रायपुर नकटी गांव : छावनी बना गांव, अपनी ही जमीन के लिए आर-पार की जंग
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर का नकटी गांव एक बार फिर छावनी में बदल गया है। यहां प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए बड़ी पदयात्रा निकाली जा रही है। कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बेघर हुए 85 परिवार सरकार के पुनर्वास प्लान का विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है।
नकटी गांव बना छावनी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का नकटी गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। गांव में सैकड़ों की संख्या में लोग एकजुट हुए हैं। पुलिस ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बल मुस्तैद है। गांव के लोग सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। वे अपने अधिकारों को लेकर काफी मुखर नजर आ रहे हैं।
13 किलोमीटर की पदयात्रा
जिला और शहर कांग्रेस कमेटी इस आंदोलन की कमान संभाल रही है। नकटी गांव के 85 प्रभावित परिवारों के समर्थन में पदयात्रा निकाली गई। यह न्याय पदयात्रा नकटी गांव से शुरू होकर राजभवन तक जाएगी।
यह यात्रा लगभग 13 किलोमीटर लंबा सफर तय करेगी। पदयात्रा पीटीएस (PTS - Police Training School) चौक और माना से होकर गुजरेगी। इसके बाद यह फुंडहर चौक और राम मंदिर करेंसी टावर पहुंचेगी। तेलीबांधा गौरव पथ होते हुए कांग्रेसी लोक भवन पहुंचेंगे।
कांग्रेस के बड़े नेता शामिल
इस न्याय पदयात्रा में कांग्रेस के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज खुद इस मोर्चे की अगुवाई कर रहे हैं। उनके साथ कांग्रेस के कई विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद हैं।
कांग्रेस नेता प्रभावित परिवारों के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं। वे सरकार की कार्रवाई को गरीबों पर अत्याचार बता रहे हैं। कांग्रेसी नेताओं ने राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
सरकारी फ्लैट को किया अस्वीकार
शासन ने प्रभावित परिवारों को रहने के लिए दूसरी जगह आवास दिए थे। प्रशासन ने उन्हें नया रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट देने की पेशकश की थी। यह अस्थाई आवास हाउसिंग बोर्ड की चौथी मंजिल पर स्थित हैं।
यह जगह नकटी गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर है। प्रभावित परिवारों ने इस अस्थाई आवास को लेने से साफ मना कर दिया है। ग्रामीण अपने पुराने गांव को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
टेंट में रहने को मजबूर ग्रामीण
घर तोड़े जाने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। प्रभावित परिवार वर्तमान में गांव में ही रहने को मजबूर हैं। वे अस्थाई टेंट और टीन शेड लगाकर अपना जीवन बिता रहे हैं। जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ग्रामीण के अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा (BJP - Bharatiya Janata Party) सरकार ने गरीबों के आशियाने उजाड़ दिए। सरकार ने पुनर्वास और मुआवजे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों के लिए उचित पुनर्वास नीति की मांग कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि नकटी गांव में ही जमीन दी जाए। हर प्रभावित परिवार को 2,000 वर्गफीट भूमि आवंटित की जाए। इसके साथ ही मकान तोड़े जाने से हुए नुकसान का मुआवजा मांगा गया है। उचित मुआवजा मिलने तक ग्रामीण अपना आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वे अपनी जमीन पर ही दोबारा बसना चाहते हैं।
राजधानी में बदला ट्रैफिक रूट
इस बड़े आंदोलन को देखते हुए रायपुर पुलिस भी अलर्ट पर है। यातायात पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। राजधानी की यातायात व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया गया है। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक रूट बदला रहेगा। श्रीराम मंदिर तिराहा से तेलीबांधा थाना तिराहा तक दबाव अधिक रहेगा। इस दौरान यहां की सर्विस रोड को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
वाहन चालकों के लिए अपील
यातायात पुलिस ने चालकों से मुख्य मार्ग का उपयोग करने को कहा है। महासमुंद की ओर से दुर्ग जाने वाले वाहनों को सीधे निकलने की सलाह दी गई है। प्रदर्शन के कारण सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि राहगीरों को परेशानी न हो। हालांकि आंदोलन के कारण मुख्य मार्ग पर भारी जाम की स्थिति बनी हुई है।
FAQ
- नकटी गांव में लोग क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
उत्तर: नकटी गांव में 85 परिवारों के मकान तोड़ दिए गए हैं। वे उचित मुआवजे और गांव में ही पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। - रायपुर में कांग्रेस की न्याय पदयात्रा का रूट क्या है?
उत्तर: यह पदयात्रा नकटी गांव से शुरू होकर पीटीएस चौक, माना, फुंडहर चौक और तेलीबांधा होते हुए 13 किलोमीटर दूर राजभवन तक जाएगी। - रायपुर में ग्रामीणों ने प्रशासन का कौन सा प्रस्ताव ठुकरा दिया है?
उत्तर: प्रशासन ने ग्रामीणों को 20 किलोमीटर दूर सेक्टर-30 में हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट्स में अस्थाई आवास दिया था, जिसे ग्रामीणों ने अस्वीकार कर दिया।
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