रायपुर जीएसटी घोटाला : मास्टरमाइंड अमन अग्रवाल पर FIR, 10 फर्जी फर्मों का खुलासा
समझें क्या है पूरा मामला
- फर्जी फर्मों की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
- छोटे लोगों के नाम पर बड़े कारोबार का खेल कैसे चला
- GST रिकॉर्ड में दर्ज फर्मों की हकीकत जांच में आई सामने
- दस्तावेजों की पड़ताल में खुली फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
- करोड़ों के लेनदेन के पीछे छिपे नामों की हुई पहचान
रायपुर में GST फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य GST विभाग की जांच में ऐसी कई फर्मों का पता चला है जिनके नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया था। जांच में सामने आया कि कुछ फर्में ऐसे लोगों के नाम पर बनाई गई थीं जिन्हें अपने नाम से कारोबार चलने की जानकारी तक नहीं थी।
इस मामले में मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मजदूर और छोटे काम करने वालों के नाम पर बनी फर्में
GST विभाग की जांच में सामने आया कि कई फर्मों के संचालक सामान्य लोग थे। इनमें चाय ठेला लगाने वाला व्यक्ति, इलेक्ट्रिशियन और दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं। उनके नाम से करोड़ों रुपये का कारोबार दर्ज किया गया था।
जांच में एक फर्म के नाम पर करोड़ों रुपये की खरीद दिखाई गई। संबंधित व्यक्ति ने अधिकारियों को बताया कि उसका इस कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। इसी तरह कई अन्य लोगों ने भी फर्म और बैंक खातों से अनजान होने की बात कही।
चाय बेचने वाले के नाम पर करोड़ों का कारोबार
विभाग के अनुसार विकास यदु के नाम से अगस्त इंटरप्राइजेस बनाई गई थी। इस फर्म से 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार दिखाया गया। इसमें करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट भी लिया गया। विकास ने बताया कि वह पहले चाय का ठेला लगाता था और उसे इस कारोबार की जानकारी नहीं थी।
इसी तरह एक अन्य फर्म के जरिए भी बड़ा कारोबार दिखाया गया। उसके संचालक ने बताया कि वह नौकरी करता है और संबंधित कारोबार से उसका कोई संबंध नहीं है।
मृत व्यक्ति के नाम पर बनाया गया किरायानामा
जांच में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। गरियाबंद की एक फर्म के दस्तावेजों में मकान मालिक के तौर पर फूल सिंह का नाम दर्ज था। विभाग के अनुसार फूल सिंह की मौत साल 2010 में हो चुकी थी।
इसके बावजूद साल 2025 में उनके नाम से किरायानामा तैयार किया गया। इस फर्म से भी करोड़ों रुपये का कारोबार और ITC दिखाया गया था।
बैंक खाते और दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
GST विभाग ने जब फर्मों के बताए गए पतों की जांच की तो कई जगह कारोबार नहीं मिला। अधिकारियों ने संबंधित लोगों से पूछताछ की। कई लोगों ने फर्म चलाने से इनकार कर दिया।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि GST में दर्ज बैंक खाते उनके नहीं हैं। विभाग का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए कारोबार दिखाकर टैक्स लाभ लेने की कोशिश की गई।
जांच के बाद बढ़ सकती हैं मुश्किलें
GST विभाग ने इस पूरे मामले को फर्जी फर्म बनाकर टैक्स लाभ लेने का मामला माना है। जांच में कई दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने की बात सामने आई है।
फिलहाल पुलिस ने अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आने वाले समय में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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