धान घोटाला: कागज में सरकारी जमीन पर उगा दी धान, बिना फसल के ही कटवा लिए 15 हजार टोकन

Arun Tiwari | Jan 30, 2026, 15:29 IST
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छत्तीसगढ़ में अन्नदाता की खून पसीने से उगाई धान पर लूट मची हुई है। राजनांदगांव जिले में करीब 500 करोड़ का फर्जीवाड़ा सामने आया है। धान खेत की जगह कागजों में उगा दी गई। सरकारी कागजों में तालाब धान के खेत बन गए।

NEWS IN SHORT

  • धान के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा
  • धान के सत्यापन में सामने आया फर्जीवाड़ा
  • कागजों में उगाकर बेच दी धान
  • बिना फसल के ही कट गए टोकन

NEWS IN DETAIL

कागजों में धान के खेत :

Rajnandgaon.क्या आपने कभी कागजों में धान के खेत देखे हैं। जहां इन खेतों से धान की पैदावार भी हुई और समर्थन मूल्य पर बेच भी दी गई।



यह कमाल सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही हो सका है क्योंकि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा जो है। यह हैरतअंगेज खेती राजनांदगांव जिले में हुई।



यदि यह पकड़ में न आती तो सरकार को 250 करोड़ का चूना लग गया होता। जिले में करीब 200 से अधिक तलाबों,सरकारी जमीन और पड़त भूमि पर धान का पंजीयन कर दिया गया।



जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान यहां धान की फसल नहीं पाई गई। जांच शुरू होते ही 52 हजार से अधिक किसानों द्वारा 15,207 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा समर्पित किया जाना इस बात का संकेत है कि यह खेल केवल किसानों तक सीमित नहीं था, बल्कि वर्षों से चलता आ रहा संगठित नेटवर्क था।



प्रशासन की पड़ताल में सामने आया कि इतनी जमीन में पैदा हुए धान के लिए सरकारी खजाने से करीब 244 करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं। राजनांदगांव जिले में (Paddy Scam in Chhattisgarh) किसानों ने 15,207 हेक्टेयर में धान फसल का रकबा दर्ज कराया था।



जांच में यदि यह पकड़ में न आता, तो इस जमीन में पैदा होना बताया जा रही फसल प्रति हेक्टेयर औसतन 21-21 क्विंटल धान सरकार को 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदना पड़ता।



इसकी कीमत करीब 244.52 करोड़ रूपए होती।



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इस तरह हुई धान खरीदी पर लूट :

- बिना धान बोए पैदावार का दावा : ग्रामीण क्षेत्र के रसूखदार परिवार की 400 एकड़ जमीन की जांच में सामने आया कि करीब 150 एकड़ में धान बोया ही नहीं गया था, लेकिन समर्थन मूल्य पर बेचने की पूरी तैयारी थी।



- राजनामी संपदा की पड़त जमीन पर फसल : राजनांदगांव में राजनामी संपदा की लीज पर ली गई जमीन वर्षों से पड़त थी, फिर भी उसमें धान की पैदावार दर्ज कर दी गई। जांच में ऐसे दर्जनों किसान पकड़े गए।



- तालाब और औद्योगिक भूमि में धान : जिले में दो दर्जन से अधिक किसानों ने मछली पालन या औद्योगिक उपयोग के लिए ली गई जमीन पर धान उत्पादन दिखाया। खुलासा होने पर 16 से अधिक मछली उत्पादक किसानों ने अपना रकबा समर्पित किया।



- महाराष्ट्र से आया धान, छत्तीसगढ़ के नाम पर बिक्री : महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों ने छत्तीसगढ़ के किसानों के नाम पर धान बेचा। प्रशासन ने 350 से ज्यादा ऐसे टोकन पकड़े, जिनके नाम पर खेत खाली थे।



- राइस मिलर-अफसर-बिचौलियों की मिलीभगत : राइस मिलों ने समितियों से धान उठाया। ट्रकों में जीपीएस होने के कारण धान मिल तक पहुंचा, लेकिन धान उतारा नहीं गया। वही धान दूसरे किसानों के नाम पर दोबारा बेचा गया। सूत्रों के मुताबिक जिले में 20 से 30 फीसदी धान इसी तरह बार-बार बेचा गया।



- कागजों में धान की बिक्री : कुछ समितियों में इस गठजोड़ के जरिए केवल कागजी एंट्री से ही पूरा खेल चलाया गया।



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बिना फसल के कटवा लिए टोकन :

जिले में टोकन का बड़ा घोटाला सामने आया है। सूत्र बताते हैं कि रसूखदारों द्वारा 15,000 क्विंटल धान समर्थन मूल्य में बेचने के लिए बिना फसल लिए ही हजारों टोकन कटवा लिए गए।



इसका खुलासा होने के बाद अब हड़कंप मचा हुआ है। धान की भौतिक सत्यापन के बाद अब टोकन का भौतिक सत्यापन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।



यह तस्वीरें तो केवल एक जिले की हैं, इस तरह की गड़बड़ी पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर की जा सकती है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।



समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए जिस तरह की गाइडलाइन सामने आई है, उसके अनुसार जिले में करीब 500 करोड़ की गड़बड़ी का अनुमान लगाया जा रहा है।



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Sootr Knowledge:

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। यह खरीदी 15 नवंबर से शुरु हुई है जो 31 जनवरी तक चलेगी।



यहां 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है। यहां किसान ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराता है।



पटवारी, कृषि विभाग जमीन का सत्यापन करते हैं। हर किसान को उसकी समिति से जोड़ा जाता है। टोकन कटता है और उसी टोकन से धान बेचा जाता है



Importent Points :

  • तालाब, पड़त और औद्योगिक जमीन को कागजों में धान की खेती दिखाया गया।
  • मैदानी जांच के बिना ही पटवारी–कृषि अमले ने फसल होने की पुष्टि कर दी।
  • ऐसे किसानों को भी टोकन दे दिए गए, जिनके खेतों में धान बोया ही नहीं गया था।
  • महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से सस्ता धान लाकर छत्तीसगढ़ के MSP पर बेचा गया।
  • एक ही धान को अलग-अलग नामों से दोबारा बेच दिया।
  • समय पर कार्रवाई न होती तो 400–500 करोड़ रूपए तक का भुगतान हो जाता।

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अब आगे क्या :

धान खरीदी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने की आशंका के बाद जिला प्रशासन ने तेजी से जांच शुरू कर दी है।



एक तरफ भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अन्य राज्यों से लाए जा रहे अवैध धान पकड़ने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकारियों की टीमें तैनात की गई हैं, जहां चौबीस घंटे निगरानी रखी जा रही है।



निष्कर्ष :

राजनांदगांव में सामने आया धान खरीदी घोटाला किसी एक किसान या कुछ गलत पंजीयन का मामला नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चला आ रहा संगठित, सुनियोजित और सिस्टम-समर्थित फर्जीवाड़ा है।



तालाब, पड़त भूमि, औद्योगिक जमीन और बिना बोई गई ज़मीन को कागजों में खेत बनाकर समर्थन मूल्य पर धान बेचा गया।



52 हजार से अधिक किसानों द्वारा रकबा समर्पण इस बात का साफ़ संकेत है कि सत्यापन से पहले पूरा तंत्र आंख मूंदे बैठा था।



यदि समय रहते जांच शुरू नहीं होती, तो अकेले राजनांदगांव जिले में ही 400–500 करोड़ रूपए का भुगतान सरकारी खजाने से हो जाता।



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