रायपुर कोर्ट में पकड़ा गया फर्जी वकील, मिले कई आधार कार्ड
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर जिला कोर्ट में एक फर्जी वकील पकड़ा गया। अधिवक्ताओं को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम बार-बार बदला। तलाशी में उसके पास से 4 से 5 आधार कार्ड मिले। पुलिस अब दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।
फर्जी वकील जिला कोर्ट में पकड़ा
रायपुर के जिला कोर्ट परिसर में शुक्रवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां एक कथित फर्जी वकील पकड़ा गया। जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की सतर्कता से यह मामला उजागर हुआ। आरोपी को पकड़कर सिविल लाइन थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। उसके पास से कई संदिग्ध पहचान पत्र मिले हैं। इसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
अधिवक्ताओं को हुआ शक
जानकारी के मुताबिक आरोपी न्यायालय परिसर में वकील बनकर लोगों से संपर्क कर रहा था। उसकी हरकतें कुछ अधिवक्ताओं को सामान्य नहीं लगीं। इसके बाद अधिवक्ताओं ने उससे सीधे पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान आरोपी अपनी पहचान को लेकर अलग-अलग बातें बताने लगा। इससे अधिवक्ताओं का शक और बढ़ गया।
नाम बदलता रहा आरोपी
पूछताछ में आरोपी ने कभी अपना नाम हरीश डहरिया बताया। तो कुछ ही देर बाद उसने अपना नाम मनीष कुर्रे बता दिया। बार-बार बदलते जवाबों से अधिवक्ताओं को साफ हो गया कि कुछ गड़बड़ है। इसके बाद उसकी तलाशी लेने का फैसला किया गया।
तलाशी में मिले कई आधार कार्ड
आरोपी की तलाशी के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। उसके पास से 4 से 5 आधार कार्ड बरामद हुए। इसके अलावा कुछ अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज भी मिले। इतने सारे पहचान पत्र एक साथ मिलने पर दस्तावेजों की सत्यता को लेकर सवाल उठने लगे। अधिवक्ताओं ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी।
पुलिस के हवाले किया गया आरोपी
सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस आरोपी को अपने साथ थाने ले गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी किसी व्यक्ति का न्यायालय संबंधी काम कराने के सिलसिले में कोर्ट पहुंचा था। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसके पीछे कोई बड़ा फर्जीवाड़ा तो नहीं छिपा है।
कैसे करें असली वकील की पहचान
रायपुर में 5 हजार से ज्यादा पंजीकृत वकील हैं। इनमें से करीब 2,500 से 3,000 वकील जिला न्यायालय में नियमित प्रैक्टिस करते हैं। किसी भी अधिवक्ता को सबसे पहले राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत होना पड़ता है। इसके बाद वह जिस जिले में वकालत करना चाहता है, वहां के बार एसोसिएशन में भी पंजीयन कराता है।
पंजीयन पूरा होने के बाद ही उसे संबंधित न्यायालय में प्रैक्टिस करने की अनुमति मिलती है। हर वकील के पास बार एसोसिएशन का पहचान पत्र भी होता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी वकील की पहचान पर शक हो, तो वह जिला बार एसोसिएशन से सीधे सत्यापन करा सकता है। इससे ठगी से बचा जा सकता है।
TIMELINE
- शुक्रवार (घटना का दिन): आरोपी वकील बनकर रायपुर जिला कोर्ट परिसर में दाखिल हुआ और पक्षकारों से संपर्क करने लगा।
- संदेह: कोर्ट परिसर में उसकी संदिग्ध हरकतों को देखकर वहां मौजूद असली अधिवक्ताओं को उस पर शक हुआ।
- पूछताछ व नाम बदलना: वकीलों ने जब उससे पूछताछ की, तो वह बार-बार अपना नाम बदलता रहा (कभी हरीश डहरिया तो कभी मनीष कुर्रे बताया)।
- तलाशी व खुलासा: कड़ाई से पूछताछ के बाद जब उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से 4 से 5 अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए।
- गिरफ्तारी व जांच: अधिवक्ताओं ने तुरंत सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचना दी; पुलिस मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लेकर जांच में जुट गई।
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