रायपुर नगर निगम में 100 एकड़ ज़मीन का फाइल कांड; पूर्व मेयर ढेबर बोले-100 करोड़ का खेला, EOW जांच कराओ
NEWS IN SHORT
- रायपुर नगर निगम में 100 एकड़ ज़मीन की फाइल गायब, 4 अधिकारी सस्पेंड हुए
- जोन आयुक्त ने बिना मंजूरी के भेजा सड़क स्ट्रक्चर प्रस्ताव, जांच में गलतियां पाई गईं
- नक्शे और ज़मीन में भारी गड़बड़ी, जांच टीम ने किया निरीक्षण हैं
- 69 ज़मीनों की फाइलें गायब, अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगा है
- पूर्व मेयर और नेता प्रतिपक्ष ने भ्रष्टाचार की जांच की मांग की हैं
NEWS IN DETAIL
Raipur। Chhattisgarh News :रायपुर नगर निगम के ज़ोन 10 अमलीडीह ऑफिस से 100 एकड़ ज़मीन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल गायब हो गई है। इस मामले को लेकर नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप ने
चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि सड़क के स्ट्रक्चर का प्रपोज़ल बिना मंजूरी के भेजा गया था, और इसमें कई गंभीर गलतियाँ थीं।
बिना मंज़ूरी भेजा गया प्रस्ताव
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जोन 10 के आयुक्त ने 17 नवंबर 2025 को बिना कमिश्नर की अनुमति और मुख्यालय की जानकारी के, एक प्रस्ताव नगर और ग्राम निवेश कार्यालय को भेजा। यह नियमों का उल्लंघन था क्योंकि इस प्रकार के प्रस्ताव की स्वीकृति केवल आयुक्त के पास होती है, और जोन स्तर पर इसे भेजना गलत था।
नक्शे और ज़मीन में गड़बड़ी
(land scam )जांच टीम ने 13 अप्रैल 2026 को मौके पर निरीक्षण किया और पाया कि प्रस्तावित नक्शे और ज़मीन की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है। कई मकान नक्शे में शामिल नहीं थे, सड़कों की चौड़ाई गलत दिखाई गई और प्लॉट के आकार भी ठीक नहीं थे। गूगल इमेज से भी यह सिद्ध हुआ कि कई दावे गलत थे।
अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई में देरी
इसके अलावा, यह भी सामने आया कि क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग हो रही थी, लेकिन जोन आयुक्त ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय, उन्हीं अवैध प्लॉटिंग वाले क्षेत्रों को प्रस्ताव में शामिल कर दिया गया। यह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
फाइलों का गायब होना
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि 69 ज़मीनों की फाइलें जोन कार्यालय से गायब हो गई हैं। इसमें रजिस्ट्री दस्तावेज, स्वीकृतियाँ और अन्य रिकॉर्ड शामिल थे। यह फाइल गायब होने की बात अधिकारियों ने स्वीकार की, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट वजह नहीं दी गई।
षड्यंत्र की आशंका
जांच रिपोर्ट में इसे कूटरचना और षड्यंत्र की आशंका जताई गई है। यह कहा गया कि पहले गलत प्रस्ताव तैयार किया गया, फिर बिना अनुमति के उसे आगे भेजा गया, और जब मामला सामने आया तो फाइलें गायब बताई गईं। समिति ने इसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि कानूनी अपराध बताया है।
पूर्व मेयर ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व मेयर एजाज ढेबर ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल हुआ है और इसकी जांच (EOW Investigation) ईओडब्ल्यू से होनी चाहिए।
बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने की साजिश?
निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी इस मामले में आरोप लगाया कि निगम अधिकारियों ने बिल्डर्स और दलालों को फायदा पहुँचाने के लिए यह सब किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का भी इसमें हाथ है। साथ ही, उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जिन ज़मीनों की फाइलें गायब हुईं
(जमीन घोटाला)इस मामले में जिन 69 ज़मीनों की फाइलें गायब हुईं, उनमें भूखंड क्रमांक 81 से 450 तक की ज़मीनें शामिल हैं। इन सभी ज़मीनों की नस्ती गायब होने का मामला और जांच से जुड़े दस्तावेज़ भी गायब हो गए हैं।दस्तावेज़ भी गायब हो गए हैं।
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