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Raigarh. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का तमनार ब्लॉक पिछले कुछ दिनों से जल रहा है। 27 दिसंबर को वहां जो हिंसा हुई, वह अचानक उपजा गुस्सा नहीं था, बल्कि पिछले छह महीनों से सुलग रही नाराजगी का नतीजा था। स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जमीनों को फर्जी ग्राम सभा के जरिए उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संभावित खतरे की गूँज छत्तीसगढ़ विधानसभा में 18 जुलाई को सुनाई दी थी, लेकिन उसे कोर्ट का मामला बताकर दबा दिया गया।
विपक्ष ने दी थी चेतावनी
तमनार का मामला पहली बार 18 जुलाई 2025 को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान उठा था। सदन में विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट रूप से सरकार को आगाह किया था कि तमनार के गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक को लेकर जनता में भारी असंतोष है। विपक्ष का आरोप था कि जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड को कोल ब्लॉक आवंटित करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह नियमों के खिलाफ हैै।
सदन में चर्चा के दौरान यह मुद्दा उठा कि ग्रामीणों की सहमति के बिना ही कागजों पर ग्राम सभाएं आयोजित दिखा दी गईं। हालांकि, इस मुद्दे पर चर्चा कराने के बजाय इसे तकनीकी आधार पर टाल दिया।
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स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य कर दिया
लेकिन विपक्ष की तरफ से स्थगन प्रस्ताव को यह कहकर अग्राह्य कर दिया गया कि प्रस्ताव में गारे पेलमा के साथ हसदेव जंगल का भी मामला शामिल है इसलिए एक प्रस्ताव पर दो विषय नहीं हो सकते। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए भी इस पर विस्तृत चर्चा नहीं की जा सकती। जबकि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सहित कई विपक्षी नेता इस मामले में विरोध करते रहे।
क्या है पूरा मामला
पूरा विवाद गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक के अलॉटमेंट से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों और आदिवासी संगठनों का दावा है कि कोल ब्लॉक के लिए जरूरी जनसुनवाई और ग्राम सभा की रिपोर्ट कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी अपनी जमीन देने पर सहमति नहीं दी, फिर भी दस्तावेजों में उन्हें सहमत दिखाया गया। तमनार पहले से ही प्रदूषण और भारी औद्योगिक दबाव झेल रहा है। नए कोल ब्लॉक से क्षेत्र की पारिस्थितिकी पूरी तरह नष्ट होने का डर है।
लेडी पुलिस के कपड़े तक फाड़े गए
छत्तीसगढ़ के तमनार ब्लाक में 27 दिसंबर को आंदोलन के दौरान हिंसक हुए ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इसमें घटना की शाम को थाना प्रभारी कमला पुसाम का डंडे और लात घूसों से मारने की वीडियो सामने आया लेकिन 30 दिसंबर को एक नया वीडियो सामने आया है. इसमें प्रदर्शन कर रहे लोगों ने एक लेडी कॉन्स्टेबल के साथ अभद्रता की थी।
पहले प्रदर्शनकारी उसे दौड़ाकर खेत में ले गए जहां उसकी वर्दी फाड़कर खेतों में घसीटा था। साथ ही झाड़ू और चप्पल दिखाकर धमका रहे थे। वहीं, लेडी कॉन्स्टेबल आबरु बचाने के लिए रो और गिड़गिड़ा रही थी। प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई में कई ग्रामीणों को भी चोटें आई है।
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6 महीने और सरकार की विफलता
विधानसभा में मामला उठने के बजाय जुलाई से लेकर दिसंबर तक, ग्रामीण लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। पदयात्राएं निकाली गईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। जब सरकार ने सदन में इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो प्रशासन का रवैया भी ढुलमुल हो गया। जनता को लगा कि उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है, और इसी बेबसी ने 25 दिसंबर को हिंसा का रूप ले लिया।
डीएम-एसपी को किसका संरक्षण
इधर मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फिर सवाल उठाते हुए सरकार पर सवाल किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से सवाल किया है कि आखिर इतनी बड़ी घटना के बाद भी रायगढ़ के कलेक्टर और एसपी अभी भी पद पर कैसे जमें हुए हैं। इनको किसका संरक्षण प्राप्त है।
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