3 ठग, 17 राज्य और 10 करोड़ का ट्रांजैक्शन, रायपुर साइबर सेल ने अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचा
NEWS IN SHORT
- रायपुर साइबर पुलिस ने 2.03 करोड़ की अंतरराज्यीय ठगी का खुलासा किया
- आर्यन सिंह और अन्य आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया
- सपन कुमार और पुष्पा अग्रवाल के मामले में डिजिटल अरेस्ट की तकनीक का इस्तेमाल
- सिविल लाइन रायपुर में 36 लाख की साइबर ठगी के आरोपी राजदीप भाटिया गिरफ्तार
- पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कई अन्य साइबर मामलों में भी सुराग मिलने की संभावना
NEWS IN DETAIL
Raipur : रायपुर रेंजIG अमरेश मिश्रा के निर्देश पर रायपुर साइबर पुलिस ने बड़ी अंतरराज्यीय ठगी का पर्दाफाश किया है। तीन आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कुल 2.03 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी के 18 म्यूल बैंक खाते जब्त किए हैं, जिनमें लगभग 10.76 करोड़ रुपए की ट्रांजैक्शन जानकारी मिली। आरोपियों के खिलाफ 17 अलग-अलग राज्यों में 88 साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
पहला मामला: सपन कुमार की ठगी
सबसे पहले पीड़ित सपन कुमार ने शिकायत दर्ज कराई। आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर उसे डराया। उन्होंने क्रेडिट कार्ड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा मामला होने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित को 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर किया गया और लगभग 1.25 करोड़ की ठगी की गई। पुलिस ने थाना विधानसभा में अपराध क्रमांक 22/26 के तहत मामला दर्ज किया। जांच में पता चला कि रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। पुलिस ने तुरंत इन खातों को होल्ड करवाया और न्यायालय की प्रक्रिया से 60 लाख रुपए पीड़ित को वापस दिलाए। मुख्य आरोपी आर्यन सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
दूसरा मामला: पुष्पा अग्रवाल की ठगी
दूसरा मामला पुष्पा अग्रवाल का है। आरोपियों ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच अधिकारी बताया और पीड़ित को डराया। फिर उसे 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर कर डिजिटल अरेस्ट किया गया और लगभग 42 लाख की धोखाधड़ी की गई। थाना कोतवाली रायपुर में अपराध क्रमांक 201/25 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र कुमार को हुबली, कर्नाटका से गिरफ्तार किया। आरोपी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का कार्य करता है और घटना के बाद लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।
तीसरा मामला: सिविल लाइन रायपुर में धोखाधड़ी
थाना सिविल लाइन रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 44/25 के अनुसार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के पीड़ितों के साथ 36 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी हुई। इसमें उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के 104 म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया गया। जांच में पहले 92 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बैंक और मोबाइल सिम सर्विस प्रदाता कंपनियों से दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर मुख्य आरोपी राजदीप सिंह भाटिया को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया।
आरोपियों की जानकारी
पहला आरोपी आर्यन सिंह, पिता राजेश सिंह, उम्र 22 वर्ष, वर्तमान पता आर मंगलम यूनिवर्सिटी, गुड़गांव, स्थायी पता धूमनगंज, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश। दूसरा आरोपी जितेंद्र कुमार, पिता नागराज, उम्र 33 वर्ष, स्थायी पता हुबली, धारवाड़, कर्नाटका। तीसरा आरोपी राजदीप सिंह भाटिया उर्फ यश भाटिया, पिता बलजीत सिंह भाटिया, उम्र 29 वर्ष, पता डोंगरगढ़, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़।
निष्कर्ष
साइबर पुलिस रायपुर की त्वरित और कुशल कार्रवाई से अंतरराज्यीय साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ। आरोपियों की गिरफ्तारी से अन्य मामलों में भी सुराग मिलने की संभावना है। पुलिस लगातार जांच कर रही है और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
FAQ
- ठगी की रकम कितनी थी?
कुल 2.03 करोड़ रुपए की ठगी हुई। - आरोपियों को कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
आर्यन सिंह – दिल्ली, जितेंद्र कुमार – हुबली कर्नाटका, राजदीप भाटिया – डोंगरगढ़। - ठगी का तरीका क्या था?
आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और डिजिटल अरेस्ट कर व्हाट्सएप कॉल में पैसे ठगे। - पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
18 म्यूल बैंक खाते जब्त किए, कुछ रकम पीड़ितों को लौटाई और आरोपियों को न्यायालय में पेश किया।
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