रायपुर स्काईवॉक की डेडलाइन खत्म, करोड़ों खर्च, अब एक्सटेंशन पर हाई लेवल बैठक
समझें क्या है पूरा मामला...
- स्काईवॉक अधूरा: 1500 मीटर के प्रोजेक्ट का सिर्फ 40% काम हुआ है।
- डेडलाइन फेल: अप्रैल 2026 की समय सीमा निकल चुकी है।
- कई काम बाकी: सीढ़ियां, लिफ्ट, एस्केलेटर और कई एग्जिट अधूरे हैं।
- एक्सटेंशन की तैयारी: एजेंसी दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का दावा कर रही है।
- जवाबदेही पर सवाल: विधायक ने देरी की वजह और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
पड़ताल के दौरान पता चला कि कचहरी चौक, आंबेडकर अस्पताल चौक और शास्त्री चौक पर गर्डर चढ़ चुके हैं। मौके पर गर्डर और खंभे देखकर पहली नजर में निर्माण तेजी से आगे बढ़ता दिखता है, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए जरूरी कनेक्टिविटी वाले हिस्से अब भी अधूरे हैं।
लागत और लंबाई का पूरा ब्यौरा
इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 77 करोड़ रुपए है। स्काईवॉक की लंबाई करीब 1500 मीटर है। अब तक सिर्फ 40 प्रतिशत काम पूरा हो सका है, जबकि 60 प्रतिशत काम अभी बाकी है। परियोजना की डेडलाइन अप्रैल 2026 में ही खत्म हो चुकी है।
रोटरी, लिफ्ट, एस्केलेटर और ऊपरी हिस्से की वेल्डिंग का काम भी अब तक पूरा नहीं हो सका है। कई जगह पिलर और सीढ़ियों का काम भी अधूरा पड़ा है।
कलेक्टोरेट और कोर्ट के पास अधूरे एग्जिट
स्काईवॉक से जुड़ने वाले कलेक्टोरेट और जिला कोर्ट की तरफ के तीन एग्जिट अधूरे हैं। DKS और आंबेडकर अस्पताल को जोड़ने वाला हिस्सा भी अभी बंद पड़ा है।
जयस्तंभ चौक, शहीद स्मारक और तहसील कार्यालय की तरफ भी निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। यानी स्काईवॉक का ढांचा भले ही कई जगह दिखने लगा हो, लेकिन लोगों के लिए एक छोर से दूसरे छोर तक चलने लायक नेटवर्क अभी तैयार नहीं है।
PWD ने बताई देरी की वजह
अधिकारियों के मुताबिक व्यस्त इलाके में काम होने की वजह से निर्माण प्रभावित हुआ है। हालांकि सवाल यह भी उठता है कि जब शुरुआत में ही ट्रैफिक और साइट की परिस्थितियां पहले से जानी हुई थीं, तो उन्हें ध्यान में रखकर मैनपावर और कार्ययोजना क्यों नहीं बनाई गई।
पुराने ढांचे नहीं हटे, बना हुआ है हादसे का खतरा
स्काईवॉक के कई हिस्सों में पुराना स्ट्रक्चर अब तक नहीं हटाया गया है। कुछ स्थानों पर इनके हिस्से लटके हुए दिखते हैं, जिससे तेज हवा में इनके गिरने की आशंका बनी रहती है।
नई संरचना खड़ी करने के साथ-साथ पुराने हिस्सों को हटाकर निर्माण स्थल को सुरक्षित करना भी जरूरी है।
हाई लेवल मीटिंग तय करेगी नई समय सीमा
स्काईवॉक प्रोजेक्ट पहले भी विवादों और राजनीतिक खींचतान के कारण अटका रहा। वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने इसे मूल नक्शे के मुताबिक पूरा करने का फैसला लिया।
इसके लिए PWD ने 37.75 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मंजूर की। इससे परियोजना की कुल लागत करीब 77 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। 21 मई 2025 को निर्माण दोबारा शुरू किया गया। PSA (ठेका एजेंसी) को काम सौंपकर अप्रैल 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी सिर्फ 40 प्रतिशत काम ही हो सका है।
एक्सटेंशन के लिए होगी बैठक
स्काईवॉक को लेकर बैठक हुई है, जिसमें ठेका एजेंसी दिसंबर तक काम पूरा करने का दावा कर रही है। इसे देखते हुए तय समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है।
एक्सटेंशन देने को लेकर उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसके बाद ही एक्सटेंशन और आगे की कार्ययोजना पर फैसला लिया जाएगा। PWD ब्रिज संभाग रायपुर के अधिकारी बीके गोठी के मुताबिक इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
विधायक मूणत ने उठाए सवाल
रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत ने स्काईवॉक का अप्रैल 2026 तक केवल 40 प्रतिशत काम पूरा होने पर PWD अधिकारियों और ठेकेदार को बैठक में तलब किया। इस बैठक में PWD और ब्रिज विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
मूणत ने पूछा कि तय समय सीमा के बाद भी स्काईवॉक अधूरा क्यों है। ठेकेदार ने इसके जवाब में मैनपावर की कमी और बारिश को देरी की वजह बताया।
विधायक ने अधिकारियों को उच्चस्तरीय समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि सिर्फ नई डेडलाइन तय करना ही काफी नहीं है। उनके मुताबिक यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि काम में देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
पड़ताल के पांच बड़े सवाल
पड़ताल में पांच अहम सवाल सामने आए हैं। पहला, डेडलाइन क्यों टूटी, जबकि अप्रैल 2026 तक निर्माण पूरा होना था और फिर भी 60 प्रतिशत से ज्यादा काम बाकी है।
दूसरा सवाल है कि कनेक्टिविटी कब पूरी होगी, क्योंकि गर्डर चढ़ चुके हैं लेकिन सीढ़ियां, लिफ्ट, एस्केलेटर और कई एग्जिट अब भी अधूरे हैं। तीसरा सवाल है कि पर्याप्त मैनपावर क्यों नहीं लगाया गया, जबकि काम की धीमी रफ्तार के बावजूद निर्माण तेज करने के लिए संसाधनों की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
चौथा सवाल है कि कार्रवाई के बजाय एक्सटेंशन क्यों दिया जा रहा है, जबकि टेंडर की तय अवधि खत्म हो चुकी है। पांचवां सवाल है कि दिसंबर की गारंटी क्या है, क्योंकि एजेंसी दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का दावा कर रही है, लेकिन नई समय सीमा पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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