चन्नी की चाल में उलझे भूपेश बघेल, पंजाब के गणित में पास या फेल
Arun Tiwari | Jul 10, 2026, 14:36 IST
भूपेश-बघेल-पंजाब-कांग्रेस-संकट
पूर्व सीएम भूपेश बघेल की पंजाब में चुनौती बढ़ गई है। सांसद चन्नी ने मुलाकात के लिए शर्त रख दी है। संगठन में एकजुटता की कवायद तेज हो गई है। क्या बघेल इस संकट को सुलझा पाएंगे।
RAIPUR : पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के प्रदेश प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने के कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बाद असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने भूपेश बघेल से मुलाकात के लिए शर्त रख दी है। ऐसे में बघेल को कुछ दिन और पंजाब में रुकना पैड सकता है।
जानकारी के मुताबिक चन्नी ने स्पष्ट किया है कि यदि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग मौजूद रहे तो वे उसमें शामिल नहीं होंगे। ऐसे में बघेल के लिए सभी नेताओं को एक मंच पर लाना आसान नहीं माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में चल रहे मतभेदों को दूर करने के लिए भूपेश बघेल लगातार वरिष्ठ नेताओं और विधायकों से अलग-अलग मुलाकात कर रहे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को 2027 के विधानसभा चुनाव तक प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने असंतोष जताया है। उनका मानना है कि संगठन में व्यापक बदलाव की जरूरत है और नेतृत्व परिवर्तन से ही पार्टी को मजबूती मिल सकती है।
भूपेश बघेल इन दिनों पंजाब दौरे पर हैं और संगठनात्मक बैठकों के जरिए नेताओं की नाराजगी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि कांग्रेस सभी मतभेदों को पीछे छोड़कर 2027 के विधानसभा चुनाव मजबूती से लड़ेगी। उनका कहना है कि वे सभी नेताओं से संवाद करेंगे और पार्टी को एकजुट रखना उनकी प्राथमिकता है।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है। पहले भी चन्नी और वरिष्ठ नेता रंधावा कई बैठकों से दूरी बना चुके हैं। इससे यह संदेश गया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति गहरी है। अब चन्नी की नई शर्त ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन में संवाद की प्रक्रिया जारी है और सभी नेताओं की राय को महत्व दिया जाएगा। इसी रणनीति के तहत भूपेश बघेल अलग-अलग नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुन रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस आलाकमान भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभा सकता है ताकि चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता का माहौल बनाया जा सके।
पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में कांग्रेस यदि आंतरिक विवादों को समय रहते नहीं सुलझा पाती है तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजरें भूपेश बघेल की सुलह कोशिशों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे नाराज नेताओं को मनाकर संगठन में एकजुटता कायम कर पाते हैं या पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह आने वाले समय में और गहरा जाती है।
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बघेल के सामने एकजुटता की चुनौती:
कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को 2027 के विधानसभा चुनाव तक प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने असंतोष जताया है। उनका मानना है कि संगठन में व्यापक बदलाव की जरूरत है और नेतृत्व परिवर्तन से ही पार्टी को मजबूती मिल सकती है।
क्या संकट मोचक बनेंगे बघेल:
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है। पहले भी चन्नी और वरिष्ठ नेता रंधावा कई बैठकों से दूरी बना चुके हैं। इससे यह संदेश गया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति गहरी है। अब चन्नी की नई शर्त ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
नेताओं से अलग अलग मुलाक़ात:
पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में कांग्रेस यदि आंतरिक विवादों को समय रहते नहीं सुलझा पाती है तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
भूपेश पर नज़र:
FAQ
- वर्तमान में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर: अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (Amrinder Singh Raja Warring)। कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव तक इस पद पर बनाए रखने का फैसला किया है। - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रभारी भूपेश बघेल के सामने क्या शर्त रखी है?
उत्तर: चन्नी ने शर्त रखी है कि यदि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग मौजूद रहेंगे, तो वे उस बैठक में शामिल नहीं होंगे। वे राजा वड़िंग की मौजूदगी में मुलाकात नहीं करना चाहते। - पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव किस वर्ष होना निर्धारित है?
उत्तर: पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में होना है।
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