रामावतार जग्गी हत्याकांड पर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई, अमित जोगी के वकील ने मांगा समय
NEWS IN SHORT
- रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट में गुरुवार को अंतिम सुनवाई ।
- अमित जोगी के वकील ने 24 घंटे का समय मांगा
- हाईकोर्ट ने CBI को तुरंत केस फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला फिर से मेरिट के आधार पर हाईकोर्ट में खुला।
- केस रीओपन होने के बाद अमित जोगी को जमानत लेनी पड़ सकती है।
NEWS IN DETAIL
गुरुवार को होगी अंतिम सुनवाई
छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में अब हाईकोर्ट में गुरुवार को अंतिम सुनवाई होगी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच के सामने अमित जोगी के वकील ने केस फाइल उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
कोर्ट ने समय देने से इनकार करते हुए CBI को तत्काल फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और वकील को 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा खुला केस
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में खोला गया है। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच दोषियों की अपील खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा बरकरार रख चुकी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को मेरिट पर दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया।
अमित जोगी को पहले मिल चुकी है राहत
CBI जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए गए थे, लेकिन सबूतों के अभाव में वर्ष 2007 में विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। अब केस दोबारा खुलने के बाद कानूनी जानकारों का मानना है कि उन्हें जमानत प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 2 सरकारी गवाह बन गए और बाकी 28 को सजा सुनाई गई थी। रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी की दोषमुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद मामला फिर से हाईकोर्ट आया।
सतीश जग्गी ने लगाए गंभीर आरोप
सतीश जग्गी के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया था कि यह हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान प्रभाव के कारण कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट कर दिए गए। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष सबूत नहीं बल्कि षड्यंत्र की प्रकृति को भी समझना जरूरी होता है।
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी माने जाते थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए और उन्हें छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया गया।
पुलिस अधिकारियों समेत कई दोषी
इस हत्याकांड में 2 तत्कालीन CSP, एक थाना प्रभारी, रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह सहित कई आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
आगे क्या
गुरुवार को होने वाली अंतिम सुनवाई में हाईकोर्ट मेरिट के आधार पर मामले की समीक्षा करेगा। इस सुनवाई के बाद अदालत आगे की कानूनी स्थिति और संभावित कार्रवाई पर फैसला सुना सकती है।
निष्कर्ष
रामावतार जग्गी हत्याकांड एक बार फिर कानूनी मोड़ पर खड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई से मामले में नई परिस्थितियां बन सकती हैं। आने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड की दिशा तय करने में अहम साबित होगी।
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