शांत किया जाए।



दिल्ली ने बघेल से साफ कह दिया है कि इस गुटबाजी के साथ पंजाब चुनाव में नहीं उतरा जा सकता। इसका हल तो निकालना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक बैठक में ही चन्नी और राजा वड़िंग के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा।



भूपेश बघेल की होगी जिम्मेदारी :

सूत्रों के अनुसार बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में कांग्रेस 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी।



उन्होंने यह भी कहा कि यदि वड़िंग को पद पर बनाए रखा गया और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी नेतृत्व और प्रभारी के तौर पर भूपेश बघेल की होगी।



चन्नी के इस बयान के बाद बैठक का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि चन्नी गुट लगातार संगठन में बदलाव की मांग कर रहा है, जबकि हाईकमान फिलहाल राजा वड़िंग के नेतृत्व में ही आगे बढ़ने के पक्ष में है।



ऐसे में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी के रूप में भूपेश बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के दोनों गुटों के बीच सामंजस्य बनाकर संगठन को एकजुट रखना है।



बैठक में गरमा गरमी :

बैठक के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं से कहा कि पार्टी ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं, फिर भी वे संगठन के साथ सामंजस्य बनाकर काम नहीं कर रहे हैं।



इस पर चन्नी ने जवाब देते हुए कहा कि यदि ऐसा है तो वह 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बनाई गई कांग्रेस की कैंपेन कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।



हालांकि उनके करीबी नेताओं ने बाद में स्पष्ट किया कि फिलहाल इस्तीफा देने का कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बैठक में तीखी बहस जरूर हुई। बैठक में शुरू में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग शांत रहे, लेकिन जब लगातार उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए गए तो उन्होंने भी अपनी बात रखी।



सूत्रों के मुताबिक वड़िंग ने कहा कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं है तो वह प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।



इस पर केसी वेणुगोपाल ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राजा वड़िंग को कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है और वही इस पद पर बने रहेंगे।



बैठक के बाद भी दिखी नाराजगी :

बैठक के बाद भी नाराजगी के संकेत देखने को मिले। केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सहित कई नेताओं ने बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थकों ने ऐसा नहीं किया।



राजनीतिक हलकों में इसे उनकी नाराजगी का संकेत माना जा रहा है। इससे पहले भी संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद चन्नी गुट ने न तो सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी थी और न ही हाईकमान का आभार जताया था।



हालांकि चन्नी के करीबी नेताओं का कहना है कि उनके इस्तीफे की खबरें सही नहीं हैं, लेकिन वे यह स्वीकार करते हैं कि बैठक में मतभेद खुलकर सामने आए।



ऐसे में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी पार्टी के भीतर जारी खींचतान को खत्म कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी।



कांग्रेस नेतृत्व भी चाहता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन पूरी तरह एकजुट होकर मैदान में उतरे ताकि पंजाब में पार्टी को मजबूत किया जा सके।



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