पुराने विवाद अभी ठंडे भी नहीं हुए, पेलमा प्रोजक्ट जनसुनवाई फिर तय

Rajesh Lahoti | May 21, 2026, 16:54 IST
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रायगढ़ के तमनार में पेलमा कोल परियोजना की नई जनसुनवाई 8 जून को होगी। पिछले विवादों और वायरल वीडियो के बाद अब प्रशासन शांतिपूर्ण सुनवाई कराने की तैयारी में है। क्या इस बार विवाद टलेगा या पेलमा फिर बनेगी हलचल का केंद्र?

रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक की बहुचर्चित पेलमा कोल परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने नई सार्वजनिक जनसुनवाई की सूचना जारी की है। नोटिस के मुताबिक 8 जून 2026 को सुबह 11 बजे ग्राम पंचायत पेलमा में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। यह सुनवाई पेलमा ओपनकास्ट कोल माइन परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय स्वीकृति और विस्तार प्रस्तावों को लेकर रखी गई है। दो दिन पहले होने वाली जनसुनवाई गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ में होने के कारण टाली गई थी। प्रशासन नहीं चाहता था कि बांटे गए गिफ्ट के वायरल हो रहे वीडियो से जनसुनवाई में कोई बवाल हो।



यह सिर्फ एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया नहीं मानी जा रही। तमनार क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में जितनी भी बड़ी औद्योगिक और खनन परियोजनाओं की जनसुनवाई हुईं, वे विवाद, विरोध और राजनीतिक आरोपों के कारण चर्चा में रहीं। पेलमा की नई तारीख सामने आते ही पुराने विवाद फिर गर्माने लगे हैं। पिछले 15 साल में यहां लगभग 10 से ज्यादा जनसुनवाई निरस्त करनी पड़ी है या फिर आगे बढ़ानी पड़ी है। दो जनसुनवाई को एनजीटी ने लपेटे में ले लिया था।



पेलमा परियोजना पहले से विवादों में

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप रहा है कि खदान विस्तार से खेती, जंगल, जल स्रोत और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। वहीं परियोजना पक्ष रोजगार और विकास का दावा करता रहा है। इसी टकराव के कारण हर जनसुनवाई यहां प्रशासन और विरोधी संगठनों के बीच शक्ति परीक्षण जैसी बन जाती है।



अंबुजा परियोजना पर हुआ था भारी विरोध

तमनार क्षेत्र में अम्बुजा सीमेंट की परियोजना की जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रदूषण, धूल और जल संकट के मुद्दे उठाए थे। लोगों का कहना था कि पहले से चल रही औद्योगिक गतिविधियों का असर खेतों और स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। विरोध बढ़ने और माहौल तनावपूर्ण होने के बाद प्रशासन को प्रक्रिया आगे बढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।



एसईसीएल की जनसुनवाई में गिफ्ट राजनीति का विवाद

हाल ही में एसईसीएल की प्रस्तावित जनसुनवाई भी बड़े विवाद में आ गई थी। आरोप लगे थे कि सुनवाई को मैनेज करने के लिए ग्रामीणों के बीच बैट-बॉल, दरी, पेटी और छाते जैसे सामान बांटे गए। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुए थे। विपक्षी दलों और स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया था कि जनसमर्थन जुटाने के लिए लुभावने वितरण किए गए। इसके बाद मामला राजनीतिक रंग पकड़ गया और प्रशासन पर निष्पक्ष जनसुनवाई सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया। भारी विवाद और विरोध के बीच आखिरकार जनसुनवाई रद्द करनी पड़ी थी।



अब 8 जून पर सबकी नजर

नई अधिसूचना जारी होने के बाद तमनार क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। प्रशासन इस बार शांतिपूर्ण जनसुनवाई कराने की तैयारी में जुटा है, जबकि विरोधी संगठन पुराने मुद्दों और कथित अनियमितताओं को फिर उठाने की रणनीति बना रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 8 जून की जनसुनवाई बिना विवाद पूरी हो पाएगी, या पेलमा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी औद्योगिक और पर्यावरणीय लड़ाई का केंद्र बनने जा रहा है। रायगढ़ के कलक्टर मयंक चतुर्वेदी का कहना है कि पहले एसईसीएल पूरी तैयारी नहीं कर पाया था, इसलिए जनसुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी थी।



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