रायपुर में नोटों की किल्लत : बाजारों से गायब हुए छोटे नोट, डिजिटल पेमेंट की मांग बढ़ी
NEWS IN SHORT
- रायपुर के बाजारों से 10, 20 और 50 के नोट पूरी तरह गायब हैं।
- आरबीआई नागपुर से छोटे नोटों की सप्लाई 40% तक कम हुई।
- शॉपिंग मॉल और पेट्रोल पंपों पर 80% डिजिटल पेमेंट हो रहा।
- कैट और चैंबर ने की 20 करोड़ की चिल्हर की मांग।
- नोटों की कमी से छोटे व्यापारियों को हो रही भारी परेशानी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में इन दिनों 10, 20 और 50 रुपए के छोटे नोटों की भारी किल्लत हो गई है। आलम यह है कि गोलबाजार, मालवीय रोड, लाखेनगर, कटोरातालाब, रामसागरपारा, गुढ़ियारी और सुंदरनगर जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाकों में चिल्हर नोट पूरी तरह गायब हो चुके हैं। बाजारों में स्थिति इतनी गंभीर है कि दुकानदार ग्राहकों से नगद के बजाय अनिवार्य रूप से डिजिटल पेमेंट करने का आग्रह कर रहे हैं।
इस संकट के पीछे मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नागपुर क्षेत्रीय कार्यालय से होने वाली सप्लाई में लगभग 40 फीसदी तक की कटौती है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छोटे नोटों की प्रिंटिंग (छपाई) को काफी कम कर दिया गया है, जिसका सीधा असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
टूट गई चिल्हर की पुरानी सप्लाई चेन
शहर के बड़े शॉपिंग मॉल, सुपर मार्केट्स, पेट्रोल पंप, रिटेल स्टोर्स और ब्रांडेड शोरूम्स में अब 80% से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड्स आदि) से हो रहा है।
पहले की स्थिति: पहले इन बड़े व्यापारिक केंद्रों पर भारी मात्रा में चिल्हर (छोटे नोट) इकट्ठा होती थी, जिसे वे बैंकों में जमा करते थे। इसके बाद बैंक इन नोटों को छोटे व्यापारियों और आम जनता में रोटेट (सप्लाई) कर देते थे।
अब की स्थिति: अब इन जगहों पर डिजिटल भुगतान होने के कारण बैंकों के पास भी छोटे नोट जमा नहीं हो रहे हैं, जिससे बाजार में चिल्हर का चक्र पूरी तरह ठप हो गया है।
चैंबर और कैट की मांग पर RBI मौन
छोटे नोटों की इस कमी ने प्रदेश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। इस किल्लत से निपटने के लिए कैट (CAIT) ने आरबीआई के अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे राज्य के लिए 20 करोड़ रुपए के छोटे नोटों की मांग की है। वहीं, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विशेष रूप से रायपुर शहर के लिए 5 करोड़ रुपए के चिल्हर की मांग उठाई है।
इतनी बड़ी मांग के बावजूद आरबीआई की ओर से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या ठोस पहल नहीं की गई है। संगठनों को यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि भविष्य में छोटे नोटों की सप्लाई बढ़ाई जाएगी या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि नोटों की सप्लाई से जुड़ी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं।
प्रमुख पदाधिकारियों का पक्ष
अमर पारवानी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कैट): "पूरे राज्य में छोटे नोटों की भारी किल्लत है। हमने आरबीआई के आला अफसरों से मिलकर 20 करोड़ के छोटे नोटों की मांग रखी है, लेकिन दुर्भाग्यवश अभी तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।"
राजेश वासवानी (कार्यकारी अध्यक्ष, चैंबर): "रायपुर में इस वक्त छोटे नोटों का सबसे बड़ा संकट है। बार-बार डिमांड भेजने के बाद भी सप्लाई नहीं मिल रही है। चिल्हर न होने से सबसे ज्यादा परेशानी छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को उठानी पड़ रही है, जिनका व्यापार रोजाना की नगद पूंजी पर निर्भर करता है।"
निष्कर्ष
रायपुर सहित पूरे प्रदेश में छोटे नोटों की किल्लत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदमों और आरबीआई की कम होती सप्लाई का नतीजा है। यदि व्यापारिक संगठनों की 20 करोड़ की मांग पर आरबीआई ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया, तो नगद पर निर्भर छोटे व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
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