/sootr/media/media_files/2026/01/09/tamnar-women-constable-case-2026-01-09-13-12-43.jpg)
Raigarh. जिले के तमनार थाना क्षेत्र में महिला आरक्षक के साथ हुई शर्मनाक घटना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए शासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए और सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता को तलब करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान सामने आई तमनार मामले की तल्खी
दरअसल, हाईकोर्ट में यह टिप्पणी अभनपुर थाना क्षेत्र के एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान आई। राजधानी रायपुर के एक थाना क्षेत्र में टोनहा और तांत्रिक होने के आरोप में एक व्यक्ति को निर्वस्त्र कर सार्वजनिक रूप से घुमाने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़ित पक्ष ने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की, जिसके साथ ही तमनार की घटना भी कोर्ट के संज्ञान में लाई गई।
तमनार में महिला आरक्षक के साथ हुई थी बर्बरता
तमनार क्षेत्र में JPL कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक पर हमला किया गया था। आरोप है कि भीड़ ने महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ दी और उसे अर्धनग्न कर दिया। इस घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा किया था।
इसके बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी का सड़क पर जुलूस निकाला गया, जहां उसे अंडरवियर और फटी बनियान में, चेहरे पर लिपस्टिक पोतकर सार्वजनिक रूप से घुमाया गया। इसी कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
ये खबर भी पढ़ें... तमनार खनन विवाद: प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक के कपड़े फाड़े, अर्धनग्न किया
इस तरह की घटनाएं स्वीकार्य नहीं – चीफ जस्टिस
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार की घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई और आरोपी को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की अनुमति किसने दी।
डिवीजन बेंच ने शासन पक्ष से कहा कि इस मामले में सीधे महाधिवक्ता आकर सरकार का पक्ष रखें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की यह कार्रवाई किस आदेश और नियम के तहत की गई।
पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
हाईकोर्ट (CG High Court) की टिप्पणी के बाद पुलिस की कार्यशैली, मानवाधिकारों और कानून के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट की सख्ती से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में शासन और पुलिस को कड़ा जवाब देना पड़ सकता है।
अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां महाधिवक्ता द्वारा सरकार का पक्ष रखा जाएगा और हाईकोर्ट इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय करेगा।
ये खबर भी पढ़ें... तमनार के लिए निकले भूपेश के रास्ते में आया कार्गो, बोले हमें नहीं रोक पाओगे जी
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us